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Showing posts from January, 2022

वसंत का आगमन...

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  वसंत का आगमन...   नई खुशी में , नए रंग में मन को फिर हर्षाने दो। न रोको मन के तारों को , बावरे मन को गाने दो , आज फिर चटकी हैं कलियाँ आज वसंत को आने दो।। वसंत तो सारे विश्व में आता है पर भारत का वसंत कुछ विशेष है। भारत में वसंत केवल फागुन में आता है और फागुन केवल भारत में ही आता है। गोकुल और बरसाने में फागुन का फाग , अयोध्या में गुलाल और अबीर के उमड़ते बादल , खेतों में दूर-दूर तक लहलहाते सरसों के पीले-पीले फूल , केसरिया पुष्पों से लदे टेसू की झाड़ियां , होली की उमंग भरी मस्ती , जवां दिलों को होले-होले गुदगुदाती फागुन की मस्त बयार , भारत और केवल भारत में ही बहती है। विद्या की देवी सरस्वती के पूजन का दिवस ' वसंत पंचमी ' देश भर में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन से धार्मिक , प्राकृतिक और सामाजिक जीवन में बदलाव आने लगता है। वसंत पंचमी की तिथि से वसंत ऋतु की शुरुआत मानी जाती है। यह तिथि खासतौर पर विवाह मुहूर्तों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। यही वजह है कि इस शुभ दिन का इंतज़ार विवाह करने वाले लोगों को साल भर से रहता है। इस पर्व पर न सिर्फ मांगलिक कार्य करना , बल...

वसंत को आने दो

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    वसंत को आने दो वसंत को आने दो , न रोको मन के तारों को , बावरे मन को गाने दो , आज फिर चटकी हैं कलियाँ आज वसंत को आने दो।। सुवासित कली यह सुंदर शोभायुक्त खिल आई है ऋतु लिए एक नव आगमन का होकर प्रफुलित , हर्षोल्लास अब नवपरिवर्तन लाने दो , वसंत को आने दो। नवनिर्मित बीजों से पुष्प-गुच्छों से लदे , कली कोई सुंदर , शोभायुक्त , करके उल्लास फिर खिल जाने दो , वसंत को आने दो। वन के इस उद्यान में भू , नीर , तना , कुछ उसके संग साथी हैं , कुछ निर्मोही , हठीले तीव्र प्रवाह पवन के झोंके संघर्ष उसे जीवन का सिखलाने दो , वसंत को आने दो। कोकिल कूके , भौंरे गुंजित , सरसी सरसों फूले , बोया अंकुर किसी ने या स्वयं होकर अंकुरित इस वसुंधरा पर उग आई है वल्लरी , देखो सखा आज इसे झूल जाने दो , वसंत को आने दो। मन मौन रहा सकुचाई भाषा अंधकार ओर घोर निराशा अब तो इस बंधन को काटो मन में उमंग समाने दो।। नई खुशी में नए रंग में मन को फिर हर्षाने दो। न रोको मन के तारों को , बावरे मन को गाने दो , आज फिर चटकी हैं कलियाँ आज वसंत को आने दो...

लोकतंत्र- गांधी की दृष्टि में 30.01.2022

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  लोकतंत्र- गांधी की दृष्टि में   लोकतंत्र में आम आदमी का प्रतिनिधित्व होना चाहिए , इसलिए एक स्वस्थ लोकतंत्र वही है , जिसमें हर लिंग , जाति और संप्रदाय के लोगों का प्रतिनिधित्व हो।-महात्मा गांधी देश-दुनिया के लोग आज महात्मा गांधी के निर्वाण-दिवस को ‘शहीद दिवस’ के रूप में मना कर उनके विचारों का अपने-अपने तरीके से प्रचार-प्रसार करने में जुटे हैं। जीवन से जुड़े तमाम विषयों पर महात्मा गांधी के दृष्टिकोण को दुनिया अपने-अपने ढंग से जांच-परख रही है। इसी कड़ी में हम गांधी के लोकतंत्र की अवधारणा एवं व्यक्तिगत आज़ादी के मायने को समझने का प्रयास इस लेख में करने जा रहे हैं। सर्वविदित है कि जब से जगत एवं जीव अस्तित्व में आए हैं , तब से मानव अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए निरंतर संघर्षरत रहा है और आज भी सही अर्थों में स्वतंत्र नहीं हो पाया है। स्वतंत्रता , मानव जीवन का मुख्य केंद्र बन चुका है। ऐसे में यक्ष प्रश्न यह है कि स्वतंत्रता है क्या ? किन-किन चीज़ों से हम स्वतंत्र होना चाहते हैं ? कहा जाता है कि मानव के उद्भव काल से ही उसमें क्रोध , मोह , माया एवं अपने-पराए आदि का भाव है। यही...

मेरी दृष्टि में नारी शक्ति: आर्यन साहित्य के संदर्भ में

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  मेरी दृष्टि में नारी शक्ति: आर्यन साहित्य के संदर्भ में वस्तुतः यह आर्यन चिंतन शैली ही है , जो आज तक हमारे देश की नारियों की पथप्रदर्शिका रही है। हम आज इकीसवीं सदी में जीते हुए जिस नारी को आगे बढ़ते हुए देखते हैं , पुरुषों के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए देखते हैं , उसकी पूर्व भूमिका भारत में आर्यों के समय में समाज के स्थापनाकाल में ही देखी जा सकती है। आज हमारी दृष्टि जिस प्रकार देश ,   समाज और   विश्व विकास में उनकी बढ़ती सहभागिता पर गर्व करना चाहती है , उनके महत्व को स्वीकार कर उन्हें सशक्ति के मार्ग पर देखना चाहती है ,   वस्तुतः यह युग के साथ चिंतन में आता हुआ किंचित परिवर्तन हो सकता है , पर यह उपर से थोपा हुआ वैश्विक चिंतन नहीं है। इसकी जड़ें हमारे अपने प्राचीन समाज में ही देखी जा सकती हैं और अपने प्राचीन आदिसाहित्य में इसकी झलक ढूँढी जा सकती है। भारतीय स्त्रियों के व्यक्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाने वाले तथाकथित सभ्य और विद्वत्जन नारी समाज को करीब डेढ़ सौ वर्ष पूर्व कैंब्रिज विश्वविद्यालय में भाषण देते हुए उनके नकारात्मक स्वरूप से उबार कर उनके लिए मान-सम्मान...