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जो भी प्यार से मिला

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  जो भी प्यार से मिला कल दुनिया भर में ‘वैलेंटाइन्स डे’ मनाया गया, तो सोचा बात तो प्यार की है, तो कुछ लिख कर देखूँ? प्यार के बारे में। वैसे मेरा मानना है कि ‘प्यार को प्यार ही रहने दो, कोई नाम न दो’ वाली बात सोलह आने सच है | तो किस्सा एक सहेली का है| उस दिन वे मिलीं।   बहुत ही गुस्से में थीं और दुखी भी ,   ऑफिस में उनका अपने बॉस से झगड़ा हुआ था। उनका कहना था की बॉस ने सबके सामने उनके आत्मसम्मान को चोट पहुंचाई है और वे उससे बहुत खफ़ा हैं, दुखी हैं । कई बार प्रेम संबंधों और अन्य रिश्तों में भी यही होता है।   हम छोटी-छोटी बातों को अपने आत्मसम्मान से जोड़ कर देखने लगते हैं। रिश्ते टूटें तो टूटें , पर अहम पर आँच न आने पाए। घरों से ,   दफ़्तरों से उठकर अब ये कीड़ा सोशल साइट्स पर भी रेंगने लगा है। फ़ेसबुक की लाइक्स को साहित्यकारों , लेखकों और कवियों ने अपने आत्मसम्मान से जोड़ दिया है। उनकी लिखी बात ,   उनके स्टेटस पर अगर कोई दूसरा व्यक्ति उनकी तारीफ़ में कसीदे पढ़े , तो सब ठीक।   जो अगर उसने अपने निजी विचार व्यक्त कर दिए , तो लेखक के आत्मसम्मान   को ठेस ...

क्या नारी केवल श्रद्धा है?

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  क्या नारी केवल श्रद्धा है ?   ‘ मनुस्मृति ’ में कहा गया है -“ यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः। अर्थात जहां महिलाओं की पूजा होती है , वहां देवता निवास करते हैं। वाल्मीकि रामायण में ऋषि भारद्वाज श्री राम को संबोधित करते हुए कहते हैं- मित्राणि धन धान्यानि प्रजानां सम्मतानिव । जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ॥ अर्थात "मित्र , धन्य , धान्य आदि का संसार में बहुत अधिक सम्मान है , किंतु माता और मातृभूमि का स्थान स्वर्ग से भी ऊपर है। धर्मग्रंथों में महिला को ' आदिशक्ति ' मानकर उसकी पूजा की गई है। जयशंकर प्रसाद ने भी हमारी इसी पुरातन संस्कृति की गरिमा को बनाए रखते हुए कहा कि- नारी! तुम केवल श्रद्धा हो विश्वास-रजत-नग पगतल में , पीयूष-स्रोत-सी बहा करो जीवन के सुंदर समतल में॥ कविवर जयशंकर प्रसाद की कामायनी में उपरोक्त पंक्तियां मनु द्वारा श्रद्धा से कही गई है। ये पंक्तियां हमेशा मुखर आलोचना एवं विवाद का विषय रही हैं। इसका कारण यह है कि यह संकेतात्मक रूप से समाज में महिला की भूमिका को नेपथ्य में धकेलती है क्योंकि वह अपने जीवन के स्वर्णिम सपनों की आह...

परीक्षा में अच्छे अंक लाने के उपाय

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  परीक्षा में अच्छे अंक लाने के उपाय परीक्षा से पूर्व या परीक्षा के दौरान कुछ स्टूडेंट्स में विभिन प्रकार की शारीरिक , मानसिक और व्यावहारिक समस्याओं का अनुभव का अनुभव करते है । हमारे कुछ स्टूडेंट्स तो यह भी समझ नहीं पाते है , की यह समस्या परीक्षा के डर के कारण है । यदि आप सबको भी इस प्रकार की परेशानियां   महसूस हो रही है तो तो संभव है कि आप भी परीक्षा से चिंतित है । परीक्षा में अच्छे मार्क्स लाने के लिए और परीक्षा की चिंता से मुक्त होने के लिए सबसे विशिष्ट मार्ग है-परीक्षा की उत्तम तैयारी । एक अच्छी तैयरी के बिना कोई और तकनीक नहीं है , की परीक्षा में मददगार साबित हो सके । जो भी संसाधन हमारे पास हो उसी को लेकर समय से तैयारी करनी चाहिए । परीक्षा का दिनांक तथा समय को ध्यान में रखकर एक टाइम टेबल के अनुसार हर एक विषय की करें । कैसे करें ? प्राथमिकता के आधार पर कार्यों की सूची बनाएं – परीक्षा के महत्त्व और उसकी तात्कालिक जरूरत को आधार मानकर दिन प्रतिदिन के कार्यों की सूची बनाएं और उसे प्रतिदिन पूरा करने का भरसक प्रयास करें । यदि जो कार्य आज नहीं हुआ , उसे कल की सूची में सब...

वन्दे मातरम्

    वन्दे मातरम्     वन्दे मातरम्   (   बाँग्ला : বন্দে মাতরম )   बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय   द्वारा संस्कृत बाँग्ला मिश्रित भाषा में रचित इस गीत का प्रकाशन सन्  1882 में उनके उपन्यास   आनन्द मठ   में अन्तर्निहित गीत के रूप में हुआ [2]   था। इस   उपन्यास   में यह गीत भवानन्द नाम के संन्यासी द्वारा गाया गया है। इसकी धुन   यदुनाथ भट्टाचार्य   ने बनायी थी। इस गीत को गाने में 65 सेकेंड ( 1 मिनट और 5 सेकेंड) का समय लगता है। सन् 2003 में ,  बीबीसी वर्ल्ड सर्विस   द्वारा आयोजित एक अन्तरराष्ट्रीय   सर्वेक्षण   में , जिसमें उस समय तक के सबसे मशहूर दस गीतों का चयन करने के लिये दुनिया भर से लगभग 7000 गीतों को चुना गया था और बी०बी०सी० के अनुसार 155 देशों/द्वीप के लोगों ने इसमें मतदान किया था उसमें वन्दे मातरम् शीर्ष के 10 गीतों में दूसरे स्थान पर था। [3] गीत   भारतीय संविधान के पृष्ठ 167 पर व्यौहार राममनोहर सिंहा द्वारा चित्रित वन्दे–मातरम् (सुजलाम् सुफलाम् मलयजशीतलाम् ...