विश्व शांति लाने के लिए सहिष्णुता का महत्व
विश्व शांति लाने के लिए सहिष्णुता का महत्व मानव सभ्यता की यात्रा जितनी प्राचीन है , उतनी ही संघर्षों और युद्धों की भी। किंतु इन संघर्षों की धूल के बीच जब-जब सहिष्णुता का दीप प्रज्वलित हुआ है , तब-तब मानवता ने अपनी सबसे उजली शक्ल देखी है। सहिष्णुता केवल एक नैतिक गुण नहीं , बल्कि विश्व शांति की वह आधारशिला है , जिस पर एक समरस और सौहार्दपूर्ण समाज का निर्माण संभव है। सहिष्णुता शब्द संस्कृत धातु ‘सह’ और ‘ष्णु’ से मिलकर बना है , जिसका आशय है—दूसरों के मत , विचार , धर्म , आचरण या व्यवहार को स्वीकार करना , उन्हें सम्मान देना। यह केवल सहने का भाव नहीं , बल्कि हृदय की विशालता का प्रतीक है। सहिष्णु व्यक्ति दूसरों की भिन्नताओं में भी एकता का सौंदर्य देखता है। महा कवि रहीम ने कहा था— “रहिमन धागा प्रेम का , मत तोरो चटकाय। टूटे से फिर ना जुड़े , जुड़े गांठ पड़ जाए॥” यह “गांठ” असहिष्णुता की प्रतीक है , जो मानव संबंधों को जकड़ लेती है। सहिष्णुता उस गांठ को खोलने की प्रक्रिया है। इतिहास साक्षी है कि जहां-जहां सहिष्णुता की भावना प्रबल रही , वहां शांति , ज्ञ...