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Showing posts from February, 2023

वैश्विक समाज के लिए वैश्विक विज्ञान

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  वैश्विक समाज के लिए वैश्विक विज्ञान आधुनिक युग में, यदि गौर किया जाए, तो विज्ञान सबसे बड़ा सामूहिक प्रयास है। यह एक लंबे और स्वस्थ जीवन को सुनिश्चित करने में योगदान देता है , हमारे स्वास्थ्य की निगरानी करता है , हमारी बीमारियों को ठीक करने के लिए दवा प्रदान करता है , दर्द को कम करता है , हमें भोजन सहित हमारी बुनियादी ज़रूरतों के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद करता है , ऊर्जा प्रदान करता है और खेल सहित जीवन को और अधिक मज़ेदार बनाता है , संगीत , मनोरंजन और नवीनतम संचार प्रौद्योगिकी, और न जाने किस-किस क्षेत्र में यह हमें संबल देता है| यह कहना सत्य होगा कि विज्ञान हमारी आत्मा का पोषण करता है। विज्ञान रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए समाधान उत्पन्न करता है और ब्रह्मांड के महान रहस्यों का जवाब देने में हमारी मदद करता है। दूसरे शब्दों में , विज्ञान ज्ञान के सबसे महत्वपूर्ण माध्यमों में से एक है। इसकी एक विशिष्ट भूमिका है , साथ ही हमारे समाज के लाभ के लिए विभिन्न प्रकार के कार्य हैं: नया ज्ञान बनाना , शिक्षा में सुधार करना और हमारे जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि करना। विज्ञान सामाजिक ज़रूरतों और व...

कैसे रखें मन को शांत?

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    कैसे रखें मन को शांत ?   अपने भीतर निरंतर बह रही रूह की आवाज से कभी कभी ऐसे भी क्षण आते हैं जब आप अपने से ही एक प्यारी - सी मुलाकात कर पाते हैं।   जीवन में बहुत कुछ है ,  लेकिन मन अशांत है तो व्यक्ति को किसी चीज़ से ख़ुशी नहीं मिल सकती है। इसलिए भागते-दौड़ते संसार के संग भागती-दौड़ती ज़िंदगी में ख़ुद को कैसे शांत रखा जाए ,  आइए जानते हैं... प्रकृति से सीखिए शांत रहने का सबक़ बाहर होने वाले शोर के समान ही अंदर विचारों का शोर रहा करता है। बाहर होने वाली शांति के समान ही अंदर शांति रहा करती है। आपके आसपास जब कभी भी थोड़ी-सी भी शांति हो ,  ख़ामोशी हो तो उस पर पूरा ध्यान दीजिए। बाहर की ख़ामोशी को सुनना आपके अंदर की शांति को जगा देता है क्योंकि केवल शांति के माध्यम से ही आप ख़ामोशी को जान सकते हैं। इस बारे में सावधान रहिए कि जब आप अपने आसपास की ख़ामोशी पर ध्यान दे रहे हों तब आप कुछ भी न सोच रहे हों। कभी किसी पेड़ ,  फूल या पौधे को देखिए। वे कितने शांत रहते हैं। शांत रहने का सबक़ प्रकृति से सीखिए। शायद इसीलिए पंत जी...

