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नया वर्ष 2021... नई चुनौतियां....नई आशाएं….नई संभावनाएं...

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  नया वर्ष 2021... नई चुनौतियां....नई आशाएं …. नई संभावनाएं... कोरोना महामारी से व्यथित वर्ष 2020 में जीवन के हर क्षेत्र में अभूतपूर्व आर्थिक-सामाजिक आपदाएं , संकट , चुनौतियाँ और कठिनाइयां देखने को मिलीं। इन चुनौतियों ने 2021 के रूप-स्वरूप में भी आमूल-चूल बदलाव कर दिया है । आइए , नज़र डालते हैं उन चुनौतियों पर , जो भविष्य पर असर डालेंगी- 1.स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए बजट में अधिक राशि का आवंटन करना और नए शोधकार्य को बढ़ावा देना- कोरोना वायरस से हुए दुष्परिणामों ने स्वास्थ्य-सेवाओं की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है । विकसित देश भी ऐसे में लाचार दिखाई दिए । 2. ज़्यादा स्मार्ट शहरों का उद्भव - संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार 2050 में दुनिया की 10 अरब आबादी के आधे से ज़्यादा लोग सिर्फ़ 10 विकसित देशों में रह रहे होंगे ।जैसे-जैसे गांवों की आबादी शहरों की ओर पलायन करेगी , नये रोज़गार पैदा करने और शहरी सेवाओं को बनाए रखने का दबाव और बढ़ेगा । 3.मानव और प्रकृति के संबंधों की पुनर्स्थापना- महीन धूलकणों ने हमारी हवा को और प्लास्टिक के छोटे-छोटे टुकड़ों ने महासागरों को भ...

एकांत

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  एकांत विश्व विख्यात कवि और उपन्यासकार डी.एच लॉरेंस की प्रसिद्ध रचना है-सॉलीट्यूड , जिसके अंश से एकांत की बात आरंभ करते हैं-   लोग अकेलेपन की शिकायत करते हैं मैं समझ नहीं पाता वे किस बात से डरते हैं अकेलापन तो जीवन का चरम आनंद है , जो है निःसंग सोचो तो , वही है स्वच्छंद  जो है अकेला झांककर देखता है आगे की राह को पहुंच से बाहर की दुनिया अथाह को तत्वों के केंद्र-बिंदु से होकर एकतान बिना किसी बाधा के करता है ध्यान विषम के बीच छिपे सम का अपने उद्गम का । वास्तव में एकांत ढूँढने के कई सकारात्मक कारण हैं । एकांत की चाह किसी घायल मन की आह भर नहीं , जो जीवन के कांटों से बिंध कर घायल हो चुका है , एकांत सिर्फ उसके लिए शरण मात्र नहीं । यह उस इंसान की ख्वाहिश भर नहीं , जिसे इस संसार में ‘फेंक दिया गया हो’ और वह फेंक दिए जाने की स्थिति से भयभीत होकर एकांत ढूंढ रहा हो । हम जब एकांत में होते हैं , वही वास्तव में होते हैं ।एकांत हमारी चेतना की अंतर्वस्तु को पूरी तरह उघाड़ कर रख देता है । अंग्रेज़ी का एक शब्द है-आइसोनोफीलिया । इसका अर्थ है-अकेलेपन , एकांत स...

This Diwali

 This Diwali is different. This Diwali is not about whether my house is sparkling clean, it is not about whether I have prepared and distributed a variety of mithais and namkeens, & gifts,,  it is not about whether I have that perfect ethnic attire and accessories  for the occasion, it is not about a bucketful of bucks , that someone would be spending on shopping and firecrackers, it is not about having a grand vacation at an exotic location, it is not even about whether we got a promotion or a raise , or even hired for new job or fired in job... This Diwali is more about Survival. It is about being grateful that we are still able to breathe and alive for this day. It is about being thankful for the love and care from our loved ones, It about being with the family, safe and fine under one roof and spending time together, It is about lighting a Diya for all those dear and near souls who left us, It is about extending support and spreading cheer to family and friends wh...

बाल दिवस

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  बचपन के दिन भले थे कितने, सोच सकें हम चाहे जितने, बचपन के दिन भले थे कितने| याद है हमको वो झूमती रातें, राजा-रानी, परियों की बातें, ख्वाबों के हम महल में रहते, परी के संग परीलोक भी जाते| वो दिन आज बने हैं सपने, बचपन के दिन भले थे कितने| कंचा-गिल्ली प्रिय थे हमको, लट्टू भी कुछ कम नहीं भाते, धूप में सारा दिवस गंवाते, झूमते-गाते, पतंग उड़ाते| वो दिन आज रहे न अपने, बचपन के दिन भले थे कितने| खेल-खेल में शादी रचाते, झूमते-गाते बारात लाते, सखी कोई दुल्हन बन जाती, सखा हमें सेहरा पहनाते| वो दिन बीत गए अब अपने, बचपन के दिन भले थे कितने| बाल दिवस की शुभकामनाएं  🥳

तुम एक बार आना !

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  तुम एक बार आना !   ____________   कभी तो जरूर आना !!   जैसे पलाश के फूल आते हैं बसन्त आने पर   जैसे गुलमोहर खिलता है पतझड़ जाने पर   जैसे कभी बिना ऋतु के    बादल यूँ ही चले आते हैं  जेठ में भी    त्तप्त धरा  की पुकार  पर !     सम्बन्धों की परिधि में तो तुम्हें कभी नहीं रखा   किसी अदभुत सबंध में बंध कर आना!!   जब भी आना फागुन में आना    उस दिन जो तुम्हारे पास ही छूट गए थे रंग   अबकी उन्हें साथ ही लाना     तुम आना ... कभी चले आना....   जैसे कृष्ण आये थे विदुर के घर   जैसे राम आये थे साकेत लौटकर      तुम आना !क्यों कि मैने ,गाँधी , ईशा   और गौतम को नहीं देखा   मैं अनुमान लगा लूँगी उनकी श्रेष्ठता का   तुम्हारे व्यक्तित्व को देखकर !     तुम आना ...!   एक दिन जरूर आना .!   जैसे कुछ पल के लिए सिद्धार्थ लौटे थे    यशोधरा के पास   जैसे मिलने चले गये थे भरत    वन प्रांतर में राम के पास!     तुम...