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निर्भयाएं कब तक हैवानियत का शिकार होती रहेंगी?

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  निर्भयाएं कब तक हैवानियत का शिकार होती रहेंगी ? महिलाओं के विरुद्ध यौन हिंसा में संस्थागत कारकों में अपर्याप्त संसाधन वाले पुलिस बल और अप्रभावी कानून प्रवर्तन सहित संस्थागत विफलताएं , महिलाओं के खिलाफ हिंसा के जारी रहने में योगदान करती हैं। अक्सर , मामले या तो दर्ज नहीं किए जाते हैं या पूरी तरह से जांच नहीं की जाती है , जिससे सज़ा की दर कम होती है। 2012 में निर्भया मामले में हुई कथित देरी ने पुलिस प्रक्रियाओं और कानून प्रवर्तन में महत्वपूर्ण खामियों को उजागर किया , जिससे व्यापक सार्वजनिक आक्रोश हुआ। धीमी न्यायिक प्रक्रिया और लंबित मामले महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों की प्रभावशीलता को कमज़ोर करते हैं। विलंबित न्याय अक्सर पीड़ितों को कानूनी मदद लेने से हतोत्साहित करता है और अपराधियों को सज़ा से बचने का मौक़ा देता है। 2012 के निर्भया मामले में अभियुक्तों के मुक़दमे में लगभग आठ साल लग गए , जो महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के मामलों में न्याय की सुस्त गति को दर्शाता है। कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम ( 2013) जैसे प्रगतिशील कानूनों के अस्तित्व...

रहिमन धागा प्रेम का..

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रहिमन धागा प्रेम का ..   भाई - बहन का रिश्ता दुनिया के सभी रिश्तों में सबसे ऊपर है। हो भी न क्यों , भाई - बहन दुनिया के सच्चे मित्र और एक - दूसरे के मार्गदर्शक होते है। जब बहन शादी करके ससुराल चली जाती है और भाई नौकरी के लिए घर छोड़कर किसी दूसरे शहर चला जाता है तब महसूस होता है कि भाई - बहन का ये सर्वोत्तम रिश्ता कितना अनमोल है। सरहद पर खड़ा एक सैनिक भाई अपनी बहन को कितना याद करता है और बहनों की ऐसे वक़्त क्या दशा होती है , इसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। रंग - बिरंगे धागे से बंधा ये पवित्र बंधन सदियों पहले से हमारी संस्कृति से बहुत ही गहराई के साथ जुड़ा हैं। यह पर्व उस अनमोल प्रेम का , भावनाओं का बंधन है , जो भाई को सिर्फ अपनी बहन की नहीं बल्कि दुनिया की हर लड़की की रक्षा करने हेतु वचनबद्ध करता है। भाई - बहन के आपसी अपनत्व , स्नेह और कर्तव्य बंधन से जुड़ा त्योहार भाई - बहन के रिश्ते में नवीन ऊर्जा और मजबूती का प्रव...