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Showing posts from September, 2022

वर्तमान में गांधी की प्रासंगिकता

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  वर्तमान में गांधी की प्रासंगिकता   गाँधी पुण्य संगम है, जग की सभ्यताओं का, गाँधी शिलालेख है, पवित्र मान्यताओं का, गाँधी तो विशेष है, परम विशेषताओं में, जो सदा जियेगा, मेरे देश की हवाओं में, गाँधी एक भावना है, आस्था के प्यार की, एक मनोकामना है, परिधियों के पार की, गाँधी एक कसौटी है, कुर्सियों के त्याग की, अनूठी अंगूठी है, आजादी के सुहाग की, गाँधी एक आइना है चेतना है शोध है, इस धरा के आदमी में देवता का बोध है|   जब पूरे विश्व ने गिरमिटिया श्रम को एक सामाजिक व्यावस्था के रूप में स्वीकार कर लिया था , तब गांधी जी ने इस प्रथा का पुरजोर विरोध किया था। यही नहीं जब पूरी दुनिया में हिंसात्मक युद्ध छिड़ा हुआ था , तब गांधी जी ने अहिंसात्मक युद्ध शुरू कर दिया था। उन्होंने हिंसात्मक इतिहास को अहिंसा में बदल दिया। राजनीतिक संघर्ष हल करने के लिए जिस तरह से उन्होंने अहिंसात्मक प्रतिरोध यानी सत्याग्रह का उपयोग किया , इससे हुआ ये कि बाद की दुनिया में राजनीतिक संघर्षों के हल क लिए यह सर्वोत्म माध्यम बन गया। गांधी जी हिंसात्मक कार्यों के दुष्प्रभावों से अच्छी तरह व...

युगद्रष्टा....युगस्रष्टा....या युगावतार गांधी

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  युगद्रष्टा....युगस्रष्टा....या युगावतार गांधी आज़ादी का अमृत महोत्सव वर्ष में बापू की जन्म-जयंती के अवसर पर भावपूरित   श्रद्धांजलि   युगद्रष्टा गांधी या युगास्रष्टा गांधी.....महात्मा गांधी......या राष्ट्रपिता गांधी....या बापू। वास्तव में चाहे किसी भी नाम से संबोधित कर लें या किसी भी विशेषण से विभूषित करें , गांधी एक विचार हैं , एक चिंतन हैं , एक दर्शन हैं। वे ओबामा से लेकर नेल्सन मंडेला जैसी हस्तियों के प्रेरणास्रोत , अरब देशों की क्रांति में आदर्शों एवं सिद्धांतों की खुशबू और वर्तमान दौर में बड़े से बड़े आंदोलन , समाज सुधार , पर्यावरण संरक्षण , स्वच्छता , शिक्षा , कौशल-संवर्धन जैसे सामाजिक मसलों में आज भी ज़िंदा हैं।उनका प्रेम , त्याग , दूसरों पर भरोसा और सहअस्तित्व का संदेश आज के असुरक्षित समय और कलह से भरी दुनिया में प्रासंगिक हैं। उनकी राह मानवता , सहअस्तित्व , दृढ़ मनोबल और शांति की राह है। इन्हीं रास्तों पर चलने वाले कई लोग ऐसे भी होंगे , जिन्होंने न तो गांधीजी को पढ़ा होगा और न ही उनके बारे में सुना होगा । गांधी का जीवन एक नदी की भांति था , जिसमें कई धारा...

फ़ोमो नहीं, जोमो अपनाइए..

