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Showing posts from September, 2025

वो तीन दिन..

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  वो तीन दिन..    पहला दिन बेचैनी और अकेलेपन से भरा था|   सुबह होते ही मोबाइल पर नए मैसेज या नोटिफिकेशन की उम्मीद में आँख खुली , लेकिन फोन बिल्कुल शांत रहा। अचानक ऐसा लगा कि जैसे मेरी साँस रुक गई हो। तीन दिन इंटरनेट न चलने के अनुभव ने पहले दिन मुझे बेचैन और अकेला कर दिया। सोशल मीडिया की आदत के कारण चारों तरफ एक खालीपन छा गया था। इस अनजाने खालीपन में बेचैनी का अनुभव हो रहा था। मैं हाथ में फोन लिए बैठी थी , लेकिन स्क्रीन पर एक भी संदेश नहीं दिख रहा था। जैसे ही एहसास हुआ कि मैं वेब जगत से दूर हो गई हूँ , दिल की धड़कन तेज हो गई। हर पल कहीं से कोई सूचना मिल जाएगी , इसी उम्मीद में लगातार फोन चेक करने की आदत के बावजूद आज कुछ भी नहीं मिला। धीरे-धीरे घबराहट और ‘फ़ोमो’ ( FOMO - Fear of Missing Out) की भावना मुझ पर हावी हो गई थी। खिड़की से बाहर घूरते हुए मैंने पेड़ों और आसमान में अपना अजनबीपन तलाशा। मन बार-बार यही सवाल करता रहा – तीन दिन बिना इंटरनेट कैसे कटेंगे ? कैसे नया संगीत सुनूंगी , कैसे दुनिया की खबरें जानूंगी , या मित्रों से जुड़ूंगी ?   पहली शाम अपने चरम प...

दिल चाहता है..

  दिल चाहता है..   जब भी तुम्हें देखती हूं , तुम्हें बिखरा-बिखरा- सा पाती हूं , लगता है जैसे आसमान में किसी देवदूत के गले से टूट कर गिरी हुई माला के मोती हो तुम , जो धरती पर आते-आते बिखर गई हो | तुम कुछ इस तरह से टूट कर गिरे , कि माला का वह धागा , उस देवदूत के गले में ही छूट गया और सभी कीमती मोती इधर-उधर हो गए , जिनसे अलौकिक प्रकाश और खुशबू निकल रही है | मैं उन्हें छूने जाती हूं , तो वह जुगनू बन जाते हैं और दर्द के स्याह अंधेरों में लुकाछिपी खेलने लगते हैं | कभी मैंने चाहा कि तुम्हें समेट लूं अपने दोनों हाथों में , फिर से एक सुंदर माला बना दूं , लेकिन उन्हें समेटना मेरे मेरे बस की बात भी तो नहीं | छूते ही गायब हो जाते हैं , वे मोती | सुनो! ऐसा करो कि तुम खुद को समेट लो , हर मोती को सहज लो , मैं अपनी सांसों का अनमोल धागा तुम्हें दे सकती हूं | दरअसल जब मैं आई थी ना , इस धरती पर , तब से यह मेरे पास बेकार ही पड़ा है | मेरे पास तो कीमती मोती भी नहीं , जिन्हें मैं इनमें पिरोकर माला बना सकूं | अब तुम ऐसा करो , इस धागे में अपने सभी मोतियों को आहिस्ता आहिस्ता पिरो दो , यहां-वहां बि...

गूगल: एक परिचय

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गूगल : एक   परिचय आज के डिजिटल युग में इंटरनेट का महत्व हर किसी के जीवन से जुड़ गया है। इस इंटरनेट जगत में गूगल का नाम सबसे ऊपर आता है। गूगल केवल एक सर्च इंजन नहीं है बल्कि यह ज्ञान , जानकारी , मनोरंजन और तकनीकी नवाचार का विशाल भंडार है। Google नाम अंग्रेजी शब्द “ Googol” से लिया गया है , जिसका अर्थ होता है 1 के बाद 100 शून्य ( zeros) होना। यह नाम डेटा की विशालता और गूगल के दीर्घकालिक विज़न को दर्शाता है। गूगल एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय तकनीकी कंपनी है , जिसकी स्थापना 4 सितम्बर 1998 को लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने की थी।   वर्तमान में गूगल का नेतृत्व सुंदर पिचई , जो   सीईओ के पद पर कार्यरत हैं , कर रहे हैं |  इसका मुख्यालय माउंटेन व्यू , कैलिफोर्निया , यूएसए में स्थित है और यह इंटरनेट से लेकर क्लाउड कंप्यूटिंग , सॉफ्टवेयर , डिजिटल विज्ञापन तथा अन्वेषणात्मक परियोजनाओं तक अनेक क्षेत्रों में कार्यरत है।   प्रारंभ में यह केवल ए...