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Showing posts from August, 2023

एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम

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    एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम   मेरा देश बड़ा गर्वीला , रीति-रसम-ऋतु-रंग-रंगीली जहाँ वास कँकड़ में हरि का , वहाँ नहीं चाँदी चमकीली मेरा देश बड़ा गर्वीला , रीति-रसम-ऋतु-रंग-रंगीली मन में राम , बगल में गीता , घर-घर आदर रामायण का किसी वंश का कोई मानव , अंश साझते नारायण का लो गंगा-यमुना-सरस्वती या लो मंदिर-मस्जिद-गिरजा ब्रह्मा-विष्णु-महेश भजो या जीवन-मरण-मोक्ष की चर्चा सबका यहीं त्रिवेणी-संगम , ज्ञान गहनतम , कला रसीली मेरा देश बड़ा गर्वीला , रीति-रसम-ऋतु-रंग-रंगीली भारत एक अद्भुत राष्ट्र है , जिसका निर्माण विविध भाषा , संस्कृति , धर्म के तानो-बानो , अहिंसा और न्याय के सिद्धांतों पर आधारित स्वतंत्रता संग्राम तथा सांस्कृतिक विकास के समृद्ध इतिहास द्वारा एकता के सूत्र में बाँध कर हुआ हैं | एक साझा इतिहास के बीच आपसी समझ की भावना ने विविधता में एक विशेष एकता को सक्षम किया है , जो राष्ट्रवाद की एक लौ के रूप में सामने आती है, जिसे भविष्य में पोषित और अभिलषित करने की आवश्यकता है। समय और तकनीक ने संपर्क और संचार के मामले में दूरियों को कम कर दिया है। ऐ...

चंदामामा

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  बाल कविता   चंदामामा   चंदा मामा , चंदा मामा आया विक्रम पहन पाजामा   कब से आस लगाई थी अब पहुंचा हूं पास तुम्हारे इतनी दूर बसे हो मामा लगा लगाकर चक्कर हारे राखी तुम्हारी लेकर आया , भेजी मेरी भारत अम्मा। चंदा मामा , चंदा मामा आया विक्रम पहन पाजामा   घर की छत से तुम्हें निहारा दिखते हमें चांदी की थाली लेकिन यहां पर आकर देखा सूरत उबड़-खाबड़ काली- काली पर ओढ़े है अनुपम जामा कैसे भी पर मेरे   मामा। चंदा मामा , चंदा मामा आया विक्रम पहन पाजामा   बात पते की तुम्हें बताऊं तुम्हें पूजती सदा सुहागिन अब मैं पता लगाऊंगा घटते बढ़ते क्यों दिन दिन शोधे करेंगे विज्ञानी चाचा तप से पूरी मनश्च कामा। चंदा मामा , चंदा मामा आया विक्रम पहन पाजामा   बस तुम साथ निभाते रहना धरती मैया तुम्हें निहारे रत्नों का भंडार संजोए तुम्हें पाते मन के हारे विक्रम और प्रज्ञान संग में पकड़ो अंगुली चंदा मामा। चंदा मामा , चंदा मामा आया विक्रम पहन पाजामा॥   मीता गुप्ता  

‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’(14 अगस्त)

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  ‘ विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस ’(14 अगस्त) https://drive.google.com/file/d/1SrzfVR-m5OAFitN7R0KI9D30L2DIEjHA/view?usp=drive_link जहां जीवन की हर सुबह मुस्कान से पुलकित हो उठती थी , वहां का मंजर देख आंसू भी खून हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार-देश के बंटवारे के दर्द को कभी बुलाया नहीं जा सकता। नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गवांनी पड़ी। उन लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद में 14 अगस्त को ‘ विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस ’ के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया। देश-दुनिया के इतिहास में 14 अगस्त की तारीख का अहम स्थान है। दरअसल अखंड   भारत के आजादी के इतिहास में 14 अगस्त की तारीख आंसुओं से लिखी गई है। यही वह तारीख है , जब देश का विभाजन हुआ। 14 अगस्त , 1947 को पाकिस्तान और 15 अगस्त , 1947 को भारत को पृथक राष्ट्र घोषित कर दिया गया। इस विभाजन में न केवल भारतीय उपमहाद्वीप के दो टुकड़े किए गए , बल्कि बंगाल का भी विभाजन किया गया। बंगाल के पूर्वी हिस्से को भारत से अलग कर पूर्वी पाकिस्तान बना दिया गया। यह 197...

यह तिरंगा…..

