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Showing posts from June, 2023

चलो, पिकनिक चलें!!

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  चलो ,   पिकनिक चलें!!                      पिछले दिनों एक फिल्म देख रही थी … फिल्म पुरानी थी और उसमें पूरे परिवार का पिकनिक जाना...उनका वहां चादर बिछाकर , टोकरी खोलकर खाने का सामान आपस में बांट कर खाना , बच्चों का बॉल से और बड़ों का बैडमिंटन खेलना , इस देखकर कुछ याद आया , अरे! आजकल तो हम पिकनिक जाते ही नहीं। तो सोचा कि क्यों न आज पिकनिक चलें? पिकनिक जीवन में मनोरंजन और सुखद अनुभवों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमें सामान्य दिनचर्या और दैनिक तनाव से दूर रखकर मनोरंजन , आराम और परिवार या मित्रों के साथ समय बिताने का अवसर प्रदान करता है। जीवन में पिकनिक क्यों है ज़रूरी ? स्वास्थ्य लाभ: पिकनिक एक अच्छा व्यायाम का माध्यम हो सकता है। खुले आसमान में फिजिकल एक्टिविटी जैसे चलना , दौड़ना , फ्रिस्बी खेलना , खेल , ट्रेकिंग , स्विमिंग आदि स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं। इसके अलावा , पिकनिक के दौरान आप ताजगी भरी हवा इन्हेल करते हैं जो आपके शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद होती है। हम खुल...

नशा करता है नाश

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    नशा करता है नाश 26 जून को मनाए जाने वाले नशा मुक्त भारत अभियान एक प्रयास है , जो देशभर में नशा मुक्त समाज की संकल्पना करता है। नशा मुक्त भारत अभियान के तहत , नशेबाज़ी   के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम , नशे के प्रभावों पर जागरूकता और शिक्षण , सार्वजनिक धार्मिकता के माध्यम से नशामुक्ति के संकल्प , सुरक्षित और नशामुक्त महानगरों के विकास , नशामुक्ति नीतियों का निर्माण और कठोर कानूनी कार्रवाई को समर्थन करने जैसे कई पहलुओं को शामिल किया जाता है। सहयोग , अनुबंधों , वित्तीय सहायता और तकनीकी सहायता के माध्यम से भी विभिन्न क्षेत्रों   के बीच नशा मुक्ति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाता है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य एक समृद्ध , स्वस्थ्य और नशामुक्त समाज का निर्माण करना है जहां लोगों को नशा की समस्या से छुटकारा मिले और वे अपनी पूरी क्षमता से समाज में सक्रिय भागीदारी ले सकें। नशा करने से तात्कालिक आनंद और सुख की भावना हो सकती है , लेकिन यह उसके बाद के परिणामों के साथ खुद को पीड़ित कर सकता है। नशे के संबंध में आदिकाल से लोगों ने इसके नकारात्मक प्रभावों की चेतावनी दी है। नशे...

हर घर-आंगन योग

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हर घर-आंगन योग "हर घर-आंगन योग" वाक्य का अर्थ है कि योग का अभ्यास हर घर में किया जाना चाहिए या हर घर में योग की अवधारणा और अभ्यास होना चाहिए। योग एक प्राचीन भारतीय विधि है जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने के लिए उपयोगी होता है। यह मेडिटेशन, आसन, प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से शरीर, मन और आत्मा को संयुक्त करने का एक तरीका है। हर घर में योग का अभ्यास करने के अनेक लाभ होते हैं। इससे शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, मानसिक तनाव कम होता है, मनःशांति और चित्त की स्थिरता प्राप्त होती है, और सामर्थ्य और स्वयंवलंबन में सुधार होता है। योग ध्यान की सक्षमता को विकसित करता है और उच्च स्तर की चेतना एवं उत्साह प्रदान करता है। यह परिवारों को संगठित और संबंधों को मजबूत करने में भी मदद करता है। इसलिए, "हर घर योग" विचार यह सुझाता है कि हमें अपने दैनिक जीवन में योग को समावेश करना चाहिए और योग के गुणों का लाभ उठाना चाहिए। इससे हमारे जीवन का स्तर बेहतर हो सकता है और हम शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ स्थिरता और संतुलन को प्राप्त कर सकते हैं।  योग एक प्राचीन ...

