स्नेह का समंदर

 स्नेह का समंदर 


सुबह-सुबह

पार्क में दो वृद्ध महिलाएँ मिलीं

परस्पर गले लगीं

हाल-चाल पूछा

फिर एक-दूसरे के बच्चों के बारे में बात की

दोनों ने बताया-

अपने-अपने परिवारों के साथ

परदेश में खुशहाल हैं बच्चे

कुछ घड़ी वे एक-दूसरे का हाथ थामे मौन रहीं

फिर बोली-

हर रोज वीडियो कॉल पर

बात हो जाती है

इतना क्या कम है?

दोनों महिलाओं के सामने

स्नेह का समंदर था

जिसमें अपार जल ही जल 

लहरा रहा था चहुँ ओर

ऐसा जल

जिसे देख तो सकते थे

लेकिन!

प्यास लगने पर 

पी नहीं सकते थे।


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