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Showing posts from April, 2023

बुरा जो देखन मैं चला

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बुरा जो देखन मैं चला   बुरा जो देखन मैं चल , बुरा न मिलिया कोय । जो दिल खोजूं आपना , मुझसे बुरा न कोय ॥ उपर्युक्त पंक्तियां कवि हृदय की एक पीड़ा है , एक अकुलाहट है , जो कहीं न कहीं उसके मन को कचोटती है । हमारे जीवन के दो ही पथ हैं । एक भलाई का और दूसरा बुराई का । हमारे धर्मग्रंथों , मनीषियों ने भलाई के पथ को सर्वश्रेष्ठ माना है । “नेकी पर चलें और बदी से डरें , ताकि हंसते हुए निकले दम” नेकी यानी भलाई और बदी माने बुराई। सभी लोग और सभी नीतिशास्त्र भलाई के रास्ते पर चलने की शिक्षा देते हैं। फिर भी हम बुराई के प्रति आकर्षित हो जाते हैं। जब इस बात पर ज़ोर डाल कर सोचते हैं , तब पता चलता है कि कोई भी व्यक्ति जानबूझ कर बुराई के रास्ते पर नहीं जाना चाहता है। हर व्यक्ति सोचता है कि मैं अच्छा इंसान बनूं , अच्छा नागरिक बनूं , सभी लोग मुझे अच्छे कार्यों के लिए जानें। फिर भी व्यक्ति अच्छा इंसान नहीं बन पाता है। अच्छा इंसान न बन पाने का मुख्य कारण यह है कि वह अपने अवगुणों पर दृष्टि नहीं डालता है , उसे अपनी बुराइयां नज़र ही नहीं आती हैं क्योंकि वह दूसरों की बुराइयों पर अपनी नज़र गड़ा...

हम और हमारी सांस्कृतिक विरासत

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विश्व सांस्कृतिक विरासत दिवस के अवसर पर सभी को सादर नमस्कार हम और हमारी सांस्कृतिक विरासत किसी भी राष्‍ट्र के विकास में संस्‍कृति एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह साझे दृष्टिकोण मूल्‍यों, लक्ष्‍यों और प्रथाओं का समूह प्रस्‍तुत करती है। संस्‍कृति और सृजनात्‍मकता लगभग सभी आर्थिक, सामाजिक और अन्‍य कार्यकलापों में स्‍वयं को प्रकट करती है। भारत जैसा विविधता वाला देश अपनी संस्‍कृति की बहुलता द्वारा अपने प्रतीकात्‍मक स्‍वरूप को प्रस्‍तुत करता है।  सांस्कृतिक विरासत रीति-रिवाजों, प्रथाओं, स्थानों, वस्तुओं, कलात्मक अभिव्यक्तियों और मूल्यों का एक संग्रह है, जिसे एक समुदाय द्वारा विकसित किया गया है और पीढ़ी से पीढ़ी तक पारित किया गया है। अमूर्त और मूर्त सांस्कृतिक विरासत दो शब्द हैं, जिनका उपयोग सांस्कृतिक विरासत का वर्णन करने के लिए किया जाता है। सांस्कृतिक विरासत मानव गतिविधि के हिस्से के रूप में मूल्य प्रणालियों, विश्वासों, परंपराओं और जीवन शैली का मूर्त प्रतिनिधित्व करती है। सांस्कृतिक विरासत, समग्र रूप से संस्कृति के एक अभिन्न अंग के रूप में, पुरातनता से लेकर हाल के अतीत त...

भारत के यशस्वी सपूत- डॉ . भीमराव अंबेडकर

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  भारत के यशस्वी सपूत- डॉ .   भीमराव    अंबेडकर   अगाध    ज्ञान    के    भंडार ,   घोर    अध्यवसायी ,   अदभुत    प्रतिभा ,   सराहनीय    निष्ठा ,   न्यायशीलता    तथा    स्पष्टवादिता    के    धनी    डॉ .   भीमराव    अंबेडकर     एक    विधिवेत्ता ,   अर्थशास्त्री ,   समाज    सुधारक ,   संविधान    शिल्पी    और    राजनीतिज्ञ    थे।    अंबेडकर     जी    का    संपूर्ण    जीवन    भारतीय    समाज    में    सुधार    के    लिए    समर्पित    था।    अस्पृश्यों    तथा    दलितों    के    वे    मसीहा    थे।    उन्होंने    उन...