EPISODE-11 आप मुझे अच्छे लगने लगे 05/06/2026
EPISODE 11
आप मुझे अच्छे लगने लगे 05/06/2026
INTRO MUSIC
नमस्कार दोस्तों! मैं मीता गुप्ता, एक आवाज़, एक दोस्त, किस्से कहानियाँ सुनाने वाली आपकी मीत। जी हाँ, आप सुन रहे हैं मेरे पॉडकास्ट, ‘यूँ ही कोई मिल गया’ के दूसरे सीज़न का अगला एपिसोड ... जिसमें हैं, नए जज़्बात, नए किस्से, और वही
पुरानी यादें...उसी मखमली आवाज़ के साथ...। जी हाँ दोस्तों, आज हम
बात करेंगे, उस आप की, जो हमें जब अच्छा लगने लगता है, तो सौ सौ
आसमानों का रंग बदल जाता है, नदियों
में लहरें हिल्लोल करने लगती है, पक्षी
चहचहाने लगते है, भौंरें गुंजायमान होने लगते हैं, और हम भी हवाओं के साथ साथ बहने लगते हैं और कह उठते हैं कि आप मुझे
अच्छे लगने लगे हैं, और इसीलिए मुझे अपने सारे सपने भी
सच्चे लगने लगे हैं!
MUSIC
जी हाँ , दोस्तों! बहुत ही प्यारा गीत है, फिल्म है
‘जीने की राह’, जिसमें नायिका बड़े ही प्यार से नायक से इस बात का
मनुहार करती है कि नायक उसे अच्छा लगने लगा है, अच्छा ही नहीं, बहुत
अच्छा लगने लगा है। जब नायक अच्छा लगने लगा है, तो और क्या क्या अच्छा लगने
लगा है? सबसे पहले उसने जो सपने देखे थे, जीवनसंगी को लेकर, वे सब सपने सच्चे लगने लगे हैं, और उसे अच्छे भी लगने लगे हैं, साथ ही साथ यह
धरती, यह नदिया, ये किनारे, ये रातें, ये दिन, यह सुबह, यह शाम, उसे सब अच्छे लगने लगे हैं। अक्सर सोचती हूँ कि क्या ये नदियाँ, किनारे, धरती, पहाड़, आसमान, हमेशा
से ही सबको अच्छे लगते हैं? यदि
हाँ, तो क्यों? कौन है वह जिसके कारण ये सब अच्छे लगाने लगे हैं? मुझे लगता है कि जीवन का सारा अच्छापन और सारा
सच्चापन इसी ‘आप’ की वजह से है। आखिर सोचिए, ये नदियाँ, पहाड़, किनारे, पंछी, फूल, तारे, सितारे, ये तो शाश्वत हैं, फिर इस
दुनिया के सभी लोगों को ये बड़े अच्छे क्यों नहीं लगते, या यूँ कहूँ कि सबसे अच्छे क्यों नहीं लगते? मुझे तो लगता है यह दुनिया, इसकी सारी चीज़ें, तभी खूबसूरत लगती हैं, जब कोई
‘आप’ हमारी ज़िंदगी में आता है। मेरे आपके, हम सबके जीवन में उस ‘आप’ की वजह से ही ज़िंदगी
पूरी होती है और अच्छी लगने लगती है।
music
दोस्तों! तभी तो मन झूम झूमकर गाने लगता है कि आप मुझे अच्छे लगने लगे
हैं, आप मुझे बड़े ही अच्छे लगने लगे हैं।
जब जीवन में ‘आप’ हो, तो
फूलों में महक बसती है, कलियों में खुशबू महकती है, पानी कल कल करती नदियों जैसा
लगता है, खुरदुरी पथरीली धरती भी सोंधी महक देने लगती है, पेड़ों पर बैठे पंछियों की भाषा समझ में आने लगती है, मन पंछी की तरह आकाश में उड़ उड़कर क्षितिज के कोने कोने को छूना चाहता है और फिर, अनायास आसपास पल रहे सभी रिश्ते सच्चे लगने लगते
हैं। आखिर ऐसा होता क्यों है? और
अचानक हमने ऐसा सोचा क्यों? हमारे
मन की दहलीज़ पर जब कोई आहट होती है, जब कोई
अपने कदमों के गहरे निशान बनाने लगता है दिल की ज़मीन पर, तब हमें समझ आता है कि खारा सागर भी मीठे पानी का
सोता बन गया है| है न दोस्तों?
