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जन्मदिवस

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मेरे अम्बरीश के नाम — जन्मदिवस पर ❤️ पत्नी मीता की ओर से १ जन्मदिवस पर आज तुम्हारे, माँगूँ प्रभु से वरदान, स्वस्थ रहो तुम सदा, खिले अधरों पर मधुर मुस्कान। दीर्घायु हो जीवन तुम्हारा, सुख से भरा रहे संसार, हर दिन तुम्हारा मंगलमय हो, सुखमय हो हर बार। २ सात फेरों में जो बँधा है, वह जीवन का पावन बंधन, सुख-दुःख में संग-संग चलना, यही हमारा सच्चा जीवन। ऋतुएँ बदलें, वर्ष बदलें, बदलें जीवन के रंग, अटूट रहे यह प्रेम हमारा, मन में रहे उमंग। ३ तुम मेरे जीवन के आधार, तुम मेरे विश्वास, तुमसे ही पूर्ण हुआ जीवन, तुमसे जीवन में प्रकाश। तुम संग हँसना, तुम संग चलना, तुम संग हर अरमान, तुम मेरे जीवन की कविता, तुम ही उसका गान। ४ प्रभु से मेरी यही प्रार्थना, बना रहे तुम्हारा साथ, सुख की धूप सदा मिलती रहे, न आए दुःख की रात। हर जन्म तुम्हीं जीवनसाथी, यही रहे मन की चाह, तुम संग जीवन-पथ पर चलना, यही मेरी सच्ची राह। ५ आयु बढ़े तो प्रेम बढ़े और बढ़े परस्पर विश्वास, हर दिन जीवन में छाया रहे, स्नेह-सुधा का मधुर प्रकाश। हाथ तुम्हारा हाथ में लेकर, चलती रहूँ हर बार, जन्म-जन्म तक बना रहे यह, हमारा पावन प्यार।...

हर किसी का अपना सावन

हर किसी का अपना सावन, अपना-अपना गान, मन-वीणा पर छेड़ रहा है स्मृतियों का मधु-तान।   किस नभ से उतर आया यह हरित स्वप्न-अभिसार, मन-वन में मधु-मेघ रचें, नव जीवन का विस्तार। पल्लव-पल्लव फूट उठी है स्मृतियों की मृदु तान, झर-झर झरती सुधि-सरिता में भीग रहा अवसान। किसी नयन में नील गगन का नीरव मधु-आलोक, किसी उर में विरह-वेदना का गहरा मौन अशोक। कहीं कदंब की श्याम छवि पर मलय-पवन मुस्काए, कहीं प्रतीक्षा की संध्या में दीपक स्वयं जल जाए। किसी कृषक की थकी हथेली हरियाली का गीत, किसी तपस्वी के अंतर में जागे शाश्वत प्रीत। किसी शिशु की कागज़-नैया हँसती बहे अपार, किसी वृद्ध की स्मृति-पगडंडी लौटे फिर उस पार। सावन केवल मेघ नहीं है, अंतस का उच्छ्वास, सूखे प्राणों पर बरसाता आशा का मधुमास। जिसने प्रकृति के स्पंदन में अपना स्वर पहचान, उसके द्वारे उतर पड़ा है नव जीवन का गान। कोई भीगे प्रेम-नीर में, कोई ध्यान-अग्नि में, एक ही ऋतु खिलती देखो, कितने-कितने मन में। हर मन अपना वन-विहंगम, हर उर अपनी धुन, हर किसी का अपना सावन, अपना मधुर gaaन।

ख़ुशियाँ भी कहाँ कम हैं..

 उसने कहा- बेवजह ही ख़ुश क्यों हो ? मैंने कहा- हर वक्त दुखी भी क्यों रहूँ  ?? उसने कहा- जीवन में      बहुत ग़म है.... मैंने कहा -गौर से देख, ख़ुशियाँ भी कहाँ कम हैं.. उसने तंज़ किया - ज़्यादा हँस मत, नज़र लग  जाएगी!! मेरा ठहाका बोला- हंसमुख हूँ, नज़र भी फिसल जाएगी... उसने कहा- नहीं होता क्या तनाव कभी?? मैंने जवाब दिया- ऐसा  तो कहा नहीं! उसकी हैरानी बोली- फिर भी यह हँसी !! मैंने कहा-डाल ली आदत हर घड़ी मुसकाने की.. उसने फिर तंज़ किया- अच्छा! बनावटी हँसी..इसीलिए परेशानी दिखती नहीं... मैंने कहा- अटूट विश्वास! मालिक मेरे साथ!! फिर चिंता-परेशानी का क्यों लें साथ! वह मुझसे "मैं दुखी हूँ" सुनने को थी बेताब! इसलिए प्रश्नों का सिलसिला भी था  बेहिसाब .... उसने पूछा - कभी तो छलकते होंगे आँसू? मैंने कहा-अपनी मुस्कानों से बाँध बनाया  है..... अपनी हँसी कम पड़े, तो कुछ और लोगों को हँसा देती हूँ... कुछ बिखरी ज़िंदगियों में, उम्मीदें जगा.... देती हूँ... मेरी यह मुस्कान दुआएं हैं उन सबकी.. जिन्हें मैंने तब बाँटा, जब मेरे पास भी कम थीं..

