खुद ही अपनी शक्ति बन

 मत करना इंतज़ार तू, कोई आए साथ।

खुद ही अपनी शक्ति बन, खुद लिख अपनी बात॥





पिता, बंधु या संगिनी, दें चाहे आशीष।

संकट में संबल बने, अपना ही मन-शीश॥

हिम्मत का दीपक जला, भर अपनी औकात—

खुद ही अपनी शक्ति बन, खुद लिख अपनी बात॥


शिक्षा सबसे श्रेष्ठ धन, देती नई उड़ान।

इसके बल पर जीत ले, जीवन का मैदान॥

ज्ञान बने जब सारथी, खुल जाएँ सब पाट—

खुद ही अपनी शक्ति बन, खुद लिख अपनी बात॥


नारी केवल नाम नहीं, साहस की पहचान।

अंतर की दृढ़ चेतना, उसका है सम्मान॥

स्वाभिमान की ज्योति से, जगमग हो हर रात—

खुद ही अपनी शक्ति बन, खुद लिख अपनी बात॥


जो खुद अपने पथ चले, रोके किसकी रीत।

संघर्षों की धूप में, खिलती जीवन-प्रीत॥

मेहनत ही तक़दीर है, कर्मों की सौगात—

खुद ही अपनी शक्ति बन, खुद लिख अपनी बात॥


आँधी चाहे लाख हो, मत होना लाचार।

दृढ़ संकल्पों के बल पर, जीत मिले हर बार॥

हौसलों के पंख ले, छू ले नभ की छात—

खुद ही अपनी शक्ति बन, खुद लिख अपनी बात॥


खुद को इतना गढ़ सखी, बढ़े अटल विश्वास।

अपने हक़ की लड़ सके, यही सफलता-आस॥

'सौरभ' नारी शक्ति से, उज्ज्वल हो हर प्रात—

खुद ही अपनी शक्ति बन, खुद लिख अपनी बात॥

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