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जीवन कौशल

    अपने जीवन को और सरल एवं सहज बनाना ही जीवन कौशल है।   अनुकूली तथा सकारात्मक व्यवहार की वे योग्यताएँ हैं जो व्यक्तियों को दैनिक जीवन की माँगों और चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए सक्षम बनाती हैं।ये जीवन कौशल सीखे जा सकते हैं तथा उनमें सुधार भी किया जा सकता है। आग्रहिता , समय प्रबंधन , सात्विक चिंतन , संबंधों में सुधार , स्वयं की देखभाल के साथ-साथ ऐसी असहायक आदतों , जैसे - पूर्णतावादी होना , विलंबन या टालना इत्यादि से मुक्ति , कुछ ऐसे जीवन कौशल हैं , जिनसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी।   जीवन को सफल बनाने के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण बातें इस प्रकार से हैं-   1.तन मन को स्वस्थ बनाए रखना।   2.आलस मुक्त जीवन।   3.अच्छी अच्छी बातें सीखना।   4.स्व-कर्त्तव्य पालन करना।   5.नित नूतन ज्ञान एवं मनोभाव से कार्य करना।   आग्रहिता ( Assertiveness) आग्रहिता एक ऐसा व्यवहार या कौशल है जो हमारी भावनाओं , आवश्यकताओं , इच्छाओं तथा विचारों के सुस्पष्ट तथा विश्वासपूर्ण संप्रेपषण में साहयक होता है।...

मानव बनाम मशीन

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  मानव बनाम मशीन   आदर्शों से आदर्श भिड़े , प्रज्ञा प्रज्ञा पर टूट रही। प्रतिमा प्रतिमा से लड़ती है , धरती की किस्मत फूट रही आवर्तों का है विषम जाल , निरुपाय बुद्धि चकराती है , विज्ञान-यान पर चढी हुई सभ्यता डूबने जाती है। प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह ‘ दिनकर ’ जी मशीनी हृदयहीनता और असंवेदनशीलता का वर्णन करते हुए मानव को यह संदेश देते हैं कि वह अपनी रागमयी भावनाओं की महावर को सर्वत्र फैलाता चले , क्योंकि शांति का वास्तविक मार्ग बुद्धि नहीं , हृदय से होकर गुज़रता है। मशीनें मानव की रचना हैं। मानव जीवन को आसान बनाने के लिए मानव द्वारा मशीनों का निर्माण किया गया। मशीनों पर मानव की निर्भरता बढ़ती जा रही है , इसने एक नई क्रांति को जन्म दिया है। मशीन केवल एक मोटर चालित गैजेट है , जिसमें विभिन्न भाग होते हैं। मशीनें अलग-अलग काम करती हैं , लेकिन उनमें मानवों जैसा जीवन नहीं होता। औद्योगिक क्रांति के बाद मानव तेज़ी से विकसित हुआ है। मशीनों और आधुनिक तकनीक ने उन्हें जीवन में आराम , सुविधाएं और फुरसत दी है। साधारण गणनाओं से लेकर वस्तुओं क...

हिंदी पत्रकारिता दिवस

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                                                                              हिंदी पत्रकारिता दिवस हिंदी पत्रकारिता जन सरोकार की पत्रकारिता है , जिसमें माटी की खुशबू महसूस की जा सकती है। समाज का प्रत्येक वर्ग फिर चाहे वो किसान हो , मजदूर हो , शिक्षित वर्ग हो या फिर समाज के प्रति चिंतन-मनन करने वाला आम आदमी सभी हिंदी पत्रकारिता के साथ अपने को जुड़ा हुआ मानते हैं।   30 मई ' हिंदी पत्रकारिता दिवस ' देश के लिए एक गौरव का दिन है। आज विश्व में हिंदी के बढ़ते वर्चस्व व सम्मान में हिंदी पत्रकारिता का विशेष योगदान है। हिंदी पत्रकारिता की एक ऐतिहासिक व स्वर्णिम यात्रा रही है , जिसमें अनेक संघर्ष , कई पड़ाव व सफलताएं भी शामिल है। स्वतंत्रता संग्राम या उसके बाद के उभरते नए भारत की बात हो , तो उसमें हिंदी पत्रकारिता के भागीरथ प्रयास को नकारा नहीं जा सकता। हिंदी पत्रकारिता सही म...

21वीं शताब्दी में बुद्ध की शिक्षा की प्रासंगिकता

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  21 वीं शताब्दी में बुद्ध की शिक्षा की प्रासंगिकता   दुनिया को अपने विचारों से नया मार्ग (मध्यम मार्ग) दिखाने वाले महात्मा बुद्ध भारत के एक महान दार्शनिक , समाज सुधारक और बौद्ध धर्म के संस्थापक थे। राजपरिवार में जन्में महात्मा बुद्ध का जन्म नेपाल की तराइयों में स्थित लुंबिनी में 563 वीं ईसा पूर्व में हुआ था। विदित हो की अपने जीवन के एक चरण में उन्होंने मानव जीवन के दुखों को देखा जैसे रोग , वृद्धावस्था एवं मृत्यु। इसके पश्चात् वे 29 वर्ष की अवस्था में सांसारिक जीवन को त्याग कर सत्य की खोज में निकल पड़े। उन्होने बोधगया में एक पीपल वृक्ष के नीचे ध्यान करते हुए आत्म बोध प्राप्त किया। तब से लेकर 80 वर्ष की अवस्था में अपनी मृत्यु तक , उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन यात्र करते हुए लोगों को जीवन चक्र से छुटकारा पाने की राह दिखाते हुए बिताया। उनकी मृत्यु के पश्चात उनके शिष्यों ने राजगृह में एक परिषद का आह्वान किया , जहाँ बौद्ध धर्म की मुख्य शिक्षाओं को संहिताबद्ध किया गया। इन शिक्षाओं को पिटकों के रूप में समानुक्रमित करने के लिए चार बौद्ध संगीत का आयोजन किया गया जिसके पश्चात् तीन मु...