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वेदों में नारी-विमर्श

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  वेदों में नारी-विमर्श प्रशस्ता धार्मिकी विदषी माता विद्यते यस्य स मातमान। अर्थात , धन्य वह माता है जो गर्भावान से लेकर , जब तक पूरी विद्या न हो , तब तक सुशीलता का उपदेश करे। वेदों के मुख्य विषय हैं- कर्म , उपासना और ज्ञान , जो समस्त मानव जाति के धर्म हैं।   वेद ज्ञान के भंडार हैं , उस भंडार में खोज करने पर नारी के महत्व और उसके सामाजिक - शैक्षिक योगदान को प्रकाशित करने वाले विषय भी दृष्टिगोचर होते हैं। चारों वेदों में से अधिकांशतः ऋग्वेद में ही प्राचीन काल से चली आने वाली नारी की सभ्यता और संस्कृति पर प्रकाश डाला गया है। वैदिक काल में महिलाओं की स्थिति समाज में अत्यंत ऊंची थी और उन्हें अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त थी।   उन्हें धार्मिक क्रियाओं में पुरोहितों एवं विशेषज्ञों का दर्जा प्राप्त था। वे धर्म -शास्त्रार्थ में भी भाग लेती थीं। मानव-जीवन तीन आधारों पर टिका है-ज्ञान , धर्म और शांति। ज्ञान , धर्म व शांति की स्वामिनी के रुप में ‘ श्री ’ वाचक शब्द का प्रयोग होना उसकी श्रेष्ठता को बताता है। ‘ श्र...

महावीर को आत्मसात करें

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महावीर को आत्मसात करें भगवान महावीर की जन्म जयंती मनाते हुए हमें महावीर बनने की तैयारी करनी होगी, हम महावीर को केवल पूजें ही नहीं, बल्कि उनको जीये तभी महावीर जयंती मनाने की सार्थकता है। उन्होंने जो शिक्षाएं दीं, वे जन-जन के लिए अंधकार से प्रकाश, असत्य से सत्य एवं निराशा से आशा की ओर जाने का माध्यम बनी। इसलिए भी जैन धर्म के अनुयायियों ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए उनकी जन्म-जयंती मनाने का महत्व है। महावीर लोकोत्तम पुरुष हैं, उनकी शिक्षाओं की उपादेयता सार्वकालिक, सार्वभौमिक एवं सार्वदेशिक है, दुनिया के तमाम लोगों ने इनके जीवन एवं विचारों से प्रेरणा ली है। सत्य, अहिंसा, अनेकांत, अपरिग्रह ऐसे सिद्धांत्त हैं, जो हमेशा स्वीकार्य रहेंगे और विश्व मानवता को प्रेरणा देते रहेंगे। महावीर का संपूर्ण जीवन मानवता के अभ्युदय की जीवंत प्रेरणा है। लाखों-लाखों लोगों को उन्होंने अपने आलोक से आलोकित किया है। इस वर्ष भारत सरकार ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति घोषित की है, यह समय कोरोना महासंकट का समय है, ऐसे समय में महावीर की शिक्षाओं को अपनाकर हम हमारी शिक्षा नीति को परिपूर्णता प्रदत्त कर सक...

सोशल मीडिया पैसा कमाने का ज़रिया भी...

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  सोशल मीडिया पैसा कमाने का ज़रिया भी...   सोशल मीडिया का प्रयोग आज समस्त संसार भर में सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर है और यह निरंतर बढ़ रहा है। मासिक सक्रिय उपभोक्ता के मामले में भारत फेसबुक के लिए दुनिया में नंबर एक देश बन गया है| ‘वी आर सोशल’ द्वारा 2017 डिजिटल ईयरबुक के सर्वे से आप देख सकते हैं कि दुनिया भर में एक्टिव सोशल मीडिया यूजर्स पहले से ही 3 बिलियन यूजर्स को छूने वाले हैं और कोरोना-काल के बाद इसमें भारी उछाल दिखने को मिला है| ज़रा सोचिए कि सोशल का मार्केट कितना बड़ा है! आपको बस इतना करना है कि इस मार्केट का प्रभावी ढंग से दोहन करना है। एक बात सदैव याद रखें कि सोशल मीडिया का प्राथमिक उद्देश्य सामाजिक संबंध बनाना है, लेकिन इसका अर्थ बिलकुल भी नहीं है कि आप इसका इस्तेमाल पैसे कमाने के लिए नहीं कर सकते। लगभग डेढ़ दशक पूर्व इंटरनेट की दुनिया में एक नई क्रांति हुई , एक नया मीडिया का आविष्कार हुआ, जिसे ‘सोशल मीडिया ’ नाम दिया गया। सोशल मीडिया का मूल मंत्र लोगों को एक-दूसरे से जोड़ना है। पेन फ्रेंड से ईमेल के दौर में पहुंचे समाज को सोशल मीडिया ने कुछ ही पलों में जुड़ने और बात...