शौक है, तो ज़ौक है

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शौक है, तो ज़ौक है विन्सेन्ट प्राइस ने एक स्थान पर कहा था , "एक आदमी जो अपने शौक (रुचियों) को सीमित करता है , वह अपने जीवन को सीमित करता है।" एक बच्चे के रूप में , मैं सदैव कुछ-न-कुछ करती रहती , मानो शरीर में कोई थिरकन-सी हो, कोई मृदंग-सा बजता हो, जैसे सब कुछ सीख लेना चाहती थी, कभी यह,तो कभी वह...चित्रकारी के साथ खेल, कपड़े सिलना सीखने के साथ हैंडी क्राफ्ट, गाने के साथ नाचना, और न जाने क्या-क्या ?( यह मत पूछिएगा कि मैं क्या सीख पाई, या क्या नहीं?) मैं अपने माता-पिता , शिक्षकों और किसी के लिए भी एक चुनौती थी, क्योंकि मुझे बहुत कुछ चाहिए था और जब वह मिल जाता, तो कुछ और चाहिए था,उन्हें मेरी बहुत देखभाल करनी पड़ती थी। एक साल , स्कूल में मेरी व्यवहार मूल्यांकन रिपोर्ट में कहा गया, "बहुत कुछ सीखा, पर बहुत कुछ सीखना बाकी है।" अपनी किशोरावस्था के दौरान , मैं अचानक शांत होने लगी। लेकिन मेरा मन शांत नहीं हुआ, उसमें अभी भी बहुत कुछ करने-सीखने की लालसा है। किसी भी समय जब मेरे पास कुछ मिनट होते हैं , कार में या कतार में प्रतीक्षा करते समय , उदाहरण के लिए , मैं अपना फोन निक...

मेरा तो रब खो गया

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  मेरा तो रब खो गया उस दिन पूरे घर में कोहराम मचा हुआ था। दादी परेशान थी , हैरान थी , रुआंसी हो उठी थी। उनके ठाकुर जी की बंसी खो गयी थी। ठाकुर जी को तो कोई चिंता नहीं थी पर दादी बहुत दुखी थी। बहरहाल थोड़ी देर बाद   बंसी मिल ही गयी। दादी इतनी खुश की जैसे ठाकुर जी ने दर्शन दे दिए हों। रोज़मर्रा के काम और जल्दबाजी में अक्सर किसी न किसी   का कुछ न कुछ खो ही जाता। माँ , अक्सर अपनी अलमारी की चाबी खो जाने पर परेशान हो जाती। पिताजी के प्राण उनकी कलम में बसते। भाई की जान गाडी़ की चाबी में , तो बहन की साँस मोबाईल में। इन सब चीजों को ये कभी आँखों से ओझल नहीं करते , और जो ये इनकी प्रिय वस्तु खो जाए तो... इनकी दुनिया ही बेकार हो जाए। यानी सबने अपने-अपने रब बना लिए है , अपनी सुविधा , ज़रुरत और ख़ुशी के लिए अपने -अपने खुदा गढ़ लिए हैं।   अपने खुदा , जिन्हें पाकर , जिन्हें पास रखकर वो खुश हैं। जैसे   किसी व्यापारी को नोटों की हरियाली में ईश्वर दिखता है , किसी सुंदर महिला को आईना ही खुदा जैसा दिखता है , किसी प्रेमी को अपनी   प्रियतमा में। किसी दिन इनकी   ये प्रिय चीज ...

गज़ल

  हँसी-खुशियों से सजी हुई जिन्दगानी चाहिए । सबको जो अच्छी लगे ऐसी रवानी चाहिए । वक्त   के संग बदल जाता सभी कुछ संसार में। जो न बदले याद को ऐसी निशानी चाहिए ।   नजरे हो आकाश पै पर पैर धरती पर रहे हमेशा हर सोच में यह सावधानी चाहिए । हर नए दिन नई प्रगति की मन करे नई कामना निगाहों में किन्तु मर्यादा का पानी चाहिए ।   मिल सके नई उड़ानों के जहाँ से सब रास्ते सद्विचारों की सुखद वह राजधानी चाहिए । बाँटती हो जहाँ सबको खुशबू अपने प्यार की भावना को वह महकती रातरानी चाहिए ।   हर अँधेरी समस्या का हल , सहज जो खोज ले बुद्धि बिजली को चमक वह आसमानी चाहिए । मन ‘ मीत’ निराश न हो , और हो समन्वित भावना देश को जो नई दिशा दे वह जवानी चाहिए ।। . जग में सबको हँसाता है औ ' रूलाता है वक्त । सुख औ ' दुख के चित्र रचता औ ' मिटाता है वक्त । है चितेरा वक्त   ही संसार के श्रृंगार का नई खबरों का सतत हरकारा है वक्त ।   बदलती रहती ए   दुनिया वक्त   के सहयोग से आशा की पैगों पे सबको नित झुलाता है वक्त । नियति को , श्रम को , प्र...