कविताएं आज
शारदा, ज्योतिर्मयी माता, करुणा की धारा बरसा दे, ज्ञान-दीप जल जाए मन में, तम को तू आज हटा दे। वीणा की मधुर तान तेरी, नव चेतना भर दे भीतर, शब्दों में शक्ति का संचार हो, बोले मानव बन निर्भय तर। अविचल बुद्धि, निर्मल वाणी, सत्य पथ की दे पहचान, कर्मशील हो राष्ट्र के तरुण, नव निर्माण का लें संधान। मंगल छंदों में गूंज उठे फिर तेरी सुमधुर बानी, शांति, शक्ति और संस्कृति से भर दे यह भारत वानी। वर दे, भगवति, वर दे हमको, सृजन की वो चिंगारी, जो हर दुख से पार लगे, बन जाए जीवन की सहचारी। छिन-छिन में हो तव प्रेरणा, मस्तिष्क जगे मनमोदक से, अर्जुन-सा लक्ष्यनिष्ठ बनूँ मैं, तू भर दे नव शोधक से। वीर रस की गाथाएँ फिर, वीणा पर गुंजायमान हों, काव्य बने दीपक जन-जन का, चित्त हमारे बलवान हों। संस्कृति की सजीव मूर्ति, तू ही तो भारत का गौरव, हर युग में तूने ही संजोया, नूतनता में नित्य संकल्प। जग-कल्याण की ...