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Showing posts from December, 2024

धन्यवाद... आभार... थैंक यू!!

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 धन्यवाद... आभार... थैंक यू!! धन्यवाद! एक ऐसा शब्द जो एक अलग तरह की महीनता लिए हुए है। कई बार ऐसा होता है कि सिर्फ़ एक शब्द ही पूरा सुख बुन देता है और ‘धन्यवाद’ ऐसा ही शब्द है। एक भरा-पूरा शब्द जो किसी भी तरह के सहयोग, सेवा का माल्यार्पण है। हम प्रसन्न होते हैं, किसी का सहयोग पाकर और हमारे अंदर भी बहुत कुछ फैलता है, वही कह देता है धन्यवाद। यह शब्द ‘धन्य और वाद’ के समासीकरण से बना है। इसका समास विग्रह करेंगे तो सामने आएगा- धन्य, ऐसा वाद। धन्य का मतलब ‘कृत या कृतार्थ।’ धन्य + वाद = धन्यवाद। यह संस्कृत का समस्त पद है। आइए इस शब्द को समझते हैं– (धन्य – धन् + यत्) – धनी, धन प्रदान करने वाला, महाभाग, ऐश्वर्यशाली, सौभाग्यशाली, श्रेष्ठ। वैसे अंग्रेज़ी शब्द ‘थैंक्स’ के बारे में बात करें, तो इसका उद्गम 12 वीं शताब्दी में हुआ। इसका वृहद संदर्भ में अर्थ है- ‘आपने जो मेरे लिए किया, वो मैं याद रखूंगा।’ चौकीदार, जो दरवाजा खोलते हुए आपका अभिवादन करता है, आप उसे धन्यवाद तक कहना मुनासिब नहीं समझते। कहने का मतलब यह है कि दुनिया या लोगों से परिचय करने से भी पहले हमारा जिस शब्द से सबसे पहले परिचय करवाया...

साड़ी दिवस पर विशेष...

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  साड़ी दिवस पर विशेष... जब कभी मुझे मौका मिलता मैं चुपचाप अपनी मां की साड़ी की अलमारी खोलकर उनकी साड़ियों को सहला लेती हूं कितने प्यारे रंग हैं....इतने प्यारे ढंग है इतने रंग पर....रंगों के डिब्बे कहीं नहीं कहीं लहर है , कहीं बादल , कहीं फूल , कहीं पत्ती , कहीं चटकी हुई कलियां , कहीं कलियों की बूटियां , कहीं तोता , कहीं मैंना , कहीं मोर और कहीं शानदार हाथी-घोड़े-पालकी , अरे वाह! रंगों का तो कहना ही क्या ? कहीं आसमानी , कहीं जामुनी , अरे! वह धानी भी तो है , गुलाबी-लाल-स्लेटी-बैंगनी-काला-सफेद और न जाने कौन-कौन से रंग.... भगवान की जादुई कूची से बने हुए यह सुंदर-सुंदर रंग.... सोचती हूं जल्दी से बड़ी हो जाऊं... बड़ी होकर इन सुंदर-सुंदर साड़ियों को पहनकर लहराती चलूं , कल ही मैंने लेस लगाकर अपनी फ्रॉक अपने हाथों से सिली थी पर मुझे तो मुझे नानी की साड़ियों से प्यार है , हां , नानी की चटकदार बैंगनी और गुलाबी कांजीवरम की साड़ी और उसमें जड़े सुनहरे और गुलाबी मोर मस्ती से नाचते मोर , नानी की साड़ी है या जादू साड़ी जो कभी बैंगनी दिखती है तो कभी गुलाबी ...

ध्यान द्वारा जीवन कौशल विकास

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  ध्यान द्वारा जीवन कौशल विकास ध्यान हिंदू धर्म , भारत की प्राचीन शैली और विद्या के संदर्भ में महर्षि पतंजलि द्वारा विरचित योगसूत्र में वर्णित अष्टांगयोग का एक अंग है। ये आठ अंग यम , नियम , आसन , प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान तथा समाधि हैं। ध्यान का अर्थ किसी भी एक विषय की धारण करके उसमें मन को एकाग्र करना होता है। मानसिक शांति , एकाग्रता , दृढ़ मनोबल , ईश्वर का अनुसंधान , मन को निर्विचार करना , मन पर काबू पाना जैसे कई उद्देश्यों के साथ ध्यान किया जाता है। ध्यान का प्रयोग भारत में प्राचीनकाल से किया जाता   रहा है। ‘ तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम् ’ अर्थात अपने विचारों को निर्बाध प्रवाह में प्रवाहित करने से चिंतन (ध्यान) होता है। गीता के अध्याय-6 में श्रीकृष्ण द्वारा ध्यान की पद्धति का वर्णन किया गया है। ध्यान करने के लिए पद्मासन , सिद्धासन , स्वस्तिकासन अथवा सुखासन में बैठा जा सकता है। शांत और चित्त को प्रसन्न करने वाला स्थल ध्यान के लिए अनुकूल है। रात्रि , प्रात:काल या संध्या का समय भी ध्यान के लिए अनुकूल है। ध्यान से आत्म साक्षात्कार होता है। ध्यान को मुक्ति का द्वा...

सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर भारत के वीर बांकुरों को नमन....

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     सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर भारत के वीर बांकुरों को नमन... .   घाव बदन पे सहता जा तू ,  भारत-भारत कहता जा तू ,  पर्वत-पर्वत चढ़ता जा तू ,  वीर बहादुर लड़ता जा तू ,  शपथ है तुझको इस माटी की ,  लड़ना जब तक जान है बाकी ,  दम रुक जाए , कदम नहीं ,  सिर कट जाए , सौगंध नहीं । जय हिंद की सेना !   जय हिंद की सेना ! यूं तो भागदौड़ की ज़िंदगी में शायद ही हमें कभी उन सैनिकों की याद आती हो , जो हमारी सुरक्षा के लिए शहीद हो गए , पर आज के दिन अगर मौका मिले , तो हमें उनकी सेवा करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। रेलवे स्टेशनों पर , स्कूलों में या अन्य स्थलों पर आज लोग आपको झंडे लिए मिल जाएंगे , जिनसे आप चाहें तो झंडा खरीद इस नेक काम में अपना योगदान दे सकते हैं। 1949 से 7 दिसंबर को पूरे देश में सशस्त्र सेना झंडा दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि शहीदों और वर्दी में उन लोगों को सम्मानित किया जा सके , जिन्होंने देश के सम्मान की रक्षा हेतु देश की सीमाओं पर बहादुरी से दुश्मनों का मुकाबला किया और अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया है...