EPISODE-10 कोई ये कैसे बताए.. 22/05/26

EPISODE  10

कोई ये कैसे बताए.. 22/05/26

INTRO MUSIC

नमस्कार दोस्तों! मैं मीता गुप्ताएक आवाज़एक दोस्तकिस्से  कहानियाँ सुनाने वाली आपकी मीत। जी हाँआप सुन रहे हैं मेरे पॉडकास्ट, ‘यूँ ही कोई मिल गया’ के दूसरे सीज़न का अगला एपिसोड ... जिसमें हैंनए जज़्बातनए किस्सेऔर वही पुरानी यादें...उसी मखमली आवाज़ के साथ...। जी हाँ दोस्तोंआज हम बात करेंगे, तनहाई की, अकेलेपन की, एकाकीपन की! अरे भई! दुनिया लोगों की भीड़ से भरी हुई है, फिर भी तुम तनहा क्यों हो? आखिर क्या वजहें हो सकती हैं हमारे तनहा होने की, या फिर उस बेबसी की, कि बताया भी न पाएँ कि तनहा क्यों हैं?

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दोस्तों! आज मुझे कैफ़ी साहब की वह मशहूर ग़ज़ल याद आ रही हैजिसके बोल हैं   कोई ये कैसे बताए केवो तनहा क्यों हैसच मेंजब  जब यह ग़ज़ल सुनती हूँसोचने पर मजबूर हो जाती हूँ कि वो जो अपना था, वो ही आज किसी और का क्यों हैया फिर कि यही दुनिया है तो फिरऐसी ये दुनिया क्यों है?

यही होता है तो आख़िरयही होता क्यों है?

चलिएआज चर्चा करते हैं, मेरे एक मित्र कीजो एक दिन बड़े परेशान  हैरान से होकर मेरे पास आए और कहने लगे कि आजकल बहुत दुखी हूँ। ज़िंदगी में कुछ रास ही नहीं आ रहाकोई रस ही नहीं रह गया। कइयों से प्रेम कियापर  हमेशा नाकामी ही मिली। मैंने मन ही मन सोचाकइयों से प्रेम किया!  यह क्या हैवे कहने लगे कि दर्द और दुख जैसे मेरे जीवन के हिस्से बन गए हैंप्रेम खोजने गया था,  पर देखो न..दुख ही मिला। मैंने कहा कि अब की बार दर्द खोजने जानातो यकीनन प्रेम मिल जाएगा। सच ही है न दोस्तोंआप हमेशा प्रेम और खुशी ही खोजते हैंइसलिए दर्द पीछे पड़ा रहता हैइस बार दर्द की खोज करेंगेतो यकीननप्रेम मिलेगा। आप किसी का प्रेमकिसी का दर्द महसूस तो कीजिएप्रेम खुद ब खुद खिंचा चला आएगा। दोनों मानो एक ही गाँव मेंएक ही बरगद की छाँव में रहते हैं। एक को आवाज़ दोतो दूजा संग आ जाता है। खुशी और गमदर्द और चैनदोनों एक दूसरे के ही हिस्से हैंमानो एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। आप खुशी को अपनाने जाएँगेतो गम खुद ही बिना बुलाए चला आएगाजैसे दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे हों। दरअसलहम सभी सिर्फ़ खुशी चाहते हैंखुश होना चाहते हैंहँसना चाहते हैं। कोई भी नहीं चाहता कि उसका वास्ता आँसुओं से पड़े। हम ताउम्र खुश होने की तीव्र इच्छा में न जाने कितनों को दुखी किए जाते हैंलेकिन यदि हम सभी के हिस्से में खुशियाँ आ गईंतो बेचारा गम कहाँ जाएगावह तो एक कोने में पड़ा  पड़ा दुखी होता रहेगा न..। वह कहाँ जाकरकिस गाँव में अपना बसेरा बनाएगाउसे भी तो अपने होने का एहसास होना चाहिएहो सकता है यह बात आपको अनोखी लग रही हो दोस्तों! पर है तो यही सचयकीनन यही सच है।

