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Showing posts from September, 2021

कहां लें एडमिशन? आज का सबसे बड़ा प्रश्न ?? 20.09.2021

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  कहां लें एडमिशन ? आज का सबसे बड़ा प्रश्न ?? किसी भी स्टूडेंट के जीवन में हायर सेकेंडरी पास करने के बाद सबसे महत्वपूर्ण निर्णय होता है कि उसे किस कॉलेज में एडमिशन लेना चाहिए ? अक्सर लुभावने विज्ञापन , सुनी-सुनाई बातों और दूसरों की देखा-देखी बच्चे और अभिभावक गलत कॉलेज का चुनाव कर लेते हैं , जो स्टूडेंट के करियर के लिए बुरा साबित होता है |8 बातें एडमिशन से पहले पता करेंः एक्रीडिटेशन - किसी भी संस्थान के एक्रीडिटेशन की जांच जरूर करें। सच तो यह है कि जॉब मार्केट में उसी डिग्री को मान्यता दी जाती है जो किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी या कॉलेज से हासिल की गई हो। ग्रैजुएशन रेट - किसी भी यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट होने वाले छात्रों की संख्या का सही अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। इससे दाखिला संबंधी संभावना की जानकारी आपको मिल सकेगी। रिटेंशन रेट - अगर किसी यूनिवर्सिटी की ऊंची रिटेंशन रेट है तो इसका सीधा-सा मतलब है कि वहां के बच्चे पढ़ाई से संतुष्ट हैं। यही वजह है कि नए क्लास में जाने पर यूनिवर्सिटी या कॉलेज नहीं बदल रहे हैं। करियर पर ध्यान - यह इस बात को बताता है कि यूनिवर्सिट...

दान का महत्व 22.09.2021

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  दान का महत्व पितृपक्ष में पूर्वजों को याद करके दान धर्म करने की परंपरा है , हिंदू धर्म में इसका महत्व है। पितृ पक्ष पर पितरों की मुक्ति के लिए कर्म किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार , पितृ रुष्ट हो जाएं तो घर की तरक्की में बाधाएं उत्पन्न होने लगती हैं। यही कारण है कि पितृ पक्ष में पितरों को खुश करने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्राद्ध किए जाते हैं। यूं तो हर धर्म में दान करने का बहुत महत्व माना जाता है और कहा जाता है कि दान करने से मनुष्य का इस लोक के बाद परलोक में भी कल्याण होता है। लेकिन आज के बदलते समय में लोगों के लिए दान का अर्थ केवल धन दान तक ही सीमित रह गया है चाहे इसे समय की कमी कहें , या कुछ और। दान कर्म को पुण्य कर्म में जोड़ा जाता है। भारतीय संस्कृति में वैदिक काल से ही दान करने की परंपरा चली आ रही है। हिंदू सनातन धर्म में पांच प्रकार के दानों का वर्णन किया गया है। ये पांच दान हैं , विद्या , भूमि , कन्या , गौ और अन्न दान... भूमि दान - पहले के समय में राजाओं द्वारा योग्य और श्रेष्ठ लोगों को भूमि दान किया जाता था। भगवान विष्णु ने बटुक ब्राह्मण का अवतार...

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस (21 सितंबर) के अवसर पर विश्व के नाम शांतिप्रिय भारत का संदेश 21.09.2021

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  अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस ( 21 सितंबर) के अवसर पर विश्व के नाम शांतिप्रिय भारत का संदेश ॐ शं नो मित्रः शं वरुणः।   शं नो भवत्वर्यमा।   शं नः इन्द्रो वृहस्पतिः।   शं नो विष्णुरुरुक्रमः।   नमो ब्रह्मणे। नमस्ते वायो।   त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।   त्वमेव प्रत्यक्षम् ब्रह्म वदिष्यामि।   ॠतं वदिष्यामि। सत्यं वदिष्यामि।   तन्मामवतु।   तद्वक्तारमवतु।   अवतु माम्।   अवतु वक्तारम्।   ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस सभी देशों और लोगों के बीच शांति के आदर्शों को मजबूत करने के लिए समर्पित है। ऐसे समय में जब युद्ध और हिंसा अक्सर हमारे समाचार चक्रों पर एकाधिकार कर लेते हैं , अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस एक प्रेरक अनुस्मारक है कि हम मिलकर विश्व में शांति का वातावरण बना सकते हैं। जी हाँ शांति। आइए इसे मौका दें! क्योंकि शांति संभव है। ऐसी दुनिया में जीवन बेहतर होता है , जहां शांति होती है और भारत की वीरप्रसू धरा पर अनेकानेक शांतिदूत जन्म लेते रहे हैं , चाहे वे महात्मा बुद्ध हों या महात्मा गांधी। सबने विश्व क...