देश से प्यार

 

देश से प्यार



जिसे देश से प्यार नहीं हैं

जीने का अधिकार नहीं हैं।

 

जीने को तो पशु भी जीते

अपना पेट भरा करते हैं

कुछ दिन इस दुनिया में रह कर

वे अन्तत: मरा करते हैं।

ऐसे जीवन और मरण को,

भाता यह संसार नहीं है

जिसे देश से प्यार नहीं हैं

जीने का अधिकार नहीं हैं।

 

मानव वह है स्वयं जिए जो

और दूसरों को जीने दे,

जीवन-रस जो खुद पीता वह

उसे दूसरों को पीने दे।

साथ नहीं दे जो औरों का

क्या वह जीवन भार नहीं है?

जिसे देश से प्यार नहीं हैं

जीने का अधिकार नहीं हैं।

 

साँसें गिनने को आगे भी

साँसों का उपयोग करो कुछ

काम आ सके जो समाज के

तुम ऐसा उद्योग करो कुछ।

क्या उसको सरिता कह सकते

जिसमें बहती धार नहीं है ?

जिसे देश से प्यार नहीं हैं

जीने का अधिकार नहीं हैं।

 

डॉ मीता गुप्ता

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