Music
दोस्तों! रात के सन्नाटों में लहरें
जड़ किनारों के कानों में जा जाकर यही
फुसफुसाती होंगी ना...अरे किनारों! तुम कितने जड़ हो, बहते क्यों नहीं मेरे साथ? क्यों अभिमान से भरे हो? क्यों नहीं तरल हो जाते मेरी तरह? क्यों नहीं सरल हो जाते मेरी तरह? क्यों अहंकार में अकड़े से दिखाई देते हो हर समय? कभी झुको भी, झूमो
भी, लहराओ भी! और..और फिर किसी दिन कोई
किनारा चुपके से लहरों के साथ बह जाता होगा, यह कहकर कि आप मुझे अच्छे लगने लगे। किसी बड़े वृक्ष के तने से लिपटी
हुई कोमल वल्लरी, कोमल लता भी तो हौले हौले यही कहती होगी ना.. कि आप मुझे अच्छे
लगने लगे। सुबह सुबह पेड़ों की पत्तियों
पर जो अनगिनत ओस की बूँदे दिखती हैं ना, कभी उन्हें ध्यान से देखिएगा, वह रात को बड़े प्रेम से लिखा गया प्रेम पत्र लगेगा आपको..। सुबह सूरज की गर्मी के
स्पर्श से ये ओस की बूँदें पिघल पिघल कर
कहती होंगी कि आप मुझे अच्छे लगने लगे।
Music
दोस्तों! ज़िंदगी की धूप हमारे जीवन
में प्रेम, स्नेह, आत्मीयता को पिघलाकर, हमारे
सूखेपन भर देती है, क्योंकि
यह सूखापन ही हमें खुरदरा बनाता है, मार
डालता है और भीतर का गीलापन, भीतर
की नमी हमें ज़िंदा रखती है। जब तक हमारे मन में गीलापन नहीं होगा, तरलता नहीं होगी, सरलता नहीं होगी, मुहब्बत
नहीं होगी, मुरव्वत नहीं होगी, परवाह नहीं होगी, हम किसी से जुड़ ही नहीं पाएंगे, और ना ही हमें कोई अच्छा ही लगेगा। दोस्तों! इसके लिए अहम् को गलाना
पड़ेगा। अगर अहम् रहेगा, तो हम कभी भी सुंदरता को महसूस नहीं
कर पाएँगे और ना ही हम कभी कह पाएँगे कि आप मुझे अच्छे लगने लगे।
इस प्यार को, स्नेह को, गीलेपन को बचा लिया यदि, तो
दुनिया में इतने संदेह, इतने
शक, इतने फरेब, इतना अविश्वास और इतने आतंक नहीं होंगे। हर किसी
को नदियाँ, धरती, आसमान, पर्वत, फूल, पत्ते, बूटे, सभी, बड़े सुहाने, बड़े अच्छे लगने लगेंगे। इस सुंदर दुनिया को
देखने के लिए सुंदर आँखें और सुंदर मन चाहिए। कहा भी गया है कि सुंदरता देखने वाले
की दृष्टि में समाहित होती है। लेकिन सबसे ज़रूरी बात, एक ‘आप’ भी तो होना चाहिए। वह ‘आप’ जो हममें, आप में, आपके ज़िंदा होने का एहसास करवाए। आपके अंदर वीणा की स्वर लहरी को जन्म दे, जिसे आप अपनी ज़िंदगी के गीत में शामिल कर सकें, जिसके आने से आपको सूरज की तपन जाड़े की गुनगुनी
धूप लगे और जिसके समीप आने पर बर्फ़ भी सुलगती
पिघलती सी महसूस हो, जिसे
सोचने के बाद आपकी सोच बदल जाए, मन बदल
जाए। उसके होने से आपकी आँखों में चमक और होठों पर मुस्कान खिल जाए। वह ‘आप’ हम
सबके पास ही है, आसपास ही है, लेकिन बात यह भी है कि क्या हमने कभी उस ‘आप’ से
कहा कि दुनिया की सारी उलझनों, परेशानियों, ज़िम्मेदारियों, मजबूरियों, दुश्वारियों, दूरियों के बावजूद मुझे ज़िंदगी हसीन लगती है, सिर्फ़ इसलिए अच्छी लगती है क्योंकि मुझे आप अच्छे
लगने लगे हो। और हाँ..यह दौलत, यह शोहरत, ये गाड़ियाँ, ये
बंगले, यह बैंक अकाउंट, सब ये दरअसल कितने झूठे हैं, सब कितने फेक हैं, सब कितने बड़े छलावा हैं, तो सच्चा क्या है? सच्ची
हैं वे आँखें, वे बातें, वे शिकायतें, वे झगड़े, और...और
जी हाँ...अगर आप अभी तक नहीं कह पाए हैं, तो आज कह भी दीजिए, अच्छा
लगता है यह कहना भी, और
सुनना भी... कि आप मुझे अच्छे लगने लगे....!
