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Showing posts from July, 2021

गुरू.शिक्षक,अध्यापक से सुगमकर्ता तक का सफ़र

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  गुरू.शिक्षक , अध्यापक से सुगमकर्ता तक का सफ़र (गुरू पूर्णिमा पर विशेष) “गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्णु गुरूर्देवो महेश्वर: । गुरूः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरूवे नमः” संस्कृत में , गुरू का शाब्दिक अर्थ है अंधकार को दूर करने वाला।   मूलतः गुरू वह है , जो ज्ञान दे। संस्कृत भाषा के गुरू का अर्थ शिक्षक और उस्ताद से लगाया जाता है। इस आधार पर व्यक्ति का पहला गुरू माता-पिता को माना जाता है। दूसरा गुरू शिक्षक होता है , जो अक्षर ज्ञान करवाता है। उसके बाद कई प्रकार के गुरू जीवन में आते हैं जो बुनियादी शिक्षाएं देते हैं। "संरक्षक , मार्गदर्शक , विशेषज्ञ" सब गुरू के ही अनेकानेक रूप हैं । विश्वविजेता सिकंदर और सम्राट चन्द्रगुप्त के बीच का संघर्ष इन दो राजाओं का ही नहीं था , यह संघर्ष था दो महान गुरूओं की प्रज्ञा-चेतना का , दो महान गुरूओं के अस्तित्व का .......एक थे सामान्य किंतु विलक्षण , भारतीय युवा-गुरू , तक्षशिला-स्नातक ' चाणक्य ' और दूसरे थे यूनान के कुल-गुरू , राजवंशियों के गुरू ' अरस्तू ' ! परिणाम सामने था ! यहीं से पश्चिम के मन में भारतीय गुरू-परंप...

कारगिल विजय दिवस पर रण-बांकुरों को नमन

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  कारगिल विजय दिवस पर रण-बांकुरों को नमन जो भरा नहीं है भावों से , बहती जिसमें रस-धार नहीं। वह हृदय नहीं है पत्थर है , जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥       गया प्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ जी द्वारा रचित ये पंक्तियां हमें स्मरण करवाती हैं कि देशभक्ति , देश के प्रति प्यार और सम्मान की भावना है। देशभक्त अपने देश के प्रति निःस्वार्थ प्रेम तथा उस पर गर्व करने के लिए जाने जाते हैं। देशभक्ति की भावना लोगों को एक-दूसरे के करीब लाती है। किसी भी व्यक्ति का देश के प्रति अमूल्य और निःस्वार्थ प्रेम और भक्ति , देशभक्ति की भावना को परिभाषित करती है। जो लोग सच्चे देशभक्त होते हैं , वे अपने देश के प्रति अपने प्राणों को न्योछावर करने से पीछे नहीं हटते। देश की आज़ादी के बाद अनेक ऐसे अवसर आए जब भारतीय सेना ने अपने अदम्य साहस , पराक्रम और शौर्य का परिचय देते हुए दुश्मन के दाँत खट्टे किए हैं । ऐसा एक अवसर आया 1999 में , जब भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच लगभग 60 दिनों तक संघर्ष हुआ और 26 जुलाई के दिन उसका अंत हुआ और इसमें भारत को विजय प्राप्त हुई। इसी लिए भारत में प्रत्येक...

मूड : यह क्या बला है ?

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  मूड : यह क्या बला है ? आपने अक्सर लोगों के मुँह से सुना होगा: भई आज मूड नहीं है या आज मूड बहुत अच्चा है ।हर कोई मूडी हो जाता है। कुछ दिन आप दुनिया के शीर्ष पर महसूस करेंगे और अन्य दिनों में आपको दूना के नीचे रहने का मन करेगा। कभी-कभी उदास होना भी ठीक है। ज्यादातर लोग जानते हैं कि वे कब ' मूड में ' महसूस कर रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं ' मूड ' का मतलब क्या होता है ? या आपका मूड कहां से आता है ? या अपना मूड कैसे बदलें ? बस , एक मूड आपकी भावनात्मक लय का हिस्सा है , लेकिन एक भावना से थोड़ा कम तीव्र है। और इसमें आमतौर पर एक ट्रिगर होता है , जैसे कोई घटना या अनुभव। आप शायद जानते हैं कि जब आप सकारात्मक मूड में होते हैं तो आप अच्छा महसूस करते हैं (जैसे कि जब आप संतुष्ट , प्यार या उत्साहित महसूस करते हैं)। और आप शायद जानते हैं कि जब आप नकारात्मक मूड में होते हैं तो आप बहुत बुरा महसूस करते हैं (जैसे कि जब आप चिंतित , घृणा या नाराज़ महसूस करते हैं)। आपका मूड आपके लिए उपयोगी है। और वे इस बात का एक बड़ा हिस्सा हैं कि आप कैसे व्यवहार करना और सोचना चुनते हैं। एक नकारात...

हिंदी भाषा में सूचना प्रोद्योगिकी का प्रयोग

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  हिंदी भाषा में सूचना प्रोद्योगिकी का प्रयोग सूचना प्रोद्योगिकी क्या है ?               सूचना प्रौद्योगिकी का अर्थ है , सूचना का एकत्रीकरण , भंडारण , प्रोसेसिंग , प्रसार और प्रयोग। यह केवल हार्डवेअर अथवा सॉफ़्टवेअर तक ही सीमित नहीं है। बल्कि इस प्रौद्योगिकी के लिए मनुष्य की महत्ता और उसके द्वारा निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करना , इन विकल्पों के निर्माण में निहित मूल्य , यह निर्णय लेने के लिए प्रयुक्त मानदंड है कि क्या मानव इस प्रौद्योगिकी को नियंत्रित कर रहा है   और इससे उसका ज्ञान संवर्धन   हो रहा है। किसी भी क्षेत्र मे सूचना प्रोद्योगिकी का मतलब उन क्रिया-कलापों से हैं जो सूचना का उत्पादन , संग्रहण , आसवन , पुनर्मुद्रण , वितरण एवं सम्प्रेषण तकनीकी एवं प्रोद्योगिकी रूप मे किया जाए विशेषतः कंप्यूटर तकनीकी के माध्यम से | आवश्यकता क्यों ? बढ़ती हुई जागरूकता | कंटेंट (सामग्री) की   अनुपलब्धता | हिंदी की बहुआयामिता | उपभोक्ताओं तक पहुँच | हिंदी को तकनीकी भाषा बनाने में योगदान | सरकारी आ...