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दोस्तों! हम सभी दिल की बगिया में खुशियों के बीज होते हैंदिल की ज़मीन पर सपनों के पौधे रोंपते हैंफिर क्यों कर उनमें दुख के कांटे निकल आते हैंहमने तो सिर्फ़ सुखखुशी और आनंद को ही न्योता दिया था ना....ये बिन बुलाए मेहमान कहाँ से आ गएयह ग़मयह दर्दयह दुखइन्हें तो नहीं बुलाया था मैंनेफिर यह कहाँ से मेरे जीवन में चले आएहम इन्हें देखकर दिल का दरवाजा बंद करना चाहते हैंजबकि हमें तो इन्हें गले लगाना चाहिए। ये हमारे अतिथि हैंमेहमान हैंपाहुन हैंजो एक बार ये हमारे हो गएतो जन्मों तक हमारा साथ निभाते हैं। खुशियाँ...खुशियाँ तो हमसे फ्लर्ट करती हैं और दर्द हमसे सच्ची मोहब्बत। ये हमारे साथ चलते हैंमीलों तक। हमारे अकेलेपन के साथी होते हैं ये आँसूहमारी तनहाइयों को रोशन करती हैं ये यादें। बताइए, फिर कौन अपना हुआऔर कौन पराया? बेशक...यकीनन...गम ही अपना है। ज़िंदगी इतनी लंबी है कि यहाँ मीलों तक हमारा साथ निभाने धूप ही आएगीछाँव आएगी भी तो पल दो पलचांदनी दिखेगी तो भी क्षण भर के लिएइसलिए आप गम से ना घबराएँऔर हाँहर व्यक्ति अपने जीवन में खुशियों के ही बीज होता हैकोई भी जानबूझकर दर्द उगाना नहीं चाहतालेकिन यह खरपतवार हैजो स्वयं ही उग जाती है। है न दोस्तों!

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और हाँ दोस्तों! जब हम दूसरों के दर्द से अंजान बने रहते हैंतब भी हम अकेले होते हैंतनहा होते हैंपर इतने बेखबरइतने बेकदरइतने बेपरवाह कैसे हो सकते हैं हमहम देह से दूसरे को जानते हैंपर मन से कभी जान ही नहीं पाते। हम मन की दूरी कभी तय नहीं कर पाते और हमारे आसपास के रिश्ते बिखरते जाते हैं और हम तनहा होते जाते हैं..होते जाते हैं।

 

हम तनहा इसलिए भी होते जा रहे हैं दोस्तों! क्योंकि वक्त बदल रहा हैपरिस्थितियों बदल रही हैंहम बदल रहे हैंसब बदल रहे हैंलेकिन जो नहीं बदला हैवह है मानव समाज और उसमें बसा हुआ प्रेमवे संस्कार जो हमें भारतीय होने के नाते अपने पूर्वजों से मिले हैं। हमारे परिवारजो हमारी थाती हैंहमारी पूँजी हैंहमारी पहचान हैंफिर भी उन्हें छोड़कर हम आभासी दुनिया में जीना चाहते हैंएक मायावी दुनिया मेंजिसमें एक नशा हैयहाँ कोई बंदिशें नहींकोई शर्तें नहींयहाँ लोग खुद को चाहे जैसा प्रस्तुत कर सकते हैंअपनी कमज़ोरी को छुपा सकते हैंस्त्री हैं तो पुरुष बनकरपुरुष हैंतो स्त्री बनकरउम्र दराज़ हैंतो युवा बनकरखुद को सिंगल बता कर लोग ज़्यादा से ज़्यादा लोगों का साथ पाने का प्रयास करते हैं। यहाँ सब कुछ चलता हैझूठी फोटोझूठी प्रोफाइलझूठी बातेंझूठे वादेखुद के अवगुणों को छुपा करअपने गुणों का बखान...और न जाने क्या  क्याअसली दुनिया के खुरदुरेपन में हमारे साथ कौन हैइसकी पहचान न करते हुए हम आभासी संसार में हर पलहर क्षणहर लम्हा किसी न किसी अपने को खोजते हैं।

