ये कौन चित्रकार

 
ये कौन चित्रकार



ये कौन चित्रकार है जिसने किरणों से सुबह रंग दी,
फूलों की तासीर में चुपके से मुस्कान संग दी।

किसने नदी के मृदु गीत में चाँद का दर्पण बुन डाला,
पतझड़ की खामोशी में भी हर पत्ता प्रेम का सन्देश पाला।

पेड़ों ने अपनी छाया में बच्चों के स्वप्न पलाये,
हवा ने उनकी हँसी से आसमान के जज़्बात जलाये।

पहाड़ों ने ठहराव सिखाया, नदियों ने बहना सिखाया,
इंसान ने देखा और अपने भीतर का आँगन संवार लाया।

बारिश ने मिट्टी को महका दिया, खुशबू से घर भर दिया,
मनुष्य ने हाथ जोड़ कर माना — यही तो उसका घर-परिवार दिया।

रात ने तारों के मोती मढ़े, सुबह ने उम्मीद की चादर फैलाई,
प्रकृति ने हर रूप में कहा — तू मेरा साथी, तू मेरा ईनाम पाई।

तो यह वही चित्रकार है जिसने जीवन को रंगों से पिरोया,
हम उसके हर स्पर्श में सजे—उसके प्रेम से अपना चेहरा ढोया।

Comments

Popular posts from this blog

यूँ ही कोई मिल गया सीज़न-2

पल पल दिल के पास, वो रहता है...

जनरेशन अल्फ़ा और सिक्स-पॉकेट सिंड्रोम