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Showing posts from October, 2021

ज़िंदगी के सफ़र को खूबसूरत कैसे बनाएं ?

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ज़िंदगी के सफ़र को खूबसूरत कैसे बनाएं ?   बाधाएं आती हैं आएं , घिरें प्रलय की घोर घटाएं पांवों के नीचे अंगारे सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं निज हाथों में हंसते हंसते आग लगा कर जलना होगा , कदम मिला कर चलना होगा। आज की बात की शुरूआत एक कहानी से करते हैं , एक जंगल में राजा शेर और कई तरह के जानवर रहते थे-भालू , चीता , गीदड़ , बाघ , हिरण , हाथी आदि ।एक बार उस जंगल में भयानक आग लग गई। चारों तरफ लपटें आसमान का छूने लगीं। जिसको जहाँ जगह मिली , वह वहीं से भागने लगा। हिरण , शेर , गीदड़ सभी दुम दबा कर भाग रहे थे। उसी जंगल में एक पेड़ पर चिड़िया रहती थी , भयानक आग को देखकर वह घबरायी नहीं। जल्दी से उड़कर पास के तालाब पर गई और चोंच में पानी भर-भरकर लाकर आग पर डालने लगी। चिडि़या की यह क्रियाविधि दूसरे पेड़ पर बैठा एक कौआ देख रहा था। उससे रहा नहीं गया , और वह चिड़िया से बोला- “चिड़िया रानी , तुम इतनी छोटी हो और यह तुम भी जानती हो कि तुम्हारी चोंच भर पानी से यह आग नहीं बुझने वाली है , तो फिर क्यों बार बार प्रयास कर रही हो ? ” तब चिड़िया ने उसे जवाब दिया- “मैं जानती हूं कि मेरे अकेले के प्र...

समस्या बनी ऑनलाइन गेमिंग की लत: पैरेंट्स के लिए है खतरे की घंटी?

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    समस्या बनी ऑनलाइन गेमिंग की लत: पैरेंट्स के लिए है खतरे की घंटी? यह लेख उन करोड़ों माता-पिता के लिए है , जो अपने बच्चों की ऑनलाइन गेम खेलने की लत से परेशान हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए स्कूलों और पैरेंट्स के लिए एक एडवाइज़री जारी की गई है, जिसमें कहा गया है कि ऑनलाइन गेम खेलने वाले बच्चों पर विशेष नजर रखी जाए।लॉकडाउन के बाद ऑनलाइन गेमर्स की संख्या तेज़ी से बढ़ी है । भारत में 23 वर्ष तक के 88 प्रतिशत युवा मानते हैं कि वे समय बिताने के लिए किसी भी दूसरी गतिविधि के मुकाबले ऑनलाइन गेम खेलना ज्यादा पसंद करते हैं। शौक के लिए या समय बिताने के लिए कुछ देर के लिए ऑनलाइन गेम खेलने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब ये शौक एक बुरी आदत में बदल जाता है, जिसे गेमिंग एडिक्शन   कहते हैं। ऑनलाइन गेम की इस लत का शिकार सबसे ज़्यादा बच्चे हो रहे हैं, क्योंकि वे इसके खतरों को ठीक से समझ नहीं पाते। इसलिए अगर आपके घर में भी ऑनलाइन गेम खेलने के शौकीन बच्चे हैं , तो आप उन्हें अपने पास बुला लीजिए क्योंकि हमारी अगली रिपोर्ट आपको बताएगी कि ये शौक एक बुरी आदत में बदल ज...

पोस्ट कोविड काल में मानसिक स्वास्थ्य: वे सबक़ जो हम सीखना नहीं चाहते

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  पोस्ट कोविड काल में मानसिक स्वास्थ्य : वे सबक़ जो हम सीखना नहीं चाहते 10 अक्टूबर को हम विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाएँगे , आइए इस अवसर पर बात करें उन घावों की , जो कोविड सदैव के लिए अंकित कर गया है , जिनमें से एक है लोगों का मानसिक स्वास्थ्य। कोविड -19 महामारी ने प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर असंख्य लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। हज़ारों लोग इस महामारी के चलते आई भयंकर मुसीबतों के शिकार हुए हैं। इनमें स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे का अभाव , आर्थिक सुस्ती , प्रवासी संकट , घरेलू हिंसा , मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं आदि शामिल हैं। बहरहाल , महामारी के इस दौर में जिस एक मुद्दे पर अपेक्षाकृत काफ़ी कम चर्चा हुई है , वह है लोगों का गिरता मानसिक स्वास्थ्य। स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं में आई रुकावटों से आपूर्ति श्रृंखला को नुकसान पहुंचा। नतीजतन एक के बाद एक कई देशों को संपूर्ण तालाबंदी की अवस्था में जाना पड़ा। विश्व स्वास्थ्य ...