सवाल यह बिल्कुल भी नहीं है कि रिश्ते कितने सच्चे या कितने झूठे हैंसवाल यह है कि आखिर लोग तलाशते क्या है रिश्तों मेंसच्चा प्यारसच्ची दोस्तीअपनापन या अकेलेपन को दूर करने के लिए सिर्फ़ टाइमपासया खुद की तलाश? वास्तविक दुनिया से इतर आकंठ निराशा में डूबेअवसाद और विषाद से घिरे लोगों का समूह है ये सोशल मीडिया साइट्स। रिश्ते चाहे जो भी बनाए जाएँऑनलाइन या ऑफलाइनमिट्टी तो दिल की ही लगती है न... और आँसुओं के पानी के बिना कभी कोई मूरत बन पाई हैसंवेदना की मज़बूत कड़ी से ही कोई रिश्ता जन्म लेता हैउसे स्क्रॉल करके या माउस पकड़कर बनाने की कोशिश ना करें और न ही उसे मिटाने की।

याद रखिएगा दोस्तों! कि रिश्ते जीवन की रौनक होते हैंवे हमें जीवन देते हैंदुखों से लड़ने का हौसला देते हैंहमें मज़बूत बनाते हैंहमारे जीने की वजह बनते हैं। उन रिश्तों पर हम बंधन नहीं लगा सकतेहमें उन्हें सिर्फ़ खिलने देना हैताकि वे महक सकें। हम अपना आँचल उनके लिए फैला सकते हैंऐसा आँचल जिसमें सिर्फ़ अपनापन होमुहब्बत हो,  मुरव्वत होइंसानियत हो। इस आँचल में यदि चिंगारियाँ दिखेंगीतो रिश्ते कहीं बाहर छाँव की तलाश मेंशांति की तलाश में भटकने लगेंगे। और हाँ दोस्तों! हम तनहा इसलिए भी होते जा रहे हैं कि हमारे जीवन में पैसों के पीछे भागा  दौड़ीआपा  धापी बहुत अधिक है। संतोष  धन तो आज धूरि समान लगता है। इसने हमें अवसादविषादनिराशा और न जाने कौन  कौन सी नकारात्मक भावनाओं से के अलावा हमें दिया ही क्या है?

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तो चलें आजऐसी सभी दीवारों को आज गिरा देंकब तक यूँ ही खामोश रहेंऔर सहें हमदिल कहता है कि आज दुनिया के हर ऐसे रिवाज़ को ख़त्म कर देंजो दीवारें खड़ी हैंउन्हें आज गिरा देंक्यों दिल ही दिल में सुलागेंजो मेरे लिए अच्छा हैजो तेरे लिए अच्छा हैउसे गले लगा लेंमेरे सीने में तेरी धड़कन समा जाएऔर तेरी धड़कन में मेरी...हम दोनों में जब इतनी कूवत है, इतना माद्दा हैतो आओये सारे फ़ासले मिटाएँचलो आज हर लुटे हुए घर में एक चिराग जलाएँटूटे  जर्जर दरवाज़ों पर दस्तक देंजिस किसी की आस कराह रही हैउसकी मलहम  पट्टी करेंऔर अगर प्यार का रिश्ता है जनम का रिश्ता, तो उसे बदलने से बचाएँ......आप क्या कहते हैं न दोस्तों!

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बात जब तनहाई की होअकेलेपन की होएकाकीपन की होतो बातें ख़त्म कैसे होंगीआप तनहा हैंतो मैं हूँ न दोस्तों! आखिर दोस्त ही तो दोस्त के काम आता है।मुझे बताइएगा ज़रूर..। मैसेज बॉक्स में भेजिएगा ज़रूरमुझे इंतज़ार रहेगा.....और आप भी तो इंतजार करेंगे न ....अगले एपिसोड का...करेंगे न दोस्तों!

सुनते रहिएहो सकता हैतनहाई की बातों के सफ़र में साथ  साथ चलते  बतियाते आपको कोई हमसफ़र मिल जाए! और फिर वही एक किस्सा बन जाए.....! मेरे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए...मुझे सुनिए....औरों को सुनाइए....मिलती हूँ आपसे अगले एपिसोड के साथ...

नमस्कार दोस्तों!....वही प्रीत...वही किस्से  कहानियाँ  लिए.....आपकी मीत.... मैंमीता गुप्ता...

END MUSIC

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