आज के समय में परिवार का महत्व और उसका बदलता स्वरूप
आज के समय में परिवार का महत्व और उसका बदलता स्वरूप परिवार के अनमोल रिश्तों के, आँगन में झूमें जैसे बहार का, इन अनमोल रिश्तों को बाँधे, बनके धागा हो प्रेम प्यार का। नई दिशाएँ बाँह फैलाए, स्वागत करती बहार का। अंधकार को हम मिटा कर, फूल बने उजियार का। खुशियों के सारे पत्ते निकले, दुःख ना हो जिसमें हार का। सुख - दुःख चाहे कितने आए, साथ हो अपने परिवार का। परिवार एक ऐसी सामाजिक संस्था है, जो आपसी सहयोग व समन्वय से क्रियान्वित होती है और जिसके समस्त सदस्य आपस में मिलकर अपना जीवन प्रेम, स्नेह एवं भाईचारा पूर्वक निर्वाह करते हैं। संस्कार, मर्यादा, सम्मान, समर्पण, आदर, अनुशासन आदि किसी भी सुखी-संपन्न एवं खुशहाल परिवार के गुण होते हैं। कोई भी व्यक्ति परिवार में ही जन्म लेता है, उसी से उसकी पहचान होती है और परिवार से ही अच्छे-बुरे लक्षण सीखता है। परिवार सभी लोगों को जोड़े रखता है और दुःख-सुख में सभी एक-दूसरे का साथ देते हैं। कहते हैं कि परिवार से बड़ा कोई धन नहीं होता हैं, पिता से बड़ा कोई सलाहकार नहीं होता हैं, मां के आंचल से बड़ी कोई दुनिया नहीं,...