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 यह तिरंगा….. यह तिरंगा हमारी शान है, विश्वभर में भारती की अमिट पहचान है, यह तिरंगा हाथ में ले पग निरंतर ही बढ़े, यह तिरंगा हाथ में ले दुश्मनों से हम लड़े, यह तिरंगा विश्व का सबसे बड़ा जनतंत्र है, यह तिरंगा वीरता का गूंजता इक मंत्र है, यह तिरंगा वन्दना है भारती का मान है, यह तिरंगा विश्व जन को सत्य का अभिमान है, यह तिरंगा कह रहा है अमर भारत देश है, यह तिरंगा इस धरा पर शांति का संधान है, इसके रंगो में बुना बलिदानियों का नाम है, यह बनारस की सुबह है, यह अवध की शाम है, यह कभी मंदिर, कभी यह गुरुओं का द्वार लगे, चर्च का गुंबद कभी, मस्जिद की मीनार लगे, यह तिरंगा गंगा-जमुनी तहज़ीब का सम्मान है, यह तिरंगा बाइबिल है, भागवत का श्लोक है, यह तिरंगा आयत-ए-कुरान का आलोक है, यह तिरंगा वेद की पावन ऋचा का ज्ञान है, यह तिरंगा स्वर्ग से सुंदर धरा कश्मीर है, यह तिरंगा फेनिल कन्याकुमारी का नीर है, यह तिरंगा माँ के होठों की मधुर मुस्कान है, यह तिरंगा दिव्य नदियों का त्रिवेणी रूप है, यह तिरंगा सूर्य की पहली किरण की धूप है, यह तिरंगा भव्य हिमगिरि का अमर वरदान है, शीत की ठंडी हवा, पर शत्रु के लिए अंगार है, सावन...

अति से बचें

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  अति से बचें अति का भला न बोलना , अति की भली न चूप। अति का भला न बरसना , अति की भली न धूप।। शास्त्रकारों ने सत्य कहा है- अति सर्वत्र वर्जयेत् । उन्होंने सब कामों में अति का विरोध किया है। कुछ विशिष्ट आत्माएं असाधारण तेज अपने साथ लेकर आती हैं , उनकी गतिविधि आरंभ से ही असाधारण होती है उनके कार्य भी लोकेत्तर होते हैं। ऐसी विशिष्ट आत्माओं की बात छोड़कर सर्वसाधारण के लिए मध्य मार्ग ही उचित और उपयुक्त है। भगवान बुद्ध ने मध्यमा का आचरण करने के लिए सर्वसाधारण को उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि मोक्ष तक पहुँचने के तीन सरलतम मार्ग हैं- पहला आष्टांग योग , दूसरा जिन त्रिरत्न और तीसरा आष्टांगिक मार्ग। आष्टांगिक मार्ग सर्वश्रेष्ठ इसलिए है कि यह हर दृष्टि से जीवन को शांतिपूर्ण और आनंदमय बनाता है। बुद्ध ने इस दुःख निरोध प्रतिपद आष्टांगिक मार्ग को ' मध्यमा प्रतिपद ' या मध्यम मार्ग की संज्ञा दी है। अर्थात जीवन में संतुलन ही मध्यम मार्ग पर चलना है। बहुत तेज़ दौड़ने वाले जल्दी थक जाते हैं और बहुत धीरे चलने वाले अभीष्ट लक्ष्य तक पहुंचने में पिछड़ जाते हैं , जो मध्यम गति से चलता है , वह बिना ...

गोल गप्पों की चटपटी कहानी

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  गोल गप्पों की चटपटी कहानी   12 जुलाई को गोल गोल गप्पे का दिवस था , सोचा गोल गप्पों के बारे में कुछ बातें साझा करूं। गोल गप्पे , फुचका , पानी का बताशा या पताशा , गुप चुप , फुल्की , पकौड़ी - ये सभी भारत के सबसे पसंदीदा स्नैक्स में से एक , पानी पूरी के नाम हैं। तले हुए आटे की एक छोटी , साधारण , कुरकुरी खोखली गेंद , आलू से भरी हुई और मसालेदार जलजीरा और मीठी चटनी में डुबोई गई।भारतीय स्ट्रीट फूड की दुनिया विशाल , विविध और स्वादिष्ट है , लेकिन पानी पूरी इसमें राजा है। चाहे आप सड़क के किनारे किसी विक्रेता से इसे ऑर्डर कर रहे हों या किसी शादी के बुफे में चाट स्टैंड की ओर रुख कर रहे हों , पानी पूरी शायद ही कभी आपको निराश करेगी। लेकिन यह अद्भुत खाद्य पदार्थ कहां से आया ? जब पानी पूरी के इतिहास की बात आती है तो इंटरनेट के पास देने को बहुत कम है। यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में इसका श्रेय किसे दिया जाना चाहिए। हम केवल इस व्यंजन के स्रोत के बारे में किंवदंतियाँ ही सामने रख सकते हैं , जिनमें से एक का कहना है कि यह पहली बार प्राचीन भारतीय साम्राज्य मगध में कहीं अस्तित्व...