हिंदी का वैश्विक सामर्थ्य
हिंदी का वैश्विक सामर्थ्य मैं वह भाषा हूं , जिसमें तुम सपनाते हो , अलसाते हो मैं वह भाषा हूं , जिसमें तुम अपनी कथा सुनाते हो मैं वह भाषा हूं , जिसमें तुम जीवन साज़ पे संगत देते मैं वह भाषा हूं , जिसमें तुम , भाव नदी का अमृत पीते मैं वह भाषा हूं , जिसमें तुमने बचपन खेला और बढ़े हूं वह भाषा , जिसमें तुमने यौवन , प्रीत के पाठ पढ़े मां! मित्ती का ली मैंने... तुतलाकर मुझमें बोले मां भी मेरे शब्दों में बोली थी - जा मुंह धो ले जै जै करना सीखे थे , और बोले थे अल्ला-अल्ला मेरे शब्द खजाने से ही खूब किया हल्ला गुल्ला भावों की जननी मैं , मैं मां , मैं हूँ तिरंगे की शान जन-जन की आवाज हूँ , मेरी शक्ति पहचान2 लो चली मैं अब विश्व विजेता बनने तमसो मा ज्योतिर्गमय , बढ़ाने भारत की शान हिन्दी भाषा का इतिहास हिन्दी भाषा का इतिहास लगभग एक हज़ार वर्ष पुराना माना गया है। हिन्दी भाषा व साहित्य के जानकार अपभ्रंश की अंतिम अवस्था ' अवहट्ठ ' से हिन्दी का उद्भव स्वीकार करते हैं। चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने इसी अवहट्ठ को ' पुरानी हि...