जो भी प्यार से मिला
जो भी प्यार से मिला कल दुनिया भर में ‘वैलेंटाइन्स डे’ मनाया गया, तो सोचा बात तो प्यार की है, तो कुछ लिख कर देखूँ? प्यार के बारे में। वैसे मेरा मानना है कि ‘प्यार को प्यार ही रहने दो, कोई नाम न दो’ वाली बात सोलह आने सच है | तो किस्सा एक सहेली का है| उस दिन वे मिलीं। बहुत ही गुस्से में थीं और दुखी भी , ऑफिस में उनका अपने बॉस से झगड़ा हुआ था। उनका कहना था की बॉस ने सबके सामने उनके आत्मसम्मान को चोट पहुंचाई है और वे उससे बहुत खफ़ा हैं, दुखी हैं । कई बार प्रेम संबंधों और अन्य रिश्तों में भी यही होता है। हम छोटी-छोटी बातों को अपने आत्मसम्मान से जोड़ कर देखने लगते हैं। रिश्ते टूटें तो टूटें , पर अहम पर आँच न आने पाए। घरों से , दफ़्तरों से उठकर अब ये कीड़ा सोशल साइट्स पर भी रेंगने लगा है। फ़ेसबुक की लाइक्स को साहित्यकारों , लेखकों और कवियों ने अपने आत्मसम्मान से जोड़ दिया है। उनकी लिखी बात , उनके स्टेटस पर अगर कोई दूसरा व्यक्ति उनकी तारीफ़ में कसीदे पढ़े , तो सब ठीक। जो अगर उसने अपने निजी विचार व्यक्त कर दिए , तो लेखक के आत्मसम्मान को ठेस ...