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Showing posts from November, 2023

ख़ुद को समय देना भी संतुष्टि है

  ख़ुद को समय देना भी संतुष्टि है:वो काम करें जिसे करने से खुशी मिले और खुद के लिए वक्त भी आज के समय में हम काम और ज़िम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो चुके हैं कि निजी ज़िंदगी कहीं खो-सी गई है। पिछले हफ्ते हमने इसी विषय पर बात की थी। अपना काम ज़िम्मेदारी के साथ करना अच्छी बात है , परंतु संतुष्टि का ध्यान रखना भी ज़रूरी है। काम में संतुष्टि होना हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे हमें यह पता चलता है कि हम अपने काम को लेकर जो रुचि ले रहे हैं उसका हमारे कॅरियर और जीवन पर कितना फ़र्क़ पड़ रहा है। यह हमें सफलता के नज़दीक ले जाने में सहायक भी सिद्ध होता है। हम सोचते हैं कि काम में पूरा मन और जी जान लगा देना ही सफलता है , परंतु हम यह ध्यान नहीं देते कि हम जो भी कार्य कर रहे हैं उसमें हमारी रुचि कितनी है और उस काम को करने के बाद संतुष्टि मिल भी रही है या नहीं। काम में संतुष्टि क्यों ज़रूरी ? ज़रा सोचिए , यदि काम के बाद हमें संतुष्टि न मिले तब वह हमारे लिए और हमारी सफलता के लिए कितनी मायने रखती है ? संतुष्टि से हमारा मानसिक स्वास्थ्य और बेहतर होता है। मन में चिंता , भय ...

विकासोन्मुख भारत की नींव- नई शिक्षा नीति

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  विकासोन्मुख भारत की नींव- नई शिक्षा नीति मातेव रक्षति पितेव हिते नियुंक्ते। कान्तेव चापि रमयत्यपनीय खेदम्।। लक्ष्मीं तनोति वितनोति च दिक्षु कीर्तिम् I किं किं न साधयति कल्पलतेव विद्या।।   अर्थात व्यक्ति के जीवन में विद्या माता की तरह रक्षा करती है एवं जिस प्रकार पिता अपनी संतानों का भला करते हैं , उसी प्रकार विद्या मनुष्य का हित करती है। यह पत्नी के ही समान सारी थकान मिटा कर मन को रमाती , रिझाती व मनोरंजन करती है। लक्ष्मी की भांति वित्त , अर्थात धन की प्राप्ति कर व्यक्ति की शोभा बढ़ाती है और चारों दिशाओं में यश व कीर्ति फैलाती है।ऐसा क्या है जो विद्या द्वारा सिद्ध नहीं होता ? आज शिक्षा दिवस के सुअवसर पर नई शिक्षा नीति की चर्चा करते हैं , जिसका लक्ष्य है शिक्षार्थी का संपूर्ण विकास। मनुष्य का जीवन गुणों और प्रतिभाओं का भंडार है और यदि किसी भी मनुष्य के आधारभूत गुणों या ईश्वर प्रदत्त प्रतिभाओं का पूर्ण सदुपयोग उसके जीवन में नहीं किया जाता , तो उसके वो गुण और प्रतिभाएं व्यर्थ ही हो जाती हैं। हम अपने बाल्यकाल से एक ऐसी शिक्षा पद्धति की छत्र-छाया में पले-बढ़े , जिसमे...

‘मृगनयनी’-श्री वृंदावन लाल वर्मा का एक अद्भुत उपन्यास

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‘मृगनयनी’-श्री वृंदावन लाल वर्मा का एक अद्भुत उपन्यास साहित्य की विभिन्न विधाओं में से एक प्रमुख विद्या उपन्यास है गद्यात्मक विधाओं में इसे सबसे लोकप्रिय विधा माना जाता है , जिसमें जीवन के विभिन्न पक्षों पर विस्तार-विवेचन का अवसर प्राप्त होता है। प्रेमचंद जैसे महान उपन्यासकारों ने इस विधा को नई ऊंचाइयां प्रदान की हैं। आज विश्व की लोकप्रिय साहित्यिक विधाओं में उपन्यास का स्थान सर्वोपरि है। वृंदावन लाल वर्मा हिंदी के प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यासकार हैं , जिन्होंने इतिहास और कल्पना का सामंजस्य बिठाकर उपन्यास विधा को अत्यंत लोकप्रिय बना दिया है। इतिहास अपने आप में एक शुष्क विधा है तथा प्रायः इसे मन से पढ़ने वालों की संख्या न के बराबर ही होती है। परंतु इतिहास को कल्पना की चाशनी में डुबोकर महान कलाकारों-रचनाकारों ने उपन्यास के माध्यम को लोकप्रिय बना दिया है। इसी बहाने पाठक मनोरंजन के साथ-साथ इतिहास की भी जानकारी प्राप्त करते हैं। ‘मृगनयनी’ उपन्यास इतिहास और कल्पना का अद्भुत संगम है। ‘मृगनयनी’ उपन्यास में पात्रों का चरित्र-चित्रण अत्यंत सजीव है। ‘मृगनयनी’ राजा मानसिंह लाखी और अटल प्रमुख पा...

दिवाली या दिवाला ?

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  दिवाली या दिवाला ? दीप जलाओ , दीप जलाओ , आज दिवाली रे! खुशी-खुशी सब हंसते आओ , आज दिवाली रे!! मैं तो लूंगा खील-खिलौने , तुम भी लेना भाई , नाचो-गाओ खुशी मनाओ , आज दिवाली आई॥   जब बचपन में यह कविता पढ़ी थी , तब दिवाली से निकलने वाले दिवाले का अंदाज़ा ही नहीं था। दिवाली हिंदुओं का सबसे बड़ा और सबसे ज़्यादा उत्साह से मनाया जाने वाला त्योहार है । इस उत्सव को अच्छे से संपन्न करने के लिए घर के मुखिया को कितना मैनेजमेंट करना पड़ता है , यह वही जानता है। ज़माना कोई भी रहा हो सीमित संसाधन के चलते आने वाले बेतहाशा खर्च निश्चित ही कुछ समय के लिए असहज तो कर ही देते है। वही हर किसी की साल भर की ख्वाहिश को पूर्ण करने की ज़िम्मेदारी घर के हेड होने के कारण उन्हीं के कंधे पर रहती है। फिर प्राथमिकता तय करनी पड़ती है कि किसे पूरा करे और किसे छोड़ दें। एक की मांग पूरी करो , तो दूसरा असंतुष्ट हो जाता है। त्योहार होने से कहीं से मदद की संभावना भी कम हो जाती है। आज लोगों के रहन-सहन का स्तर बदल गया है। आज का परिवार बाज़ार मार्केटिंग का भी शिकार हो रहा है। उत्सव में छूट के लोक-लुभावने विज्ञापन यह...