Posts

Showing posts from November, 2024

जीवन संघर्षो से न घबराना मनुष्यता ही है

Image
जो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ है  तूफ़ानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ है  जिसने सोने को खोदा लोहा मोड़ा है  जो रवि के रथ का घोड़ा है  वह जन मारे नहीं मरेगा नहीं मरेगा  जो जीवन की आग जला कर आग बना है  फ़ौलादी पंजे फैलाए नाग बना है  जिसने शोषण को तोड़ा शासन मोड़ा है  जो युग के रथ का घोड़ा है  वह जन मारे नहीं मरेगा नहीं मरेगा  कई विचारकों का मत है कि अगर हम कोई जोखिम नहीं लेते हैं, तो वह अपने-आप में सबसे बड़ा जोखिम है। यह सही भी है कि ज़्यादातर लोग जोखिम लेने से डरते हैं। इसकी कई वजहें होती हैं, लेकिन जो सबसे बड़ी वजह है, वह है संकल्प और विचार शक्ति की कमी।        कहने को तो विचार शक्ति और संकल्प का अभाव जानवरों में होता है, पर जब कोई इंसान बिना विचारे कोई ऐसा काम कर बैठता है, तो कहा जाता है कि वह तो निरा पशु हो गया है। यानी इंसान होकर भी अगर पशुओं जैसी जिंदगी जीएं, तो जीना क्या और मरना क्या ?  इसीलिए वेद में कहा गया है- "मनुर्भव, यानी मनुष्य बनो।" इसका मतलब हे कि महज इंसान के वेश में हम इंसान सही मायने में तब तक नहीं ...