जन्मदिन की शुभकामनाएँ – प्यारी बिटिया मोनिका के नाम

 जन्मदिन की शुभकामनाएँ – प्यारी बिटिया मोनिका के नाम मोनिका my darling, जन्मदिवस पर ढेरों स्नेह-आशीष हमारा, खुशियों से महके जीवन तुम्हारा, चमके हर दिन सितारा। प्रेम, विश्वास और मुस्कानों से हर आँगन तुम्हारा भर जाए, हर सपना साकार हो तुम्हारा, हर इच्छा पूरी हो जाए। अक्षर संग तुम्हारा पावन बंधन, सदा अटल और मधुर बना रहे, हर सुख-दुख में साथ निभाते, प्रेम का दीप सदा जला रहे। मम्मी-पापा का आशीर्वाद यही है-सौभाग्य सदा तुम्हारा शृंगार बने, आशी-अपूर्व की कामना यही है- कि जीवन तुम्हारा उत्सव बने।

बेटा सारांश

 बेटा सारांश, जीवन तुम्हारा खुशियों का मधुमास रहे, हर दिन नया सवेरा हो, हर पल में उल्लास रहे। तुम्हारे सपनों को पंख मिलें, हर मंज़िल तुम्हारे साथ चले, मेहनत का हर एक कण बनकर, सफलता तुम्हारे हाथों पले। माँ-पिता का आशीष सदा, आयुषी जीवन का श्रृंगार बने, सद्गुण, साहस, प्रेम की ज्योति, हर पथ पर तुम्हारा द्वार बने। जन्मदिवस पर यही दुआ है, मुस्कानों से संसार भरे, दीर्घायु हो, सुखमय हो जीवन—हर क्षण तुम्हारा स्वर्णिम निखरे।

सुजॉय और अभिलाषा के शुभ-विवाह पर

 सुजॉय और अभिलाषा के शुभ-विवाह पर....❤️❤️ आज सजे हैं सपनों के दीप, महक उठे हैं जीवन के गीत। सुजॉय और अभिलाषा का यह शुभ मिलन, बन जाए प्रेम का अनुपम संगीत। माँ सुजाता की ममता का आँचल, पिता सुदीप का स्नेहिल विश्वास। बनें सदा जीवन के पथ-प्रदर्शक, देते रहें हर पल शुभ आशीष का प्रकाश। सम्मान, समर्पण और अपनापन, हर रिश्ते की पहचान बने। एक-दूजे का हाथ थामे तुम, हर मौसम में मुस्कान बने। सुख में विनम्र, दुःख में साहसी, हर चुनौती का साथ निभाना। विश्वास की डोर कभी न टूटे, प्रेम का दीप सदा जलाना। ईश्वर से है यही प्रार्थना, हर दिन नई खुशियाँ बरसें। घर-आँगन हँसी से गूँज उठे, सपनों के सारे सुमन महकें। दादी बाबा, नानी नाना का आशीष सदा तुम्हारे संग रहें। जीवन-पथ पर प्रेम, समृद्धि, सौभाग्य के दीप निरंतर जलें। शुभ हो यह मंगल परिणय, सदा प्रेम का रहे अभिनंदन। सुजॉय और अभिलाषा का जीवन बने सुख, शांति और आनंद का वंदन।

मत स्वीकारो जाल

 मत स्वीकारो जाल॥ बंधन चाहे लाख हों, मत खोना विश्वास। हिम्मत की तलवार से, लिख अपना इतिहास॥ झुकना यदि मजबूर हो, टूटे नहीं कमाल— लंगड़ाकर चलना भला, मत स्वीकारो जाल॥ पैर कटे तो क्या हुआ, जीवित रहे उड़ान। मन के पंखों से बड़ा, नहीं कोई वरदान॥ हिम्मत ही इंसान की, होती सौरभ ढाल— लंगड़ाकर चलना भला, मत स्वीकारो जाल॥ सोने के पिंजरे भले, लगते हों आराम। छीन स्वतंत्रता अगर, किस कामों के धाम॥ स्वाभिमान के सामने, फीका वैभव-भाल— लंगड़ाकर चलना भला, मत स्वीकारो जाल॥ जो पराधीन हो गया, खो बैठा अधिकार। अपनी इच्छा भी लगे, जैसे कोई भार॥ स्वतंत्रता का मूल्य है, जीवन का मंगल-पाल— लंगड़ाकर चलना भला, मत स्वीकारो जाल॥ 'सौरभ' सिर ऊँचा रहे, चाहे कठिन हो दौर। स्वतंत्रता से बढ़ नहीं, कोई दूसरा और॥ जीवन की हर हार से, बेहतर ऊँचा भाल— लंगड़ाकर चलना भला, मत स्वीकारो जाल॥