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Showing posts from March, 2021

हिंदी का वैश्विक सामर्थ्य

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  हिंदी का वैश्विक सामर्थ्य मैं वह भाषा हूं , जिसमें तुम सपनाते हो , अलसाते हो मैं वह भाषा हूं , जिसमें तुम अपनी कथा सुनाते हो   मैं वह भाषा हूं , जिसमें तुम जीवन साज़ पे संगत देते मैं वह भाषा हूं , जिसमें तुम , भाव नदी का अमृत पीते   मैं वह भाषा हूं , जिसमें तुमने बचपन खेला और बढ़े हूं वह भाषा , जिसमें तुमने यौवन , प्रीत के पाठ पढ़े मां! मित्ती का ली मैंने... तुतलाकर मुझमें बोले मां भी मेरे शब्दों में बोली थी - जा मुंह धो ले   जै जै करना सीखे थे , और बोले थे अल्ला-अल्ला मेरे शब्द खजाने से ही खूब किया हल्ला गुल्ला   भावों की जननी मैं , मैं मां , मैं हूँ तिरंगे की शान जन-जन की आवाज हूँ , मेरी शक्ति पहचान2 लो चली मैं अब विश्व विजेता बनने तमसो मा ज्योतिर्गमय , बढ़ाने भारत की शान   हिन्‍दी भाषा का इतिहास हिन्‍दी भाषा का इतिहास लगभग एक हज़ार वर्ष पुराना माना गया है। हिन्‍दी भाषा व साहित्‍य के जानकार अपभ्रंश की अंतिम अवस्‍था ' अवहट्ठ ' से हिन्‍दी का उद्भव स्‍वीकार करते हैं। चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने इसी अवहट्ठ को ' पुरानी हि...

प्रशासनिक हिन्दी का विकास

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  प्रशासनिक हिन्दी का विकास             हमारे देश में काश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक तथा गुजरात से लेकर नागालैंड तक अनेक भाषाएँ , उपभाषाएँ , बोलियाँ तथा उपबोलियाँ बोली जाती है। इनमें विभिन्नता के होते हुए भी एकता के दर्शन होते हैं। प्राचीन काल से भावनात्मक एकता के संदेश के साथ साथ भारतीय साहित्य में देश की सांस्कृतिक गरिमा , यहाँ की सभ्यता , यहाँ के आदर्श और जीवन के शाश्वत मूल्यों , यहाँ की सभ्यता , यहाँ के आदर्श और जीवन के शाश्वत मूल्यों को समान रूप से वाणी मिली है। यही कारण है कि सभी भारतीय भाषाएँ भावनाओं और विचारों की अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में इस धरती पर सांस्कृतिक एकता की पावन गंगा प्रवाहित करती है। भाषा मानव को मानव से जोड़ती है। यह विचारों के आदान प्रदान में सहायक होने के साथ साथ परंपराओं , संस्कृतियों और मान्यताओं तथा विश्वासों को समझने का माध्यम भी हे। प्राचीनकाल से ही विभिन्न भाषाएँ इस देश में पारस्परिक स्नेह , भाई-चारे की भावना तथा सांस्कृतिक एकता और अखंडता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमका निभाती रही है। इस विचार ...