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साइबर अपराध-जानें और बचें !!!

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  साइबर अपराध-जानें और बचें !!   साइबर अपराध एक ऐसा अपराध है , जिस में कंप्यूटर और नेटवर्क , दोनों शामिल होते है। किसी भी कंप्यूटर का अपराधिक स्थान पर मिलना या कंप्यूटर से कोई अपराध करना कंप्यूटर अपराध कहलाता है। कंप्यूटर अपराध मे नेटवर्क शामिल नही होता है। किसी कि निजी जानकारी को प्राप्त करना और उसका गलत इस्तेमाल करना। किसी की भी निजी जानकारी कंप्यूटर से निकाल लेना या चोरी कर लेना भी साइबर अपराध है। कंप्यूटर अपराध भी कई प्रकार से किए जाते है , जैसे कि जानकारी चोरी करना , जानकारी मिटाना , जानकारी मे फेर बदल करना , किसी कि जानकारी को किसी और को देना या कंप्यूटर के भागो को चोरी करना या नष्ट करना। साइबर अपराध भी कई प्रकार के है जैसे कि स्पैम ईमेल , हैकिंग , फिशिंग , वायरस को डालना , किसी की जानकारी को ऑनलाइन प्राप्त करना या किसी पर हर वक़्त नजर रखना। कंप्यूटर अपराध के प्रकार •              जानकारी चोरी करना- किसी के भी कंप्यूटर से उसकी निजी जानकारी निकालना जेसे की उपयोगकर्ता नाम या पासवर्ड। • ...

यह दमघोंटू प्लास्टिक !!!!

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    यह दमघोंटू प्लास्टिक !!!! प्लास्टिक हर जगह है- यह दुनिया के पर्यावरण कल्याण पर मंडरा रहे सबसे बड़े खतरों में से एक है। वैश्विक प्लास्टिक कचरा उत्पादन 2000 से 2019 तक दोगुना से अधिक बढ़कर 359 मिलियन टन हो गया है। इन संख्याओं में प्लास्टिक कचरे को जोड़ने में भारत का लगातार योगदान रहा है। केंद्रीय पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के अनुसार , भारत सालाना 35 लाख टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करता है। लंबे समय तक महामारी और एफएमसीजी बाजारों , ई-कॉमर्स और खाद्य वितरण सेवाओं की वृद्धि से प्लास्टिक की खपत में वृद्धि देखी गई है। पुनर्चक्रण - समय की मांग 2021 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट किया- ' प्लास्टिक अपने आप में कोई समस्या नहीं है ; समस्या है- असंग्रहीत प्लास्टिक कचरा है। ' ट्वीट में एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रकाश डाला गया था   कि प्लास्टिक , जिसे पुनर्नवीनीकरण नहीं किया जा सकता है , वह अप्रबंधित हो जाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट 2019-2020 के अनुसार , भारत लगभग 60% प्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण क...

नशे में घुलता युवा भारत

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  अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस (26 जून) पर विशेष नशे में घुलता युवा भारत नशा एक ऐसी बुराई है जो हमारे समूल जीवन को नष्ट कर देती है। नशे की लत से पीड़ित व्यक्ति परिवार के साथ समाज पर बोझ बन जाता है। युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा नशे की लत से पीड़ित है। सरकार इन पीड़ितों को नशे के चुंगल से छुड़ाने के लिए नशा मुक्ति अभियान चलाती है , शराब और गुटखे पर रोक लगाने के प्रयास करती है। नशे के रूप में लोग शराब , गाँजा , जर्दा , ब्राउन शुगर , कोकीन , स्मैक आदि मादक पदार्थों का प्रयोग करते हैं , जो स्वास्थ्य के साथ सामाजिक और आर्थिक दोनों लिहाज से ठीक नहीं है। नशे का आदी व्यक्ति समाज की दृष्टी से हेय हो जाता है और उसकी सामाजिक क्रियाशीलता शून्य हो जाती है , फिर भी वह व्यसन को नहीं छोड़ता है। ध्रूमपान से फेफड़े में कैंसर होता हैं , वहीं कोकीन , चरस , अफीम लोगों में उत्तेजना बढ़ाने का काम करती हैं , जिससे समाज में अपराध और गैरकानूनी हरकतों को बढ़ावा मिलता है। इन नशीली वस्तुओं के उपयोग से व्यक्ति पागल और सुप्तावस्था में चला जाता है। तम्बाकू के सेवन से तपेदकि , निमोनिया और साँस की बीमारियों का सामना...

