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Showing posts from May, 2022

CHILD PSYCHOLOGY:UNDERSTANDING DEVELOPMENTAL STAGES

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  CHILD PSYCHOLOGY: UNDERSTANDING DEVELOPMENTAL STAGES https://youtu.be/u_MEkXWscCk Imagine two children born in the same town and the same year to families with similar socioeconomic statuses. One child grows up to be assertive and confident, while the other grows up to be timid and shy. The study of the stages of human development can help explain the reasons for these differences and much more. What is human development, exactly? Human development is a branch of psychology with the goal of understanding people — how they develop, grow, and change throughout their lives. This discipline, which can help individuals better understand themselves and their relationships, is broad. As such, it can be used in various professional settings and career paths. What Are the Eight Stages of Human Development? If human development is the study of how people change throughout their lives, how and when does this development happen? Many scientists and psychologists have studied variou...

तुम क्या रोक सकोगे मुझको.....??

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  तुम क्या रोक सकोगे मुझको..... ?? झोली में कुछ सपने लेकर , सपनों में कुछ अपने लेकर , भरकर जेबों में आशाएं । दिल में अरमान हैं लहराएं … ।। माना सूरज-सा तेज़ नहीं मुझमें , पर दीपक भाता है मुझको.. अपना आंगन रौशन करने से , तुम क्या रोक सकोगे मुझको..... तुम क्या रोक सकोगे मुझको..... ?? मैं उस माटी का वृक्ष नहीं , जिसको नदियों ने सींचा है… बंजर माटी में पलकर मैंने , मृत्यु से जीवन खींचा है… । मैं पत्थर पर लिखी इबारत हूँ .. शीशे से तोड़ सकोगे मुझको ? मिटने वाला मैं नाम नहीं… तुम क्या रोक सकोगे मुझको..... तुम क्या रोक सकोगे मुझको..... ?? इस जग में जितने ज़ुल्म नहीं , उतने सहने की ताकत है …. तानों   के भी शोर में रहकर , सच कहने की आदत है ।। मैं सागर‌-सम गहरी हूँ… क्या कंकड़ से पाट सकोगे मुझको ? निर्भीक आगे बढ़ती मैं जाती , तुम क्या रोक सकोगे मुझको..... तुम क्या रोक सकोगे मुझको..... ?? झुक-झुककर सीधी खड़ी हुई , अब रीढ़ मेरी सीधी है , अपने ही हाथों रची स्वयं.. मैंने अपनी अमिट परिधि है। तुम हालातों की भट्टी में… झोंक सकोगे क्या मुझको ? ...

शब्दों से आगे-बॉडी लैंग्वेज

  शब्दों से आगे-बॉडी लैंग्वेज शारीरिक भाषा या बॉडी लैंग्वेज अमौखिक संचार का एक रूप है जिसे शरीर की मुद्रा , चेहरे की अभिव्यक्ति , इशारों और आँखों की गति के द्वारा व्यक्त किया जाता है। मनुष्य अनजाने में ही इस तरह के संकेत भेजता भी है और समझता भी है। अक्सर कहा जाता है कि मानव संचार का 93% हिस्सा शारीरिक भाषा और पराभाषीय संकेतों से मिलकर बना होता है , जबकि शब्दों के माध्यम से कुल संचार का 7% हिस्सा ही बनता है । लेकिन अनुसंधान के आधार पर संचार में छिपे अर्थों का 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा अमौखिक व्यवहार से प्रकट होता है। शरीर की भाषा किसी के रवैये और उसकी मनःस्थिति के बारे में संकेत दे सकती है। उदाहरण के लिए , यह आक्रामकता , मनोयोग , ऊब , आराम की स्थिति , सुख , मनोरंजन सहित अन्य कई भावों के संकेत दे सकती है। शारीरिक अभिव्यक्ति शारीरिक अभिव्यक्तियाँ जैसे कि हाथ हिलाना , उंगली से इशारा करना , छूना और नज़र नीचे करके देखना ये सभी अमौखिक संचार के रूप हैं। शरीर की गति और अभिव्यक्ति के अध्ययन को काइनेसिक्स या गतिक्रम विज्ञान कहते हैं। जब मनुष्य कुछ कहता है , तो साथ ही अपने शरीर क...

अब और नहीं

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  राष्ट्रीय आतंकवाद निषेध 21 मई के अवसर पर विशेष.... अब और नहीं बहुत बिछा ली लाशें तुमने , बस..बस... और नहीं...अब और नहीं। कहीं कोई रूदन , कहीं कोई सिसकती बच्ची , कहीं ज़ख्मों से टपकता खून , कहीं सुलगते घाव , कहीं नफ़रतों के जुनून । बहुत बिछा ली लाशें तुमने , बस..बस... और नहीं...अब और नहीं। आज कोमल कंठ ने आग है उगली , आग ऐसी कि बर्फ़ भी पिघली लावा बन कर नष्ट कर रही मानवता की आह है निकली। तुम मरो या हम मरें हिंदू मरे या तुर्क मरे रूसी मरे या यूक्रेनी मरे तो केवल मानव मरे। बहुत बिछा ली लाशें तुमने , बस..बस... और नहीं...अब और नहीं। खून-खून में फ़र्क करोगे कैसे ? सबका रंग एक-सा लगे... चेहरे पर पुती मिट्टी एक-सी लगे... फिर कौन है अलग ? कौन है जुदा ? और मरता कौन है ? मरता तो मानव ही है मरती है मुर्रव्वत , इंसानियत , आदमीयत , मरती तो मुहब्बत ही है। बहुत बिछा ली लाशें तुमने , बस..बस... और नहीं...अब और नहीं। मीता गुप्ता