वंदे मातरम

 


वंदे मातरम — वीरों का वंदन

वंदे मातरम, तेरी माटी का हर दाना गीत हो गया,
जिसने जिये, जिसने जिया — सबका धागा तुझ में सींचा गया।

तू माँ है, तू शहीदों की स्याही से लिखी हुई पुस्तक,
हर पन्ने पर खून का तोता, हर शब्द में उनका संघर्ष मुख।

खेतों की हर लहर में उनका कदम गूंजता है,
नदियों की रवानी में उनकी आवाज़ अनवरत बसती है।

किले की दीवारों पर ठहरती वीर गाथाएँ बोलें,
बुज़ुर्गों की दुपट्टियों में धैर्य के दीपक जले।

चिरकाल से चले जो वनदेव हैं, उन्होंने शपथ ली,
आज भी उनकी नज़रें सीमा पर, चौकसियाँ अनंत ली।

नन्हे कदमों से बढ़ते युवा — उनके विचारों में आग,
झंडे की छाया में उठता नमन, हर दिल में अभिमान काraag।

वंदे मातरम — तेरा नाम वीरों की श्वास में बसा,
उनकी हिम्मत, उनका बलिदान — तुझे अटूट कर गया।

आओ, वचन लें हम सब मिल कर, भर दें नयी उर्जा इस धरा में,
वंदे मातरम, तेरे लिये हम उठें — सत्य, सेवाभाव और प्रेम का पथ चला में।

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