ईसा मसीह : एक प्रेम भरी संभावना
ईसा मसीह : एक प्रेम भरी संभावना ईसा मसीह और ईसाई धर्म लगभग पर्यायवाची हैं। मगर ‘ईश्वर के पुत्र’ के नाम पर , क्या हम उस असाधारण मानवता का मूलतत्व खो बैठे हैं , जिसके प्रतीक ईसा मसीह थे। क्रिसमस के मौके पर आइए याद करें कि ईसा मसीह की भावना को अपने दिल में लाने का क्या आखिर अर्थ क्या है ? जब हम ईसा मसीह की बात करते हैं , तो हम उस व्यक्ति की बात नहीं करते , जो 2000 साल पहले इस दुनिया में था , बल्कि एक खास संभावना की बात करते हैं , जो हर इंसान में मौजूद होती है। यह ज़रूरी है कि हर व्यक्ति मानवता के गुण को अपने अंदर फलने-फूलने दे , क्योंकि आजकल लोग धर्म के नाम पर अपनी मानवता को खो रहे हैं। ईसा मसीह की शिक्षा का सबसे अहम पहलू अपने-पराए का भेदभाव किए बिना , बगैर किसी पूर्वाग्रह या पक्षपात के जीवन बिताना है। तभी हम ईश्वर के साम्राज्य को जान सकते हैं। उन्होंने साफ-साफ कहा , ‘ ईश्वर का साम्राज्य कहीं ऊपर नहीं है , वह आपके अंदर ही है।’ केवल अपने शुरुआती ‘मार्केटिंग चरण’ में ईसा मसीह ने आपको ईश्वर के साम्राज्य तक ले जाने की बात की। जब काफी लोग उनके आस-पास जुट गए , तो वह पलटे और कहा , ‘ ...