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विश्व शांति लाने के लिए सहिष्णुता का महत्व

  विश्व शांति लाने के लिए सहिष्णुता का महत्व मानव सभ्यता की यात्रा जितनी प्राचीन है , उतनी ही संघर्षों और युद्धों की भी। किंतु इन संघर्षों की धूल के बीच जब-जब सहिष्णुता का दीप प्रज्वलित हुआ है , तब-तब मानवता ने अपनी सबसे उजली शक्ल देखी है। सहिष्णुता केवल एक नैतिक गुण नहीं , बल्कि विश्व शांति की वह आधारशिला है , जिस पर एक समरस और सौहार्दपूर्ण समाज का निर्माण संभव है। सहिष्णुता शब्द संस्कृत धातु ‘सह’ और ‘ष्णु’ से मिलकर बना है , जिसका आशय है—दूसरों के मत , विचार , धर्म , आचरण या व्यवहार को स्वीकार करना , उन्हें सम्मान देना। यह केवल सहने का भाव नहीं , बल्कि हृदय की विशालता का प्रतीक है। सहिष्णु व्यक्ति दूसरों की भिन्नताओं में भी एकता का सौंदर्य देखता है। महा कवि रहीम ने कहा था—   “रहिमन धागा प्रेम का , मत तोरो चटकाय।   टूटे से फिर ना जुड़े , जुड़े गांठ पड़ जाए॥”   यह “गांठ” असहिष्णुता की प्रतीक है , जो मानव संबंधों को जकड़ लेती है। सहिष्णुता उस गांठ को खोलने की प्रक्रिया है।   इतिहास साक्षी है कि जहां-जहां सहिष्णुता की भावना प्रबल रही , वहां शांति , ज्ञ...

कृतज्ञ हूँ मैं

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  कृतज्ञ हूँ मैं उस प्रभात की , जो मौन द्वार खटखटाए , अधूरी नींद , थकी आँखों में , फिर सपने बो जाए।   कृतज्ञ हूँ मैं उस श्वास की , जो हर पल साथ निभाती , अनकहे बोझों के नीचे भी , जीवन-लय सिखाती।   कृतज्ञ हूँ मैं उस धूप की , जो छाँव बनकर ठहरी , कठोर समय की तपती छाती पर , करुणा बनकर उतरी।   कृतज्ञ हूँ मैं उन आँसुओं की , जो चुपके बह जाते हैं , भीतर जमी घनीभूत पीड़ा को , हल्का कर जाते हैं।   कृतज्ञ हूँ मैं उन रिश्तों की , जो टूटकर भी जुड़ गए , खामोशी की दरारों में , विश्वास की ओर मुड़ गए।   कृतज्ञ हूँ मैं उन शब्दों की , जो कहे नहीं जा पाए , पर आँखों की भाषा में , अर्थ बनकर मन पर छाए।   कृतज्ञ हूँ मैं उन रातों की , जिनमें खुद से मुलाकात हुई , अकेलेपन के पलों में , आत्मा से की गहरी बात हुई।   कृतज्ञ हूँ मैं उन राहों की , जिन पर हौसला साथ-साथ चला , कदम-कदम पर गिरते हुए भी , साहस दीपक जलता चला।   कृतज्ञ हूँ मैं उस समय की , जो छीनकर भी दे जाता है , अहंकार का भार उतारकर , कृतज्ञता सिखलाता है।   कृतज्ञ हूँ मैं उन प्रश्नों की , जिनके उत्तर देर से आए ,...

नमस्ते, मैं साड़ी हूँ

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  नमस्ते, मैं साड़ी हूँ   भारत की सांस्कृतिक परंपराओं में साड़ी केवल एक वस्त्र नहीं , बल्कि सभ्यता , सौंदर्य और स्त्री अस्मिता की जीवंत प्रतीक है। हजारों वर्षों से भारतीय नारी साड़ी को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाए हुए है। समय बदला , पहनावे के ढंग बदले , फैशन की परिभाषाएँ बदलीं , किंतु साड़ी आज भी अपनी गरिमा और लोकप्रियता बनाए हुए है। यह वस्त्र इतिहास , कला , संस्कृति और परंपरा का ऐसा संगम है , जिसने पीढ़ियों को जोड़े रखा है। विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में गिनी जाने वाली सिंधु घाटी सभ्यता में भी साड़ी जैसे वस्त्र के प्रमाण मिलते हैं। खुदाई में मिली एक महिला की मूर्ति में धोती-सदृश कपड़ा लपेटे हुए देखा जा सकता है , जिसे साड़ी का पूर्वज माना जाता है। साड़ी शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ' सट्टिका ' शब्द से हुई है , जिसका अर्थ कपड़े की पट्टी होता है। ऋग्वेद , अथर्ववेद और उपनिषदों में भी स्त्रियों के वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। उस समय बिना सिले वस्त्र पहनने की परंपरा थी और साड़ी उसी परंपरा का विकसित रूप मानी जाती है। महाभारत के ' चीर हरण ' प्रसंग में द्रौपदी के अंतही...

