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Showing posts from 2022

देखो नूतन वर्ष है आया

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  देखो नूतन वर्ष है आया वर्ष नव , हर्ष नव , जीवन उत्कर्ष नव। नव उमंग , नव तरंग , जीवन का नव प्रसंग। नवल चाह , नवल राह , जीवन का नव प्रवाह। गीत नवल , प्रीत नवल , जीवन की रीति नवल , जीवन की नीति नवल , जीवन की जीत नवल! वास्तव में , नया वर्ष , नए संकल्पों , नए स्वप्नों और नए सृजन का ही तो साक्षी पर्व है। नव वर्ष हमें ओढ़ने का नहीं , आत्मसात कर लेने का आह्वान करता है। आत्मसात करने से जीवन की कायाकल्प हो जाती है , जबकि ओढ़ी हुई चादर तो समय के साथ हट जाती है।नए साल के संदर्भ में सोचती हूं , तो आभास होता है कि मानो साल समय के पर्यटन स्थल का वह नन्हा मार्गदर्शक है , जिसकी अंगुली थामकर हम इस पर्यटन स्थल की बारह महीने सैर करते हैं। बारहवें माह तक यह वृद्ध हो चुका होता है , तब यह हमारी अंगुली एक नए मार्गदर्शक को थमाकर हमसे विदा हो जाता है। हमारी नियति इन्हीं नन्हीं अंगुलियों के भरोसे अपनी यात्रा करने की है और इतिहास गवाह है कि शिशु कभी छलते नहीं हैं। आज जब हम इस शिशु की अंगुली थामकर अपनी यात्रा आगे बढ़ा रहे हैं , तो यह विश्वास करना चाहिए कि हमें यह शिशु वर्ष 2022 में हर्ष और उ...

आइए, बीते साल के लिए सबको धन्यवाद दें

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  आइए , बीते साल के लिए सबको धन्यवाद दें   धन्यवाद! एक ऐसा शब्द जो एक अलग तरह की महीनता लिए हुए है। कई बार ऐसा होता है कि सिर्फ़ एक शब्द ही पूरा सुख बुन देता है और ‘धन्यवाद’ ऐसा ही शब्द है। एक भरा-पूरा शब्द जो किसी भी तरह के सहयोग , सेवा का माल्यार्पण है। हम प्रसन्न होते हैं , किसी का सहयोग पाकर और हमारे अंदर भी बहुत कुछ फैलता है , वही कह देता है धन्यवाद। यह शब्द ‘धन्य और वाद’ के समासीकरण से बना है। इसका समास विग्रह करेंगे तो सामने आएगा- धन्य , ऐसा वाद। धन्य का मतलब ‘कृत या कृतार्थ।’ धन्य + वाद = धन्यवाद। यह संस्कृत का समस्त पद है। आइए इस शब्द को समझते हैं– ( धन्य – धन् + यत्) – धनी , धन प्रदान करने वाला , महाभाग , ऐश्वर्यशाली , सौभाग्यशाली , श्रेष्ठ। वैसे अंग्रेज़ी शब्द ‘थैंक्स’ के बारे में बात करें , तो इसका उद्गम 12 वीं शताब्दी में हुआ। इसका वृहद संदर्भ में अर्थ है- ‘आपने जो मेरे लिए किया , वो मैं याद रखूंगा।’ चौकीदार , जो दरवाजा खोलते हुए आपका अभिवादन करता है , आप उसे धन्यवाद तक कहना मुनासिब नहीं समझते। कहने का मतलब यह है कि दुनिया या लोगों से परिचय करने से भी पह...

दुष्यंत की ग़ज़लों में सामाजिक चेतना

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  दुष्यंत की ग़ज़लों में सामाजिक चेतना ( स्व. दुष्यंत कुमार 01 सितंबर 1933 - 30 दिसंबर 1975 )   अपने तीसरे कविता संग्रह ' जलते हुए वन का वसंत ' की भूमिका में दुष्यंत कुमार कहते हैं कि ' मेरे पास कविताओं के मुखौटे नहीं हैं , अंतर्राष्ट्रीय मुद्राएं नहीं हैं , मैं सामाजिक परिस्थिति के संदर्भ में साधारण आदमी की पीड़ा , उत्तेजना , दबाव , अभाव और उनके संबंधों में उलझनों को जीता हूँ और व्यक्त करता हूँ। मेरे लिए मनुष्य मात्र की अवमानना सबसे अधिक कष्टप्रद है। ' इसी भावभूमि , विचार और संवेदना के तहत दुष्यन्त का परवर्ती लेखन निरंतर निखरता रहा एवं अधिक समृद्ध होता गया। अपने पहले कविता संग्रह ' सूर्य का स्वागत ' से लेकर ' आवाज़ों के घेरे ', ' जलते हुए वन का वसंत ' और ग़ज़ल संग्रह ' साये में धूप ' तक उनकी काव्य-प्रतिभा और प्रखरता लगातार परवान चढ़ती रही। उनका   काव्य-नाटक ' एक कंठ विषपायी ' और दो उपन्यास ' छोटे छोटे सवाल ' तथा ' आँगन में एक वृक्ष ' भी इस दृष्टि से कम महत्त्वपूर्ण नहीं हैं। दुष्यंत कुमार ने अपनी अधिका...

श्रद्धांजलि माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी

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  श्रद्धांजलि माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी बाधाएं आती हैं आएं , घिरें प्रलय की घोर घटाएं , पावों के नीचे अंगारे , सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं , निज हाथों में हंसते-हंसते , आग लगाकर जलना होगा , कदम मिलाकर चलना होगा। हास्य-रुदन में , तूफ़ानों में , अगर असंख्यक बलिदानों में , उद्यानों में , वीरानों में , अपमानों में , सम्मानों में , उन्नत मस्तक , उभरा सीना , पीड़ाओं में पलना होगा , कदम मिलाकर चलना होगा॥   25 दिसंबर का दिन दुनियाभर में खास है। इस दिन विश्व के कई देश क्रिसमस का पर्व मनाते हैं। हालांकि भारत के लिए 25 दिसंबर का महत्व अलग ही है। भारत के इतिहास में 25 दिसंबर की तारीख सिर्फ़ क्रिसमस के तौर पर ही नहीं , बल्कि सुशासन दिवस के रूप में भी दर्ज है। प्रत्येक वर्ष भारतीय 25 दिसंबर को सुशासन दिवस मनाते हैं। सवाल ये है कि सुशासन दिवस क्यों मनाते हैं ? इस दिन को मनाने की शुरुआत कब और कैसे हुई ? सुशासन दिवस मनाने का उद्देश्य क्या है ? सबसे पहले तो यह जान लेना चाहिए कि सुशासन दिवस भारत के तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके स्व. अटल बिहारी वाज...