डैडी, क्या लिखूं आपके लिए ?

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  डैडी , क्या लिखूं आपके लिए? डैडी , क्या लिखूं आपके लिए ? डैडी , क्या लिखूं आपके लिए ? , कभी जो समझ ना आए , आया बस इतना ही समझ , करते रहे समझौते , हमारे लिए , अपनी ख़ुशियों का , अपनी इच्छाओं का , करते रहे दमन , पता नहीं कैसे कंधे थे , कभी थकते ही नहीं थे , बोझ उठाते , डैडी , पीते रहे हलाहल , शिव की तरह , कल्याण हेतु करने को , उत्सर्जन प्राण सतत । जब डांटते थे , तो लगता था बुरा , कि क्यों टोकते थे हर बात पर ? ज़रा सी ग़लती पर , देते थे इतनी सज़ा , थे कितने निष्ठुर ? कभी नहीं आती थी क्या दया ? आख़िर हमारी इच्छाओं का , नहीं है कोई मूल्य , हर बात में निर्णय , क्या उन्हीं का अधिकार था ? उनके अपने सपनों को , पूरा करने का माध्यम , क्या हम हैं ? इन सारे सवालों का , जवाब ढूंढ़ते-ढूंढते , बीत गया बचपन , संघर्ष के युवा दिनों में , जब संकल्पों को तोड़ने , आईं आंधियां , तब समझ आया कि क्यों सिखाया था निष्ठुर संसार से लड़ना क्यों अपनी डांट के , रक्षा कवच से , बनाया था इतना मज़बूत , वह उनकी निष्ठुरता नहीं थी , ...

पुस्तक समीक्षा: गीतांजलि श्री द्वारा रचित ‘रेत समाधि’

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  पुस्तक समीक्षा : गीतांजलि श्री द्वारा रचित ‘ रेत समाधि’-लेखन की हर सरहद को तोड़ता उपन्यास   ‘ रेत समाधि’ , (Tomb of Sand) देश दुनिया में छाया यह उपन्यास हिंदी के पाठकों की रुह से नाता जोड़ लेता है। गीतांजलि श्री ( Geetanjali Shri) द्वारा हिंदी में लिखे गए इस उपन्यास का अंग्रेजी अनुवाद   ‘ टूम्ब ऑफ सैंड’ , इंटरनेशनल बुकर सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह हिंदी साहित्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।   हिंदी की अमूमन लिखाइयों में किसी नए क्राफ्ट , नए शिल्प या बुनाई के खेल कम ही होते हैं। लेकिन इस किताब को सब बंधन को तोड़ देने के बाद ऐसे लिखा गया है जैसे कि मन सोचता है। कोई किताब आपको पुराने दिनों की दुनिया में झम्म से ले जाए , वही दरवाज़ा , वही लड़की-लड़कौरी-सी अम्मा , जिनके बूढ़े बदन में पंद्रह साला लड़की बसे। जो चलते न चलते झपाझप कूदने-उड़ने लगे और आप अम्मा बन जाएं और अम्मा बन जाए किशोरी। इस उलट झापे में जीवन रिवाइंड हो , कि चलो एक बार फिर बीतते हैं , कि पहली दफ़ा कुछ चूक-सी रह गई थी , कुछ जल्दीबाज़ी भी , अब इस बार ज़रा फिर से करते हैं जीवन के...