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Showing posts from June, 2022

नशे में घुलता युवा भारत

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  अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस (26 जून) पर विशेष नशे में घुलता युवा भारत नशा एक ऐसी बुराई है जो हमारे समूल जीवन को नष्ट कर देती है। नशे की लत से पीड़ित व्यक्ति परिवार के साथ समाज पर बोझ बन जाता है। युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा नशे की लत से पीड़ित है। सरकार इन पीड़ितों को नशे के चुंगल से छुड़ाने के लिए नशा मुक्ति अभियान चलाती है , शराब और गुटखे पर रोक लगाने के प्रयास करती है। नशे के रूप में लोग शराब , गाँजा , जर्दा , ब्राउन शुगर , कोकीन , स्मैक आदि मादक पदार्थों का प्रयोग करते हैं , जो स्वास्थ्य के साथ सामाजिक और आर्थिक दोनों लिहाज से ठीक नहीं है। नशे का आदी व्यक्ति समाज की दृष्टी से हेय हो जाता है और उसकी सामाजिक क्रियाशीलता शून्य हो जाती है , फिर भी वह व्यसन को नहीं छोड़ता है। ध्रूमपान से फेफड़े में कैंसर होता हैं , वहीं कोकीन , चरस , अफीम लोगों में उत्तेजना बढ़ाने का काम करती हैं , जिससे समाज में अपराध और गैरकानूनी हरकतों को बढ़ावा मिलता है। इन नशीली वस्तुओं के उपयोग से व्यक्ति पागल और सुप्तावस्था में चला जाता है। तम्बाकू के सेवन से तपेदकि , निमोनिया और साँस की बीमारियों का सामना...

डैडी, क्या लिखूं आपके लिए ?

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  डैडी , क्या लिखूं आपके लिए? डैडी , क्या लिखूं आपके लिए ? डैडी , क्या लिखूं आपके लिए ? , कभी जो समझ ना आए , आया बस इतना ही समझ , करते रहे समझौते , हमारे लिए , अपनी ख़ुशियों का , अपनी इच्छाओं का , करते रहे दमन , पता नहीं कैसे कंधे थे , कभी थकते ही नहीं थे , बोझ उठाते , डैडी , पीते रहे हलाहल , शिव की तरह , कल्याण हेतु करने को , उत्सर्जन प्राण सतत । जब डांटते थे , तो लगता था बुरा , कि क्यों टोकते थे हर बात पर ? ज़रा सी ग़लती पर , देते थे इतनी सज़ा , थे कितने निष्ठुर ? कभी नहीं आती थी क्या दया ? आख़िर हमारी इच्छाओं का , नहीं है कोई मूल्य , हर बात में निर्णय , क्या उन्हीं का अधिकार था ? उनके अपने सपनों को , पूरा करने का माध्यम , क्या हम हैं ? इन सारे सवालों का , जवाब ढूंढ़ते-ढूंढते , बीत गया बचपन , संघर्ष के युवा दिनों में , जब संकल्पों को तोड़ने , आईं आंधियां , तब समझ आया कि क्यों सिखाया था निष्ठुर संसार से लड़ना क्यों अपनी डांट के , रक्षा कवच से , बनाया था इतना मज़बूत , वह उनकी निष्ठुरता नहीं थी , ...

पुस्तक समीक्षा: गीतांजलि श्री द्वारा रचित ‘रेत समाधि’

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  पुस्तक समीक्षा : गीतांजलि श्री द्वारा रचित ‘ रेत समाधि’-लेखन की हर सरहद को तोड़ता उपन्यास   ‘ रेत समाधि’ , (Tomb of Sand) देश दुनिया में छाया यह उपन्यास हिंदी के पाठकों की रुह से नाता जोड़ लेता है। गीतांजलि श्री ( Geetanjali Shri) द्वारा हिंदी में लिखे गए इस उपन्यास का अंग्रेजी अनुवाद   ‘ टूम्ब ऑफ सैंड’ , इंटरनेशनल बुकर सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह हिंदी साहित्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।   हिंदी की अमूमन लिखाइयों में किसी नए क्राफ्ट , नए शिल्प या बुनाई के खेल कम ही होते हैं। लेकिन इस किताब को सब बंधन को तोड़ देने के बाद ऐसे लिखा गया है जैसे कि मन सोचता है। कोई किताब आपको पुराने दिनों की दुनिया में झम्म से ले जाए , वही दरवाज़ा , वही लड़की-लड़कौरी-सी अम्मा , जिनके बूढ़े बदन में पंद्रह साला लड़की बसे। जो चलते न चलते झपाझप कूदने-उड़ने लगे और आप अम्मा बन जाएं और अम्मा बन जाए किशोरी। इस उलट झापे में जीवन रिवाइंड हो , कि चलो एक बार फिर बीतते हैं , कि पहली दफ़ा कुछ चूक-सी रह गई थी , कुछ जल्दीबाज़ी भी , अब इस बार ज़रा फिर से करते हैं जीवन के...