जब कोई अच्छा लगने लगता है, तो मन में एक अजीब सी हलचल होने लगती है, दिल कुछ कहने लगता है, मन बेमौसम सावन
सा भीगने लगता है, गीत
बिना सुर के भी सच्चे लगने लगते हैं, दिल
जैसे किसी मीठे से राज़ छुपाने लगता है। दिल बार
बार उसी इंसान की ओर खिंचने लगता है, उसकी बातें, उसकी
हँसी, उसकी मौजूदगी सब कुछ खास लगने लगती
है। मन में उत्सुकता, उम्मीद
और थोड़ी सी घबराहट की तरंगें उठने लगती
हैं। कभी कभी बिना किसी वजह के चेहरे पर
मुस्कान आ जाती है, और दिल
यह सोचकर धड़कने लगता है कि अगली बार उससे कब मुलाकात होगी, जब मुलाकात होगी, तब
कैसा होगा? क्या ऐसा? क्या वैसा? जब कोई अच्छा लगने लगता है...तो एक
अजीब सी बात होती है—ना कोई शोर, ना कोई
एलान—बस चुपचाप, किसी शाम की तरह उतर आता है वह दिल
में। उसकी हँसी जैसे किसी पुराने गाने की धुन हो, जो कानों में नहीं, सीधे
दिल में सुनाई देती है। उसके आने से जैसे हवा में कुछ बदल सा जाता है—हल्की सी ठंडक, मीठा सा सुकून। मन पूछता है,
"क्या उसे भी ऐसा ही महसूस होता होगा?" और जवाब में चेहरे पर बस एक स्मित मुस्कान होती
है, जो खुद ब खुद
होंठों से झलकने लगती है। कभी उसके नाम से दिल धड़क उठता है, और कभी उसकी एक झलक से दिन सँवर जाता है। ये
एहसास... शायद प्यार नहीं, पर
प्यार का पहला खत तो ज़रूर होता है, चलो खत
न भी सही, खत का मज़मून तो ज़रूर है, है न दोस्तों!
MUSIC
बात जब उस ‘आप’ की हो, उसके अहसास की हो, दिल की धड़कन की हो, तो
बातें ख़त्म कैसे होंगी? जिसकी
वजह से आपके चेहरे पर मुस्कान आती है, आपका दिल धड़कने लगता है, उस
‘आप’ के किस्से हमें भी सुनाइए.. सुनाइएगा ज़रूर..। मैसेज बॉक्स में भेजिएगा ज़रूर, मुझे इंतज़ार रहेगा.....और आप भी तो इंतजार करेंगे
न ....अगले एपिसोड का...करेंगे न दोस्तों!
सुनते रहिए, हो सकता है, उस ‘आप’ की बातें करते करते
जीवन का सफ़र बीत जाए और फिर वे बातें ही एक किस्सा बन जाएँ.....! इसीलिए मेरे चैनल
को सब्सक्राइब कीजिए...मुझे सुनिए....औरों को सुनाइए....मिलती हूँ आपसे अगले
एपिसोड के साथ...
नमस्कार दोस्तों!....वही प्रीत...वही
किस्से कहानियाँ लिए.....आपकी मीत.... मैं, मीता गुप्ता...
END MUSIC
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