EPISODE 24.भेद ये गहरा, बात ज़रा-सी! 04/12/26

  EPISODE 24. भेद ये गहरा , बात ज़रा-सी! 04/12/26 INTRO MUSIC नमस्कार दोस्तों! मैं मीता गुप्ता ,  एक आवाज़ ,  एक दोस्त ,  किस्से- कहानियाँ सुनाने वाली आपकी मीत।   जी हाँ , आप सुन रहे हैं मेरे पॉडकास्ट , ‘ यूँ ही कोई मिल गया’ के दूसरे सीज़न का अगला और अंतिम एपिसोड ...जिसमें हैं ,  नए जज़्बात ,  नए किस्से ,  और वही पुरानी यादें...उसी मखमली आवाज़ के साथ...।   जी हाँ दोस्तों ,  आज हम बात करने जा रहे हैं, प्रेम की..आपको याद है न दोस्तों, कि मैंने पॉडकास्ट की शुरुआत ही प्रेम-रसायन की बात से की थी, क्योंकि प्रेम है, तो हम हैं। प्रेम-रसायन पर बात करते-करते मैंने यह जाना कि प्रेम का सीधा-सच्चा संबंध सुंदरता से होता है, और यह आँखों में समाया होता है और आपके आयी, आज के एपिसोड में इस भेद को जानने की कोशिश करते हैं.. Music   पिछली रात बहुत कोहरा था , ओस भी थी। ऐसा तो होना लाज़मी है, क्योंकि सर्दियों का मौसम है। पर इस ठिठुरती ठंड में कितने लोग देख पाते हैं कि पिछली रात चुपके से आसमान ने धरती को एक प्रेम-पत्र लिख भेजा है। ओस की बूँदों से...

शिवानी की 'पूतोंवाली'

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  शिवानी की ' पूतोंवाली ' एक संक्षिप्त परंतु तीव्र उपन्यास है जो पारिवारिक बंधनों , सामाजिक अपेक्षाओं और नारी के संघर्ष को संवेदनशील भाषा में उकेरता है , इसकी शक्ति चरित्र-निर्माण और भावनात्मक सघनता में निहित है। पात्र केवल घटनाओं के वाहक नहीं , बल्कि उपन्यास की नैतिक और भावनात्मक धुरी हैं। शिवानी की यह कृति हिंदी उपन्यास परंपरा में एक छोटा, पर प्रभावी योगदान है , जिसे कई डिजिटल पुस्तकालयों और ई बुक प्लेटफार्मों पर उपलब्ध कराया गया है यह पुस्तक लगभग एक सौ बीस पृष्ठों की संक्षिप्त रचना है , जो संकुचित रूप में गहरे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रश्न उठाती है| शिवानी की नायिकाएँ अक्सर पारंपरिक सीमाओं और आत्मिक आकांक्षाओं के बीच फँसी हुई दिखती हैं। इस उपन्यास में भी मुख्य नायिका का चरित्र आंतरिक विरोधाभासों से भरा है — वह घर और समाज की अपेक्षाओं को समझती है परंतु अपनी पहचान और स्वतंत्रता की चाह भी स्पष्ट है। उसकी चुप्पियाँ और छोटे छोटे विद्रोही संकेत कहानी को भावनात्मक गहराई देते हैं ; ये संकेत पाठक को उसके भीतर के दर्द और उम्मीद दोनों से जोड़ते हैं।शिवानी के पात्रों के मन...

पल पल दिल के पास, वो रहता है...

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 पल पल दिल के पास, वो रहता है... धर्मेंद्र: एक अमर हीरो को समर्पित धर्मेंद्र का जाना सिर्फ एक अभिनेता का जाना नहीं, बल्कि एक युग का शांत हो जाना है। गाँव की मिट्टी से उठकर सिनेमा के आसमान तक पहुँचे इस कलाकार ने अपने अभिनय से नहीं, बल्कि अपनी सादगी और मानवीयता से करोड़ों दिल जीते। रोमांस से लेकर एक्शन और कॉमेडी तक—हर भूमिका में वे जीवन की सच्चाई लेकर आए। “शोले” का वीरू, “चुपके चुपके” का प्रोफेसर, “मेरा गाँव मेरा देश” का नायक—ये सारे सिर्फ किरदार नहीं, हमारी यादों का हिस्सा हैं। धर्मेंद्र चले गए, लेकिन उनका उजाला हमेशा रहेगा। हिंदी सिनेमा ने अपने लंबे सफर में कई सितारों को जन्म दिया, पर उनमें कुछ ऐसे हैं जिनकी रोशनी समय के साथ कम नहीं होती, बल्कि हर पीढ़ी की आँखों में एक नई चमक लेकर जीवित रहती है। धर्मेंद्र उन्हीं दुर्लभ सितारों में से थे, जो सिर्फ अभिनेता नहीं थे, बल्कि भारतीय समाज के भावनात्मक ताने-बाने का हिस्सा बन चुके थे। उनका जाना एक ऐसी खामोशी छोड़ गया है, जिसे शब्दों में बाँध पाना मुश्किल है। वे सिर्फ पर्दे पर दिखने वाली एक छवि नहीं थे; वे एक ऐसे इंसान थे, जिनकी ग...

kindness

1. Your brain releases feel-good chemicals every time you help someone. Acts of kindness trigger the release of dopamine, serotonin, and oxytocin in your brain, creating what scientists call a “helper’s high.” This natural chemical cocktail makes you feel happier and more connected to other people without needing any external substances or expensive treatments. Start with small daily acts like holding doors or complimenting strangers. These micro-moments of kindness provide instant mood boosts that accumulate throughout your day, creating a natural antidepressant effect. 2. Kind people have stronger immune systems and live longer. Research shows that people who regularly volunteer and help others have lower rates of illness and actually live longer than those who focus primarily on themselves. Kindness appears to reduce inflammation in your body and strengthen your immune response. Make helping the people around you part of your regular routine. You don’t need to wait for special occas...