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Showing posts from April, 2020

ये इंद्रधनुषी बच्चे

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ये इंद्रधनुषी बच्चे अब इतिहास में दर्ज होगा एक ऐसा समय , जब संसार हो गया निश्चल , जब सपरिवार रहे भीतर , कभी-कभी खिड़कियों से झाँकते , उस साफ होते आसमान को देखते , जो इतना नीला कभी न था , जो उन्होंने बरसों से ना देखा था , वह फूलों का खिलना , वह सूरज का निकलना , वह बादलों का आना-जाना , और हां , वह रंग बिरंगा इंद्रधनुष , जिसकी आभा को न जाने कब से नहीं देखा था ।। अब इतिहास में दर्ज होगा एक ऐसा समय , जब खेलते थे बच्चे , तब टोकते थे बड़े , “ घास पर मत खेलो......घास पर मत खेलो !! ” अब भी तरस रहे हैं वे भी , कब बच्चे अपने कलरव से , घास को रौंदेंगे , और अपनी मखमली हंसी से , घास को और हरा कर देंगे ॥ अब इतिहास में दर्ज होगा एक ऐसा समय , जब संसार हैरान , कुछ हैरान....कुछ परेशान , पर फिर भी हैं सब एक साथ , चाहे वह दो हाथों की ताली हो , या फिर चम्मच और थाली हो , सलाम उनको जो खड़े हैं काल के सामने दीवार बनकर , अविचल....निष्कंप.....सामाजिक सरोकार बनकर , स्कूल हैं बंद , पढ़ाई है जारी , बाधाओं को ध...

मैं सपना देखती हूँ ऐसी धरा का

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https://youtu.be/SuI1Dxsjs8c मैं सपना देखती हूँ ऐसी धरा का मैं सपना देखती हूँ ऐसी धरा का, जहां लोग स्नेह-सूत्र में बंधे हों, जहां की मिट्टी प्रेम में पगी हो, और रास्ते शांति की अल्पना से सुसज्जित.....          मैं सपना देखती हूँ ऐसी धरा का, जहां सब आज़ादी से सांस लें, जहां अंतरात्मा की मिठास हो, जहां तेरे सुख में मेरा सुख हो, और जीवन विश्व कल्याण को अर्पित...... मैं सपना देखती हूँ ऐसी धरा का,                जहां सब समभाव से रहें,                      जहां दिलों में सद्भाव हो, धरती की संपदा के प्रति खिंचाव हो,              और जीवन कल्याण के लिए हो समर्पित......... मैं सपना देखती हूँ ऐसी धरा का, जहां हर कोई आज़ाद हो,                        मानवता जहां आबाद हो, कली कली जहां शाद हो,                  ...

पृथ्वी

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पृथ्वी  पृथ्वी कुछ कहना चाहती है हमसे, ये हवाओं की सरसराहट, ये पेड़ों पर फुदकते चिड़ियों की चहचहाहट, ये समुन्दर की लहरों का शोर, ये बारिश में नाचते सुंदर मोर, कुछ कहना चाहती है हमसे, पृथ्वी कुछ कहना चाहती है हमसे।। ये खूबसूरत चांदनी रात, ये तारों की झिलमिलाती बारात, ये खिले हुए सुंदर रंगबिरंगे फूल, ये उड़ती हुए धूल, कुछ कहना चाहती है हमसे, पृथ्वी कुछ कहना चाहती है हमसे।। ये नदियों की कलकल, ये मौसम की हलचल, ये पर्वत की चोटियाँ, ये झींगुर की सीटियाँ, कुछ कहना चाहती हैं हमसे, पृथ्वी कुछ कहना चाहती है हमसे।। आखिर क्या कहना चाहती है यह पृथ्वी ? इन हवाओं की सरसराहट को , पेड़ों पर फुदकटी चिड़ियों की चहचहाहट को, समुन्दर की लहरों के शोर को, बारिश में नाचते सुंदर मोर को , खूबसूरत चांदनी रात को, तारों की झिलमिलाती बारात को, खिले हुए सुंदर रंगबिरंगे फूल को, उड़ती हुई धूल को, नदियों की कलकल को, मौसम की हलचल को, पर्वत की चोटियों को, झींगुर की सीटियों को, बचा सको तो बचा लो अब भी, थोड़ा सा विश्वास  थोड़ी सी उम्मीद  थोड़े से सपने  थोड़े से अपने  क्योंकि अब ...

