कुछ ऐसी बातें, जो आपके रिश्तों में मिठास घोल देंगी
कुछ ऐसी बातें , जो आपके रिश्तों में मिठास घोल देंगी रूठे सुजन मनाइए , जो रूठे सौ बार। रहिमन फिरि - फिरि पोहिए , टूटे मुक्ताहार।। प्रस्तुत दोहे में महाकवि रहीम कहते हैं कि जब भी कोई हमारा अपना प्रियजन हमसे रूठ जाए , तो उसे मना लेना चाहिए , भले ही हमें उसे सौ बार ही क्यों ना मनाना पड़े , प्रियजन को अवश्य ही मना लेना चाहिए। रहीम इस दोहे के माध्यम से हमें प्रियजनों के महत्त्व को बता रहे हैं। वे कहते हैं कि जिस प्रकार मोतियों की माला के बार - बार टूटने पर भी हर बार मोतियों को पिरोकर हार बना लिया जाता है , वैसे ही हमें भी प्रियजनो को मना लेना चाहिए। मैं रहीम के संदेश का समर्थन करती हूँ क्योंकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है । रिश्ते केवल सामाजिक व्यवस्थाओं की धुरी ही नहीं हैं , वे इंसानियत के क्रमशः विकास के महत्वपूर्ण उत्प्रेरक भी हैं। बिना समाज के , बिना परिवार के या बिना रिश्तों के वह रह ही नहीं सकता । रिश्तों की नाज़ुक डोर ...