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Showing posts from August, 2024

कारगिल दिवस पर शहीदों को नमन

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 कारगिल दिवस पर शहीदों को नमन वीर जवानों के लहू से रंगी है धरा, कारगिल के शौर्य से गर्व है हमें प्यारा। हिमपात से घिरे वीरता की चोटी, बह रही थी वहां देशभक्ति की धारा। दुश्मन के सामने बढ़े वीर सिंह, आँखों में चमक, हौसले का वीर रंग। धरती थम गई देखकर उनका बलिदान, पूरे राष्ट्र हुआ प्रेरित-गौरवान्वित-दंग। शौर्य और साहस का उदाहरण थे वे, कारगिल में दिखालाया सर्वोच्च बलिदान। श्रद्धांजलि उन्हें, जिन्होंने अर्पित किया जीवन, याद रहेंगे वे सदा, नमन करता विहान। उनके परिवारों को भी विनम्र भावांजलि, जिनके बलिदान ने नया रचाइतिहास । कारगिल के शहीदों को करें नमन हम, बलिदान ही था उनका हास-विलास। वीरता के जज़्बे से सजी है यह धरा, कारगिल के शौर्य पर गर्व, करते अभिनंदन। धरती मां की धूल सजा भाल पर, शहीदों को करें नमन, बार-बार वंदन। उनका सम्मान करें, सत्कार करें हम, फैलाएं-सुनाएं शहीदों की अमर गाथा। पृथ्वी ने लालायित-आह्लादित होकर, चूम लिया जिनका उज्ज्वल माथा। वीर जवानों के लहू से रंगी है यह धरा, कारगिल के शौर्य से पगी है यह धरा। नभ पर फहरती है उनकी आन-बान-शान, केसरिया रंग से सजी-संवरी यह धरा। आइए, श्रद्धा...

उत्तम प्रदेश-उत्तर प्रदेश हूँ मैं

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  उत्तम प्रदेश-उत्तर प्रदेश हूँ मैं   हां जी, उत्तम प्रदेश-उत्तर प्रदेश हूँ मैं त्रेता में श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या हूँ मैं द्वापर में श्रीकृष्ण की तपोभूमि मथुरा हूँ मैं बाबा विश्वनाथ की काशी, तीर्थराज प्रयागराज हूँ मैं सात अजूबों में आगरा का ताजमहल‌ हूँ मैं।।   उत्तर में हिमालय दक्षिण में विंध्य हूँ मैं मध्य गंगा यमुना शस्य श्यामला हूँ मैं यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज फतेहपुर सीकरी हूँ मैं पुरा पाषाणिक अस्थिनिर्मित स्त्री बेलन घाटी हूँ मैं हड़प्पा का पूर्वी छोर आलमगीरपुर हूँ मैं||   बुद्ध का प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ हूँ मैं , तो महापरिनिर्वाण‌ कुशीनारा हूँ   मैं अशोक स्तंभ सिंह चतुर्मुख सारनाथ हूँ मैं तो नेपोलियन समुद्र गुप्त का प्रयाग प्रशस्ति हूँ देवगढ़ का दशावतार मंदिर व कन्नौज हूँ मैं।।   रामानंद का वैष्णववाद हूँ मैं कबीर का सर्वधर्म एकात्मवाद हूँ मैं साहित्य में तुलसी , सूर , कबीर की भूमि हूँ मैं प्रेमचंद , पंत निराला फिराक , वसीम, शकील हूँ मैं तो आगरा किला , फतेहपुर सीकरी हूँ मैं।।   बंगाल...

भारतीय संस्कृति की पोषक है हिंदी

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  भारतीय संस्कृति की पोषक है हिंदी भाषा संस्कृति का स्पंदन भी होती है और संवाहक भी | भाषा भावों और विचारों की वाहक होती है जिसके माध्यम से मनुष्य परस्पर व्यवहार करने में सक्षम होते हैं। मानव द्वारा संचालित सृष्टि के सभी कार्यों में भाषा की भूमिका सर्वोत्तम मानी गई है और यह एक आधारभूत सच्चाई है कि जिस भी भाषा को मनुष्य अपने परिवेश से सहज रूप में अपना लेता है , वह कोई जन्मजात प्रवृत्ति नहीं होती और न ही उसके या उसके तत्कालीन जनसमुदाय द्वारा रची गई भाषा होती है , वह भाषा तो युग - युगांतरों से जन समूहों के सांस्कृतिक व सभ्याचारिक संदर्भों से निर्मित होती है और उस समाज के विकास के साथ - साथ ही विकसित होती जाती है। यही कारण है कि जो समाज जितना अधिक विकसित होता है उस समाज की भाषा उतनी ही उन्नत होती है अथवा यह भी कहा जा सकता है कि किसी समाज के विकास की पहचान उसकी भाषा से की जा सकती है। वस्तुतः संस्कृति भाषा के विकास का मूलाधार...