सफलता पानी है, तो स्वयं को पहचानो

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  सफलता पानी है , तो स्वयं को पहचानो   व्यक्ति के जीवन में सफलता के बहुत मायने हैं। हर कोई परिश्रम करता है। ज़रूरी नहीं है कामयाबी मिल ही जाए। ऐसे में इन दो तीन बातों का ख्याल रखकर हम सफलता तय कर सकते हैं।सफलता के लिए एकाकीपन , भय , संकोच , भावुकता और हीनभावना जैसे अवगुण बाधक हो सकते हैं। ऐसे में कोई भी काम शुरू करने से पहले कार्यविशेष के लिए आत्मआकलन करना बेहतर होगा। अपनी शक्ति , सामर्थ्य और समय के प्रति एकाग्रता को ईमानदारी से परखने से जरूर सफलता मिलती है। इसी तरह किसी भी काम में असफल होने पर भाग्य को दोषी न मानकर पूरी शक्ति , निष्ठा के साथ लक्ष्य की प्राप्ति में जुट जाइए। एक-एक पल का उपयोग करना अनिवार्य सफलता के लिए समय का महत्व समझें। एक-एक पल उपयोग करना अनिवार्य है। हर इंसान के जीवन में एक बार सुअवसर ज़रूर दस्तक देता है। ऐसे में उसे पहचान कर इस्तेमाल करने का प्रयास करें। एक बार सफल न हों , तो भी पछताकर या रोकर समय बर्बाद न करें। लक्ष्य निर्धारित करके ही सफलता की ओर बढ़ें। ऐसा न हो कि आपकी नीति के ढुल-मुल होने से असफलता ही हाथ लगेगी। एक से अधिक लक्ष्य के लिए ध्या...

क्या करें समय ही नहीं मिलता?

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  क्या करें समय ही नहीं मिलता ?     स्वाध्याय के लिए , आत्म चिंतन के लिए , साधना के लिए , अक्सर लोग यह कहते रहते हैं कि क्या करें ? समय ही नहीं मिलता!!! वे अपने आप को बहुत व्यस्त बताते हैं। ज़रूरी कामों से फुरसत पाए बिना , भला आध्यात्मिक कामों के लिए इन्हें किस प्रकार समय मिल सकता है ? विचार करना चाहिए कि क्या वास्तव में उन्हें फुर्सत नहीं मिलती ? क्या वास्तव में वे इतने व्यस्त होते हैं कि आत्म निर्माण के लिए ज़रा भी समय ना निकाल सकें ? जिन कामों को वे ज़रूरी समझते हैं , क्या वे वास्तव में इतने ज़रूरी होते हैं कि उसे थोड़ा भी समय कम ना किया जा सकें। हम देखते हैं कि अपने को बहुत ही व्यस्त समझने वाले व्यक्ति भी काफी समय गपशप में , मनोरंजन में , मटरगश्ती में तथा आलस्य में व्यतीत करते हैं। उनके कार्यों का बहुत सारा भाग ऐसा होता है , जो उतना आवश्यक नहीं होता , फिर भी वे अपनी रूचि एवं दृष्टि के अनुसार उसे ज़रूरी समझते हैं। असल बात यह है कि समय ना मिलना या फ़ुर्सत ना मिलना , इसका मतलब है दिलचस्पी ना होना। जिस काम में आदमी को दिलचस्पी नहीं होती , जो उतना आवश्यक ,...

नारी सृष्टि की संवेदना शक्ति- द्रौपदी के परिप्रेक्ष्य में

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  नारी सृष्टि की संवेदना शक्ति- द्रौपदी के परिप्रेक्ष्य में सहस्रों दीप मालिकाओं से सुसज्जित उस विशाल सभागार में द्यूत क्रीड़ा का आयोजन हुआ था। धूप-अगरू में सुवासित उस प्रेक्षागृह में दूर-दूर से कौतुकप्रिय जन आए थे। प्राचीन कुरु वंश की प्रमुख दोनों शाखाओं में आज रोचक द्यूत-स्पर्धा थी। औत्सुक्य और कौतूहल के   क्षण अब तक शमशान की भयावह शांति में बदल चुके थे। सभागार के केंद्र में उच्च सिंहासन पर नेत्र ज्योति विहीन महाराज धृतराष्ट्र विराजमान थे। निकट ही उनकी साध्वी पत्नी गांधारी नेत्रों पर वस्त्र-पट्टी बांधे बैठी थी। पुत्र स्नेह में वे दोनों आंखों से ही नहीं , विवेक से भी अंधे हो चुके थे। पुत्र-मोह की पट्टी दोनों के नेत्रों पर बंधी थी। अधर्म की पट्टी बांधे रहने से उनके ज्ञान-चक्षु भी मूंद चुके थे। अनेक प्रकांड विद्वान , मनीषी , विधि-मर्मज्ञ , धर्मज्ञाता , साधु पुरुषों एवं पराक्रमी राजपुत्रों से सुशोभित यह सभामंडप जगमगा रहा था। वहां परम प्रतापी पितामह भीष्म थे। प्रसिद्ध धनुर्वेद गुरुवर द्रोणाचार्य थे। महर्षि विदुर थे। शरद्वान पुत्र कृपाचार्य थे। इन सबमें प्रत्...