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Showing posts from December, 2023

वर्ष नव,हर्ष नव

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  वर्ष नव , हर्ष नव नए वर्ष की प्रातः सबसे अनूठी है। हो भी क्यों नहीं , आज ही तो सुबह की सबसे पहली किरण के साथ नया वर्ष हमारे घर-आंगन में , हमारे जीवन में आया है। समूची सृष्टि में विधान बनकर वही चहुं ओर छाया है। नव वर्ष के आगमन की खुशी में प्राची में उषा ने अपना प्राचीन आंचल उतार फेंका है। इसका मुख दिव्य रक्तकमल की भांति उद्भासित है और हर क्षण स्वर्ण की कांति का दसों दिशाओं में विकिरण कर रहा है। वसुंधरा के आंगन में नए सूरज का उदय हुआ है। नए सूरज की हर किरण में नई संभावनाओं की झिलमिल है , जागृत आत्माओं की अंतर्चेतना में एक एहसास , एक अनुभूति है कि जगत और जीवन में इस नए वर्ष में बहुत कुछ नया प्रस्तुत होगा। भौतिक पदार्थ एवं परिस्थितियों की अप्रत्याशित उलट-पुलट के बीच कुछ नया दिखेगा , वह आध्यात्मिक अंतर्चेतना में एक नए आलोक का अवतरण करेगा। समूची सृष्टि को अपनी स्वर्णिम किरणों से ज्योतिर्मय कर रहे आज के सूर्य का यही संदेश है। यह सूर्य दिव्य चेतना से चेतन है। इसके प्रकाश में परिस्थितियों के भविष्य स्वरूप की आध्यात्मिक अंतर्संभावनाओं की अनेक झांकियां झलक रही हैं। सर्वज्ञ चेतना मे...

नव वर्ष में होगा ‘यूँ ही कोई मिल गया’ पॉडकास्ट का डिजिटल लॉंच

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  नमस्कार दोस्तों,मैं मीता गुप्ता.....लेकर आ रही हूँ अपनी वाचिक प्रस्तुति.....'यूँ ही कोई मिल गया'.....बस चंद घंटे शेष....कल नव वर्ष के नूतन विहान में...स्नेह दीजिए....आशीर्वाद दीजिए....मेरे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए yunhikoimilgaya.com नव वर्ष में होगा ‘यूँ ही कोई मिल गया’ पॉडकास्ट का डिजिटल लॉंच https://youtu.be/8Oc6FV2LPyA डॉ मीता गुप्ता बरेली की जानी-मानी साहित्यकार हैं। वे एक हिंदी शिक्षिका होने के साथ-साथ यूट्यूबर, ब्लॉगर, समाजसेविका भी हैं। हाल ही में उन्होंने पॉडकास्टिंग के क्षेत्र में पदार्पण करने के विषय में सोचा तो हमने उनसे भेंट कर उनसे चंद प्रश्न पूछे। सबसे पहले हम यह जानना चाहते थे कि पॉडकास्टिंग का विचार उनके मन में कैसे आया? उन्होंने ने बताया कि उन्हें हर उसे कार्य को करने में आनंद आता है, जो चुनौतीपूर्ण हो। उन्होंने अपने जीवन में शिक्षण के साथ-साथ कई साहित्यिक ऑनलाइन और ऑफलाइन परिचर्चाओं और कवि गोष्ठियों में भाग लिया, युट्यूबिंइग, ब्लॉगिंग आदि कार्य वे वर्षों से कर रही हैं, पर पॉडकास्टिंग के कार्य ने उन्हें इसलिए लुभाया क्योंकि यह उनके लिए एक नई चुनौती थी और हिं...

क्रिसमस का त्योहार: शांति और सद्भावना का प्रतीक

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क्रिसमस का त्योहार: शांति और सद्भावना का प्रतीक  क्रिसमस एक बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहार है जो हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है। यह यीशुइयों का सबसे बड़ा त्योहार है। इसी दिन यीशु मसीह (जीसस क्राइस्ट) का जन्म हुआ था, इसलिए इसे बड़ा दिन भी कहते हैं। क्रिसमस के पहले वाली रात में गिरजाघरों में प्रार्थना सभा की जाती है, जो रात के 12 बजे तक चलती है। अगली सुबह चर्च में होने वाली प्रार्थना के बाद, लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं और शुभकामनाएं देते हैं। क्रिसमस शांति का संदेश लाता है। पवित्र शास्त्र में यीशु को शांति का राजकुमार कहा गया है। यीशु हमेशा अभिवादन के रूप में कहते थे कि शांति तुम्हारे साथ हो, शांति के बिना किसी का अस्तित्व संभव नहीं है। घृणा, संघर्ष, हिंसा और युद्ध का धर्म को इस धर्म में कोई जगह नहीं दी गई है। शायद यही वजह है कि क्रिसमस किसी एक देश या राष्ट्र में नहीं, बल्कि दुनियाभर में धूमधाम से मनाया जाता है। क्रिसमस के दौरान यीशु मसीह की प्रशंसा में लोग कैरोल गाते हैं। इस दिन लोग अपने घरों को क्रिसमस ट्री से सजाते हैं। घर के हर एक कोने को रोशन कर देते हैं...