लॉकडाउन का दूसरा दिन 26.03.2020

लॉकडाउन का दूसरा दिन,26.03.2020 आज मुझे सुबह से ऐन की बहुत याद आ रही थी, अरे वही ऐन.ऐन फ़्रैंक..... द डायरी ऑफ यंग गर्ल वाली । ऐन क्यों याद आ रही थी मुझे ? यह समझ आ रहा था कि लॉक डाउन किसी अज्ञातवास जैसा ही है । मन में यह संवेदना उठ रही थी कि किस प्रकार से एन और उसके परिवार में 2 साल से भी अधिक का समय उस अज्ञातवास में काटा होगा, जहां युद्ध की विभीषिका, आतंक, भय, क्रंदन, डर और न जाने कितनी नकारात्मक स्थितियाँ रही होंगी । डर तो था हमें भी, कुछ आतंक भी, लेकिन युद्ध की विभीषिका इसमें नहीं थी। अभी ऐसा सोच ही रही थी कि हमारे घर के बाहर से महेश ने आवाज़ दी.... कूड़ा.... मैंने कहा... अरे भैया, अभी गेट खोलती हूं, तुम आ गए ? उसने कहा.... हम तो आवश्यक सेवाओं वाले हैं न मैडम....हमें तो आना ही था। मैंने कई बार महेश और उसके बेटों को घर के आसपास सफाई ढंग से ना करने पर, नाली साफ ना करने पर टोका है, कई बार उनको समझाया भी है,पर आज मुझे ये छोटी-छोटी बातें ओछी लगीं। देखो आज यह कर्मवीर की भांति आज मेरे घर पहुंच गया है । सच ही है कि कठिनाई के समय हम और मानव हो जाते हैं ।  व्हाट्सएप का स्टेटस बदल...

कोरोना वायरस के कारण पूरे भारत में 21दिनों का लॉकडाउन का पहला दिन-25.03.2020

भूमिका- 21 दिन के लॉकडाउन का पहला दिन..... मैं पिछले दिनों की बातों को याद करने लगी।19 मार्च 2020 को भारत सरकार के द्वारा एडवाइज़री जारी की गई थी, जिसमें लिखा था कि 22 मार्च 2020 को सभी भारतीय 'जनता कर्फ्यू' का पालन करेंगे । इस दौरान सभी लोग घर में रहेंगे । कोई बाहर नहीं निकलेगा और यह भी कहा गया था कि सब को एकजुट होकर कोरोनावायरस के बढ़ते हुए संक्रमण को रोकना है ।उस समय ऐसा लगा जैसे हम सब पूरे 135 करोड़ भारतीय अगर 22 मार्च 2020 को घरों में बंद रहेंगे, तो कोरोनावायरस का संक्रमण नहीं फैलेगा और हम उसे जीत लेंगे । इस एडवाइज़री में यह भी कहा गया था कि हम सभी शाम को 5:00 से लेकर 5:05 तक थाली, ताली या घंटी बजाएंगे और उन सभी आवश्यक सेवाएं देने वाले कर्मियों का आभार व्यक्त करेंगे विशेष तौर पर स्वास्थ्य कर्मी जिनमें डॉक्टर, नर्स,वॉर्ड ब्वॉय या हॉस्पिटल में काम करने वाले अन्य लोग, पुलिस कर्मी हर परिस्थिति पर निरंतर पर नजर बनाए रखते हैं और खाने पीने की वस्तुओं की दुकानों, दवाइयों की दुकानों पर काम करने वाले लोग और वे सभी लोग जो कोरोनावायरस के इस संक्रमण काल में हमें सुविधाएं और सा...

प्रस्तावना

और लोग घरों में बंद हो गए और लोग घरों में बंद हो गए,  कुछ ने किताबें पढ़नी शुरू कीं, कुछ कहानियां सुनने-सुनाने लगे, कुछ ने आराम किया,  कुछ ने चित्र बनाए,  कुछ पुराने खेल खेलने लगे,  कुछ ने…. ना...ना….  सबने जीवन का नया ढंग सीखा….. नया रंग सीखा….  लेकिन वे घर की चारदीवारी में बंद हो गए,  और लोग घरों में बंद हो गए।  कुछ ने गहराई से सोचा,  कुछ नहीं पाया प्रार्थना का मौका,  कुछ नाच गाने में सुकून ढूंढने लगे,  कुछ घर के भीतर ही अपने लोगों से मिलने लगे,  कुछ अपनी ही परछाइयों को गले लगाने लगे,  कुछ अंदर रोते ऊपर हंसी दिखाने लगे, कुछ सेवा भाव से मदद के लिए आगे आने लगे,  सारे गिले शिकवे गायब, धूमिल सब रंज हो गए,  और लोग घरों में बंद हो गए।  लिप्सा, जुगुप्सा, स्वार्थ, घृणा सब तिरोहित हो गए,  यह तेरा, यह मेरा, यह इसका, यह उसका,  कहाँ यह सब खो गए,  जब शीर्ष झुकने लगे, टूटने लगे,  सब द्वंद छोड़ 'विश्व बंधुत्व' में सब समाहित होने लगे,  जो तन क...