नए शैक्षणिक वर्ष की चुनौतियां

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  नए शैक्षणिक वर्ष की चुनौतियां   नई कक्षा , नई संकाय , नया पाठ्यक्रम , नया अध्ययन कार्यक्रम ; यह एक नया शैक्षणिक वर्ष है। नए सत्र में आप सभी को नई शैक्षणिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। सभी समस्याओं से निपटने के लिए बस अपने मन को उसी के अनुसार तैयार करें और इस नए सत्र को अपने लिए एक बड़ी सफलता बनाएं। यह लेख उन सभी चुनौतियों के बारे में है जो सीबीएसई , यूपी बोर्ड या किसी अन्य राज्य बोर्ड के विद्यार्थियों को नई कक्षा में , नए शैक्षणिक सत्र में सामना करना पड़ेगा। यहां , आप इन चुनौतियों से पार पाने के गुर भी सीखेंगे और इस वर्ष अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाएंगे। नए शैक्षणिक सत्र में प्रतीक्षारत चुनौतियाँ नीचे सूचीबद्ध हैं: 1. नई व्यवस्था- यह बिलकुल स्पष्ट है कि नई कक्षा में सब कुछ नया होगा। आपके लिए , सभी नए विषय लीक से हटकर कुछ प्रतीत होंगे। नए विषयों को पढ़ाने के लिए नए शिक्षक आ जाते हैं , जिससे आपकी परेशानी और बढ़ जाती है। आप अपने पिछली कक्षा के शिक्षकों द्वारा अपनाए गए शिक्षण मानदंडों से पहले ही परिचित हो गए होंगे। अब , आपको नए संकायों द्वारा अनुसरण की जाने वाली शिक्...

हिंदी साहित्य में एक नवीन धारा की नींव डालता-‘वर्षावास’ उपन्यास

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  हिंदी साहित्य में एक नवीन धारा की नींव डालता- ‘ वर्षावास ’ उपन्यास   "यह समीक्षातीत और समयातीत किताब है। इस किताब का गद्य ऐंद्रजालिक है। इसके मोह से बाहर आने के लिए जानलेवा प्रयत्न करना पड़ता है। इस किताब को हर नई क़लम को अनिवार्य रूप से पढ़ना चाहिए। रिजेक्ट करना हो , तो भी पढ़ना चाहिए।"- धीरेंद्र अस्थाना उपन्यास आरंभ होता है , इन शब्दों के साथ- सबका मंगल हो। वे जो इश्क के खंजर से हलाक होते हैं , उन्हें ग़ैब से हमेशा एक नई ज़िंदगी मिलती है। पर महात्मा बुद्ध तो रियलिस्ट थे , ग़ैब से क्या लेना देना ? ग़ैब यानी कोई अदृश्य ताकत। प्रकृति , अल्लाह या कुछ और...जिन्न , भूत प्रेत शायद , या विदेशी हाथ...या हमारा अंतस...या हमारा छुपा हुआ प्यार...या हिंसा...या काला धन। वर्षावास बौद्ध धर्म की रीतियों से जुड़ा हुआ है। महात्मा बुद्ध ने यह समयकाल खुद बनाया था। बरसात के मौसम में तीन महीने यानी आषाढ़ की पूर्णिमा से लेकर अश्विन की पूर्णिमा तक बौद्ध भिक्षुओं को एकांत में रहकर चिंतन-मनन करना होता था क्योंकि बारिश के मौसम में आने-जाने में तकलीफ़ होती थी , कार्य भी ठीक से नहीं होता था। ...