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  फ़ोमो नहीं, जोमो अपनाइए.. हम सभी कुछ छूट जाने , कहीं पहुंच न पाने या किसी से मिल न पाने से या यूं कहें कि अपने महत्व को काम होता देख दुखी..परेशान हो जाते हैं। इसे फ़ोमो यानी ‘फीयर ऑफ मिसिंग आउट’ कहते हैं। इसके उलट कुछ खो देने का भी सुख लिया जाए, तो वह जोमो कहलाता है यानी ‘जॉय ऑफ मिसिंग आउट’ है न, नई और मज़ेदार बात ? हम सूचनाओं की भरमार के युग में जी रहे हैं। कई बार हम इनके ढेर में दब से जाते हैं , जिससे ख़ुद के लिए उपयोगी और ज़रूरी विचार हमसे कहीं छूट जाते हैं। नतीजतन हम तनाव और अवसाद से घिर जाते हैं। पर यदि इनहके छूट या कभी-कभी खोने का आनंद लिया जाए, तो ज़िंदगी बेहतर बन सकती है। अमेरिकी विचारक रिचर्ड सॉल वुरमैन ने अपनी पुस्तक ‘इंफर्मेशन एंग्ज़ायटी’ में लिखा है , ‘ बीते 30 सालों में इतनी सूचनाएं उत्पन्न की जा चुकी हैं, जितनी बीते 5000 वर्षों में भी नहीं हुईं।’ ग़ौरतलब है कि उनकी किताब आज से 30 साल पहले लिखी गई थी, जब सोशल मीडिया जैसे पल-पल नोटिफिकेशन भेजने वाले प्लेटफॉर्म नहीं थे। दार्शनिक व मार्केटिंग गुरु रेगिस मैककेना ने कहा है कि हम नए तथ्यों , नए विकास , नए विचारों और नई...

हिंदी का भविष्य और भविष्य की हिंदी

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  हिंदी का भविष्य और भविष्य की हिंदी     मैं वह भाषा हूं , जिसमें तुम सपनाते हो , अलसाते हो   मैं वह भाषा हूं , जिसमें तुम अपनी कथा सुनाते हो   मैं वह भाषा हूं , जिसमें तुम जीवन साज़ पे संगत देते   मैं वह भाषा हूं , जिसमें तुम , भाव नदी का अमृत पीते   मैं वह भाषा हूं , जिसमें तुमने बचपन खेला और बढ़े   हूं वह भाषा , जिसमें तुमने यौवन , प्रीत के पाठ पढ़े   मां! मित्ती का ली मैंने... तुतलाकर मुझमें बोले   मां भी मेरे शब्दों में बोली थी - जा मुंह धो ले   जै जै करना सीखे थे , और बोले थे अल्ला-अल्ला   मेरे शब्द खजाने से ही खूब किया हल्ला गुल्ला   भावों की जननी मैं , मैं मां , मैं हूँ तिरंगे की शान   जन-जन की आवाज हूँ , मेरी शक्ति पहचान   लो चली मैं अब विश्व विजेता बनने   तमसो मा ज्योतिर्गमय , बढ़ाने भारत की शान॥   हिंदी भाषा का इतिहास लगभग एक हज़ार वर्ष पुराना माना गया है। हिंदी भाषा व साहित्‍य के जानकार अपभ्रंश की अंतिम अवस्‍था ' अवहट्ठ ' से हिंदी क...

जानिए पढ़ाई का बेस्ट टाइम

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  जानिए पढ़ाई का बेस्ट टाइम सुबह होती है शाम होती है , उम्र यूं ही तमाम होती है - मुंशी अमीरुल्लाह तस्लीम मेरे लिए पढ़ाई करने का बेस्ट टाइम क्या है , जिससे मैं अपना परफॉरमेंस सुधार लूं ? प्रिय स्टूडेंट्स , क्या आप भी इस प्रश्न में उलझ रहे हैं ? आज मैं आपको सही समाधान दूंगी । विज्ञान क्या कहता है...और प्रैक्टिकली क्या होता है-वैज्ञानिक रिसर्च कहती है कि सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच और शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक इंसान का दिमाग सीखने के मोड में होता है , इसलिए यह पढ़ने का सबसे सही समय है। लेकिन प्रैक्टिकली देखा जाए, तो यहाँ दो फैक्टर्स काम करते हैं: पहला आपके दिन का पैटर्न क्या है - मतलब आपके स्कूल-कॉलेज जाने के टाइम के अनुसार आपके पास पढ़ने के लिए समय कब है , और दूसरा आपका बायोलॉजिकल साइकिल क्या है - मतलब आप कब सबसे ज्यादा अलर्ट और एनर्जेटिक महसूस करते हैं। आज हम कॉलेज , स्कूल और कोचिंग के कंपल्सरी टाइम के नहीं , आपके स्वेच्छा से तय टाइम की बात करेंगे। पहले एक प्यारी कहानी सुनिए-जंगल में एक आश्रम में एक ज्ञानी साधु रहते थे। ज्ञान प्राप्ति की चाह में विद्यार्थी उनके पास...