हम अपनी दुनिया के सिकंदर

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  हम अपनी दुनिया के सिकंदर विश्व बाल श्रम दिवस 12 जून को मनाया जाता है , बाल श्रम के खिलाफ बढ़ते विश्वव्यापी आंदोलन के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में मनाया जाता है। विश्व बाल श्रम दिवस 2022 की थीम- "बाल श्रम को समाप्त करने के लिए सार्वभौमिक सामाजिक संरक्षण"   पिछले दिनों यात्राओं का दौर रहा। बहुत से   स्टेशन , बहुत सी ट्रेन और बहुत सी भीड़। हाँ , बहुत-सी पटरियाँ और सबसे ख़ास प्लेटफ़ॉर्म पर दौड़ते-भागते चाय वाले , समोसे वाले पानी से भरी बोतल वाले और भी बहुत सी चीज़ों को बेचने वाले ,….. और इनमें से अधिकतर बच्चे। मुझे ना जाने क्यों ये बच्चे प्लेटफ़ॉर्म के हीरो लगते हैं। ये कभी प्लेटफार्म को बेरौनक नहीं होने देते। असली भारत , असली ज़िंदगी इन स्टेशनों पर ही दिखती है।       ट्रेनों को तो जैसे फ़ुर्सत ही नहीं मिलती जीवन-भर। जीवन भर चलती है। फिर भी कभी कहीं नहीं पहुँचती। ज़रा देर रुकी , फिर चल दी। शोर मचाती ट्रेनें , आती-जाती ट्रेनें। खुद में लोगों को समेटे। खुद में भर कर …. समा कर …. ये दौड़ती रहती हैं। हैरान-परेशान सी भीड़ को भी चैन...

चलो निकालें हफ़्ते में एक दिन!

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  चलो निकालें हफ़्ते में एक दिन!   चलो निकालें हफ़्ते में एक दिन, जिसमें खुद का साथ हो, बस खुद से ही बात हो, चाहे दिन या रात हो, कैसे भी हालात हों ! चलो निकालें हफ़्ते में एक दिन, लफ्जों पर हो कई सवाल, यह दुनिया है या माया का जाल? क्या पाया क्या खोया इस साल? खुद से पूछें खुद का हाल!   चलो निकालें हफ़्ते में एक दिन, पूछें, कितना प्यार खुद से किया? कितना दर्द गैरों को दिया? कितना खुलकर है जिया? कितनों का है हक लिया?   चलो निकालें हफ़्ते में एक दिन, आईने के सामने बैठें एक बार, थोड़ी देर के लिए छोड़ें श्रृंगार, जाने कैसे हैं हमारे आचार विचार? क्या बाकी है हम में शिष्टाचार?     चलो निकालें हफ़्ते में एक दिन, जानें, खुद को क्या है गम? किसे ढूंढते हैं हम हरदम? क्या सही चल रहे हैं हमारे कदम? कैसा महसूस कर रहे हैं हम?   चलो निकालें हफ़्ते में एक दिन,पूछें क्या हमसे यह जमाना है? जहां हर कोई बेगाना है, बस धन दौलत ही कमाना है, और इस दुनिया से एक दिन खाली हाथ जाना है!   चलो निकालें हफ़्ते में ए...

content and time management

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  What is content and time management? Time management means organizing your time intelligently – so that you use it more effectively. The benefits of good time management include greater productivity, less stress, and more opportunities to do the things that matter 5 key elements of time management •       Be intentional: keep a to-do list. Drawing up a to-do list might not seem like a ground breaking technique, but it's one of the most powerful ways to become more productive. ... •       Be prioritized: rank your tasks. ... •       Be focused: manage distractions. ... •       Be structured: time block your work. ... •       Be self-aware: track your time. 4 types of time management? The 4 Ds are: Do, Defer (Delay), Delegate, and Delete (Drop). Placing a task or project into one of these categories helps you manage your limited time more ef...