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हैलो.. हैलो.. हैलो..

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  हैलो.. हैलो.. हैलो.. कभी सोचा है दोस्तों, दिन में कितनी बार हम ‘हैलो’ करते हैं? आइए, जानें, हैलो,कब और कहां से आया और हमारी बोलचाल का अटूट हिस्सा बन गया और तो और इसे महिमा-मंडित करने के लिए हर साल 21 नवंबर को ‘विश्व हैलो दिवस’ भी मनाया जाता है | हैलो दिवस मनाने का उद्देश्य एक दूसरे की बीच पुरानी दुश्मनी को खत्म कर मित्रता को बढ़ावा देना है | हैलो बहुत कॉमन शब्द है , लगभग सभी लोग फ़ोन   रिसीव करते ही पहला शब्द हैलो ही बोलते हैं | लेकिन क्या आप जानते हैं कि लोग आम-बोलचाल की भाषा में ‘हैलो’ शब्द का उपयोग क्यों करते हैं? बताया जाता है कि इजराइल और मिस्र के युद्ध के दौरान हजारों की संख्या में सैनिक और निर्दोष नागरिक मारे गए थे | युद्ध के अंत में इजराइल और मिस्र में शांति स्थापित करने के लिए जो पहला शब्द इस्तेमाल किया वह था-हैलो , इसी वजह से विश्व में शांति और मित्रता प्रसार करने के लिए ‘विश्व हैलो     दिवस’ मनाने की शुरुआत की गई | जब कोई इंसान एक दूसरे को हैलो बोलता है , उस वक्त उसकी आपसी दुश्मनी खत्म हो जाती है , यही कारण है कि देखते ही देखते यह दि...

राष्ट्रीय एकता और अखंडता: समय की पुकार

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    सांप्रदायिक   सद्भाव सप्ताह के अवसर पर राष्ट्रीय एकता और अखंडता: समय की पुकार भारत अनेक धर्मों ,  जातियों और भाषाओं का देश है। धर्म ,  जाति एवं भाषाओं की दृष्टि से विविधता होते हुए भी भारत में प्राचीन काल से ही एकता की भावना विद्यमान रही है। जब कभी किसी ने उस एकता को खंडित करने का प्रयास किया है। भारत का एक-एक नागरिक सजग हो कर राष्ट्रीय एकता को खंडित करने वाली शक्तियों के विरुद्ध खड़ा होने को तत्पर हुआ है। राष्ट्रीय एकता हमारे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है और जिस व्यक्ति को अपने राष्ट्रीय गौरव पर अभिमान नहीं है ,  वह नर नहीं नर-पशु है। जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है। वह नर नहीं नर पशु निरा है और मृतक समान है। राष्ट्रीय एकता का अभिप्राय हैं संपूर्ण भारत की आर्थिक ,  सामाजिक ,  राजनीतिक और वैचारिक एकता। हमारे कर्म-कांड ,  पूजा-पाठ ,  खान-पान ,  रहन-सहन और वेशभूषा में अंतर हो सकता है ,  किंतु हमारे राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोण में एकता होनी चाहिए। इस प्रकार अनेकता में एकता ही भारत की प्रमुख विशेषता है। एकत...

कैसा हो ऑफ़िस का पहला दिन…???

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  कैसा हो ऑफ़िस   का पहला दिन …??? नए ऑफ़िस का पहला दिन अपने साथ घबराहट और एक्साइटमेंट , दोनों साथ लेकर आता है। नई आकांक्षाएं , जहां जमीं पर पैर रखने को तैयार नहीं होतीं , वहीं एक अनजान - सा डर दिल-ओ-दिमाग के एक कोने में घर किए बैठा रहता है। ऑफ़िस   के पहले दिन सभी नर्वस होते हैं। ऑफ़िस   का पहला दिन एक बेहतर अवसर की तरह होता है। लेकिन बहुत से लोग कई बार ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो जॉब और इमेज दोनों को हानि पंहुचा सकती हैं ।वर्क प्लेस पर कोई भी ऐसी गलती न करें जो करियर को नुकसान पहुंचाए। तो समझ नहीं आता कि कैसे ऑफ़िस   में पहले दिन अपनी धाक जमाएं? v   ऑफ़िस   समय पर पहुंचें-कहते हैं समय की पाबंदी किसी भी काम या बिजनेस की आत्मा होती है इसलिए पहला दिन हो या आखिरी , ऑफ़िस   हमेशा समय पर ही जाएं। घर से इतना समय निकालकर चलें कि यदि ट्रैफिक में फंस जाएं तो भी आप ऑफ़िस   समय से पहले पहुंच जाएं। क्योंकि हर संस्थान में बॉस को समय के पाबंद कर्मचारी बहुत रास आते हैं। काम के बीच ब्रेक मिलने पर भी समय से अपने डेस्क पर आकर बैठ जाएं। अच्छा यह होगा कि पहले दिन ...

नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए

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  नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए बाल-दिवस के अवसर पर विशेष नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए   घर से मस्जिद है बहुत दूर, चलो यूं कर लें , किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए। दोस्तों , किसी ने ठीक ही कहा है कि रोते हुए किसी बच्चे को हंसाने में और ख़ुदा की इबादत में कोई फ़र्क नहीं है। बच्चे इतने निष्पाप और मासूम होते हैं कि भगवान स्वयम् ही उनमें निवास करते हैं। बच्चों की इसी मासूमियत और भोलेपन में वह जादू होता है जो कठोर से कठोर इंसान का भी दिल पिघला दे। आज हम बच्चों, बचपन और उनकी नानी की चर्चा करने जा रहे हैं| नानी पर बहुत से मुहावरे और कहावतें कही जाती हैं। नानी याद आना भी एक मुहावरा है। हम नानी के साथ नहीं रहते हैं इसलिए नानी की याद आती रहती है। सिर्फ़ कहना हीं काफ़ी है कि तुझे नानी याद आ जाएगी। नानी को हम दिन में कई बार मारने की भी पेशकश करते हैं, जैसे- अगर तुम्हें कोई काम करने को कहा जाए, तो तुम्हारी नानी मरने लगती है। इसमें नानी के मारने की बात कहां से आ गई?   काम करने वाला काम नहीं करता है, तो हम नानी को क्यों मारने लगते हैं ?   यह बात हम नानी के ठीक पीठ पीछे...

क्या_कभी_खुद_से_इश्क_किया?

 क्या_कभी_खुद_से_इश्क_किया? अक्सर लोग जब रिश्तों और सम्बन्धों पर चर्चा करते हैं तो खूब शिकायत करते हैं कि फलां व्यक्ति को उसने बहुत प्रेम किया, उसके साथ बहुत समय नष्ट किया, मंहगे तोहफे दिए, कोई फायदा नहीं हुआ। गोया किसी फायदे के लिए प्रेम किया हो। या कि सब बेकार की बातें है कभी किसी से प्रेम नहीं करना चाहिए सब धोखेबाज होते हैं, कोई किसी का नहीं, आदि-आदि। कुछेक महिलाएँ खुद से ही प्रेम करने की सलाह देती दिखाई देती है कि दुनिया के सभी पुरुष बहुत बुरे हैं इसलिए खुद से प्रेम करो और खुश रहो। तो कहीं पुरुष कहते हैं सभी महिलायें बहुत चालाक और फरेबी हैं उनसे बचो खुद में खुश रहो। क्या सिर्फ खुद से प्रेम किया जा सकता है? आत्मकेंद्रित या आत्ममुग्ध होकर भी क्या आप खुश रह पाते हैं? सबसे ज्यादा कुंठित तो आत्ममुग्ध लोग ही होते हैं और एक दिन अपनी कुंठाओं में डूब जाते हैं। ये आत्ममुग्ध कभी किसी से प्रेम नहीं कर पाते। खुद तो मरते ही हैं साथ ही प्रेम की हत्या भी करते हैं। मेरी एक मित्र हैं उनसे जब मिली तो उन्होंने बड़ी शान से मुझे कुछ तोहफे दिखाए जो उनके नए प्रेमी ने दिए थे और वो तोहफे भी भी दिखाए जो ...

विविधता में एकता-हिंद की विशेषता

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  विविधता में एकता-हिंद की विशेषता   भारतीय संस्कृति में विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक तत्वों का एक अनुपम समन्वय देखने को मिलता है। ये विविधताएं भारतीय समाज व संस्कृति में चार चाँद लगाती है। वास्तव में भारतीय संस्कृति में दूसरों के सांस्कृतिक तत्वों को आत्मसात करने और अपने अंदर उनको उपयुक्त स्थान प्रदान करने की अद्भुत शक्ति है। इसी सौंदर्य को देखकर ही अनेक विदेशियों ने भारत में प्रवेश किया। इनकी संस्कृति एक-दूसरे से काफी भिन्न होने के बावजूद भी भारत ने इनको ग्रहण किया और उसे अपने साथ मिला लिया। इसी प्रकार समय की मांग को देखते हुए भारत ने विभिन्न सांस्कृतियों के विभिन्न तत्वों को आत्मसात करके अपनी संपन्नता को बढ़ाया। भारत ने ग्रहण किए जा सकने वाले सभी तत्वों को ग्रहण किया। इन विविधताओं को निम्न प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता हैं - 1. भौगोलिक दशाओं की विविधताएँ - भारत का क्षेत्रफल काफी बड़ा है। अतः यहाँ भौगोलिक विविधताओं का पाया जाना स्वाभाविक है। भारत में यदि एक ओर बर्फ़ से ढकी हिमालय पर्वत की चोटियां हैं , तो दूसरी ओर लहराता समुद्र और खाड़ियां भी हैं। भारत में यदि एक और राज...