जीवन संघर्षो से न घबराना ही मनुष्यता है
जीवन संघर्षो से न घबराना ही मनुष्यता है सच हम नहीं , सच तुम नहीं। सच है सतत संघर्ष ही। संघर्ष से हटकर जिए तो क्या जिए हम या कि तुम। जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृन्त से झरकर कुसुम। जो पन्थ भूल रुका नहीं , जो हार देख झुका नहीं , जिसने मरण को भी लिया हो जीत है जीवन वही। सच हम नहीं , सच तुम नहीं । कई विचारकों का मत है कि अगर हम कोई जोखिम नहीं लेते हैं , तो वह अपने-आप में सबसे बड़ा जोखिम है। यह सही भी है कि ज़्यादातर लोग जोखिम लेने से डरते हैं। इसकी कई वजहें होती हैं , लेकिन जो सबसे बड़ी वजह है , वह है संकल्प और विचार शक्ति की कमी । कहने को तो विचार शक्ति और संकल्प का अभाव जानवरों में होता है , पर जब कोई इंसान बिना विचारे कोई ऐसा काम कर बैठता है , तो कहा जाता है कि वह तो निरा पशु हो गया है। यानी इंसान होकर भी अगर...