बॉडी लैंग्वेज समझना भी है कला
बॉडी लैंग्वेज समझना भी है कला बॉडी लैंग्वेज अपने आप में एक भाषा है। यह भाषा क्या है , इसे कैसे पढ़ा जा सकता है , बता रहे हैं सौरभ सुमन हमारे आस-पास कई तरह के लोग होते हैं। कुछ अपनी बात बेबाकी से रखते हैं , जबकि कुछ लोग... हमारे आस-पास कई तरह के लोग होते हैं। कुछ अपनी बात बेबाकी से रखते हैं , जबकि कुछ लोग इशारों-इशारों में बहुत कुछ कह जाते हैं। हमारे दिमाग में चलता बहुत कुछ है , लेकिन अपनी हर बात को शब्दों में बयां नहीं कर पाते। कभी-कभी हमारी बॉडी लैंग्वेज काफी कुछ बयां कर देती हैं। यह बात हर कोई आसानी से नहीं समझ पाता है। सामने वाले इंसान के भीतर चल रहे विचार , सोच और इरादों की परख कुछ ही लोगों को होती है। ऐसे लोग इंसान की मानसिकता को समझने में ज्यादा गलतियां नहीं करते। कह सकते हैं , इन्हें किताबों की तरह इंसानों को पढ़ना बखूबी आता है। क्या है बॉडी लैंग्वेज बॉडी लैंग्वेज यानी हाव-भाव एक तरह की शारीरिक भाषा है , जिसमें शब्द तो नहीं होते , लेकिन बिना कुछ कहे अपनी बात कह जाते हैं। बॉडी लैंग्वेज एक तरह से इंसान के व्यक्तित्व का आईना होती है। जैसे किताब के हर पन्ने में ...