दरकते पर्वत, कराहता जीवन

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दरकते पर्वत, कराहता जीवन मेरे नगपति! मेरे विशाल! साकार, दिव्य, गौरव विराट्, पौरुष के पुन्जीभूत ज्वाल! मेरी जननी के हिम-किरीट! मेरे भारत के दिव्य भाल! मेरे नगपति! मेरे विशाल! राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा रचित इन पंक्तियों को जब=जब याद करती हूं, मानो हृदय में कुछ दरक जाता है, दरकते हिमालय पर्वत की तरह्। पर्वतों की वादियां जितनी हसीन होती हैं, उतनी ही खतरनाक भी। खूबसूरत पर्वतों की ज़िंदगी की तस्वीर बेहद भयावह है। गरीबी, बेरोज़गारी के साथ ही आपदा का कहर कब यहां के निवासियों को अपने आगोश में ले लेगा, यह कोई नहीं जानता। पर्वत सिर्फ बरसात में ही नहीं दरकते, बल्कि सामान्य दिनों में भी भू-स्खलन का दंश झेलते हैं। दरकते पर्वत सालभर इंसानी ज़िंदगी को निगलते रहते हैं। यूं तो पर्वतों का दरकना कोई नई बात नहीं है, लेकिन व्यवस्था की अनदेखी और अंधाधुंध अनियोजित विकास ने इंसानी ज़िंदगी के नुकसान में कई गुना इज़ाफ़ा किया है। हर साल सैकड़ों लोग अपनी जान गंवाते हैं। इनमें से कुछ सरकारी फाइलों में दर्ज हो जाते हैं और कुछ गुमनाम ही रह जाते हैं। हज़ारों लोगों के आशियाने उजड़ जाते हैं और जाने कित...

डीपफेक से सब हैरान..परेशान

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डीपफेक से सब हैरान..परेशान क्या है डीपफेक?  डीपफेक एआई एक प्रकार की कृत्रिम बुद्धिमत्ता है, जिसका प्रयोग ठोस छवियां, ऑडियो और वीडियो धोखाधड़ी बनाने के लिए किया जाता है। यह शब्द प्रौद्योगिकी और फर्जी सामग्री दोनों का वर्णन करता है, और यह डीप लर्निंग और फेक यानी झूठ का एक सम्मिश्रण है। डीपफेक अक्सर मौजूदा स्रोत सामग्री को बदल देते हैं, एक व्यक्ति को दूसरे से बदल दिया जाता है। वे पूरी तरह से मौलिक सामग्री भी बनाते हैं, जहां किसी को कुछ ऐसा करते या कहते हुए दर्शाया जाता है जो उन्होंने नहीं किया या कहा नहीं। डीपफेक द्वारा उत्पन्न सबसे बड़ा खतरा झूठी जानकारी फैलाने की उनकी क्षमता है जो विश्वसनीय स्रोतों से आती प्रतीत होती है। उदाहरण के लिए, 2022 में यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की का एक डीपफेक वीडियो जारी किया गया था जिसमें वे अपने सैनिकों को आत्मसमर्पण करने के लिए कह रहे थे। डीपफेक के कई उल्लेखनीय उदाहरण हैं, जिन्होंने दुनिया पर अपना प्रभाव छोड़ा है जैसे, फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग एक डीपफेक का शिकार हुए थे, जिसमें उन्हें इस बारे में शेखी बघारते हुए दिखाया गया ...

‘बाबुल की दुआएं लेती जा, जा तुझको सुखी संसार मिले’

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  ‘ बाबुल की दुआएं लेती जा , जा तुझको सुखी संसार मिले ’ -भारतीय समाज में , विवाह में बेटी को विदा करते समय बाबुल भावनात्मक रूप से कई विचार और भावनाएं अनुभव करते हैं। कुछ भावनाएं सामान्य रूप से उनके मन में उत्पन्न होती हैं , जैसे   बाबुल अपनी बेटी पर गर्व करते हैं कि उन्होंने अपनी बेटी को शिक्षा , संस्कार और सामाजिक मूल्यों से युक्त किया है और वह अब एक नए जीवन की शुरुआत के लिए तैयार है। उनका दिल विदा करते समय दुखी भी होता है। वे अपनी बेटी के बिना अकेलेपन का अहसास करते हैं और उन्हें याद करने का दुःख महसूस करते हैं। वे अपनी बेटी से गहरा प्यार करते हैं और नए जीवन के लिए उसे शुभकामनाएं और आशीर्वाद देते हैं। बाबुल का दिल विवाह के समय संवेदनशील होता है। वह बेटी के भविष्य के लिए चिंतित भी हो सकते हैं , लेकिन उन्हें अपनी बेटी का सबसे अच्छा भविष्य चाहिए। साथ ही वे चिंतित भी होते हैं कि उनकी बेटी का नया जीवन न जाने कैसा होगा ? वह वहां खुश रहेगी या नहीं , उसकी सुरक्षा और सुख-शांति का ध्यान कौन रखेगा ? वे अपनी बेटियों की विदाई पर कभी उत्साह ,   कभी उदासी , कभी प्रेम , कभी आश...