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Showing posts from December, 2021

हिंदी ई-टूल्स

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  हिंदी ई-टूल्स भाषा अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। और मानव जीवन का अभिन्न अंग है। संप्रेषण के द्वारा ही मनुष्य सूचनाओं का आदान प्रदान एवं उन्हें संग्रहित करता है। सामाजिक , आर्थिक , धार्मिक अथवा राजनीतिक कारणों से विभिन्न मानवी समूहों का आपस में संपर्क बन जाता है। 21वीं शताब्दी में सूचना और संपर्क के क्षेत्र में अद्भुत प्रगति हुई है। सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति में ज्ञान के द्वार खोल दिए हैं। बुद्धि एवं भाषा के मिलाप से सूचना प्रौद्योगिकी के सहारे आर्थिक संपन्नता की ओर भारत अग्रसर हो रहा है। इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य के रूप में ई-कॉमर्स और इंटरनेट के द्वारा भेजना ई-मेल द्वारा संभव हुआ है। ऑनलाइन सरकारी कामकाज विषयक ही प्रशासन ई-बैंकिंग द्वारा बैंक व्यवहार ऑनलाइन , शिक्षा सामग्री के लिए ई-एजुकेशन/ ई-लर्निंग आदि माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी का विकास हो रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी के बहुआयामी उपयोग के कारण विकास के नए द्वार खुल रहे हैं। भारत में सूचना प्रौद्योगिकी का क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। इस क्षेत्र में विभिन्न प्रयोगों का अनुसंधान कर के विकास की गति को बढ़ाया गया है। कोविड...

नववर्ष 2022 की चुनौतियां

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  नववर्ष   2022 की चुनौतियां कोरोना महामारी की दूसरी लहर से व्यथित वर्ष  2021  और ओमिक्रॉन वायरस के मुहाने पर खड़े होकर जीवन के हर क्षेत्र में अभूतपूर्व आर्थिक-सामाजिक आपदाएं ,  संकट ,  चुनौतियाँ और कठिनाइयां को देखते-समझते हुए आज हम 2022 के स्वागत को आतुर हैं। इन चुनौतियों ने 2021 के रूप-स्वरूप में भी आमूल-चूल बदलाव कर दिया है । आइए ,  नज़र डालते हैं उन चुनौतियों पर ,  जो भविष्य पर असर डालेंगी- 1. स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए बजट में अधिक राशि का आवंटन करना और नए शोधकार्य को बढ़ावा देना- कोरोना वायरस से हुए दुष्परिणामों ने स्वास्थ्य-सेवाओं की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है । विकसित देश भी ऐसे में लाचार दिखाई दिए । शायद इसीलिए ओमिक्रॉन से जूझने की तैयारी पहले से करने का प्रयास जारी है। 2. ज़्यादा स्मार्ट शहरों का उद्भव -  संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार  2050  में दुनिया की  10  अरब आबादी के आधे से ज़्यादा लोग सिर्फ़  10  विकसित देशों में रह रहे होंगे ।जैसे-जैसे गांवों की आबादी शहरों की ओर पलायन करेगी ...

नया वर्ष... नए संकल्प....नई चुनौतियां....

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नया वर्ष... नए संकल्प....नई चुनौतियां.... देखो नूतन वर्ष हैं आया, धरा पुलकित हुई, गगन मुस्काया। एक खूबसूरती, एक एहसास एक ताज़गी, एक विश्वास एक सपना, एक सच्चाई एक कल्पना, एक एहसास। यही हैं एक नव वर्ष की शुरुआत। वास्तव में, नया वर्ष, नए संकल्पों, नए स्वप्नों और नए सृजन का ही तो साक्षी पर्व है। नव वर्ष हमें ओढ़ने का नहीं, आत्मसात कर लेने का आह्वान करता है। आत्मसात करने से जीवन की कायाकल्प हो जाती है, जबकि ओढ़ी हुई चादर तो समय के साथ हट जाती है। नए साल के संदर्भ में सोचती हूं, तो आभास होता है कि मानो साल समय के पर्यटन स्थल का वह नन्हा मार्गदर्शक है, जिसकी अंगुली थामकर हम इस पर्यटन स्थल की बारह महीने सैर करते हैं। बारहवें माह तक यह वृद्ध हो चुका होता है, तब यह हमारी अंगुली एक नए मार्गदर्शक को थमाकर हमसे विदा हो जाता है। हमारी नियति इन्हीं नन्हीं अंगुलियों के भरोसे अपनी यात्रा करने की है और इतिहास गवाह है कि शिशु कभी छलते नहीं हैं। आज जब हम इस शिशु की अंगुली थामकर अपनी यात्रा आगे बढ़ा रहे हैं, तो यह विश्वास करना चाहिए कि हमें यह शिशु वर्ष 2022 में हर्ष और उल्लास, विकास और प्रगति तथा समृद्धि औ...

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

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  भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से   मैंने उसको   जब-जब देखा , लोहा देखा , लोहे जैसा-- तपते देखा , गलते देखा , ढलते देखा , मैंने उसको   गोली जैसा चलते देखा!   स्त्री विमर्श एक वैश्विक विचारधारा है । हर देश का अपना अलग-अलग बुनियादी सामाजिक ढांचा है। ऐसे आंदोलन वैश्विक विचारधारा के विकास में सहायक हो सकते हैं , लेकिन यह ज़रुरी नहीं है कि हर आंदोलन किसी वैश्विक विचारधारा की सैद्धांतिकी को आधार बना कर चले। किसी एक मुद्दे को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अपनी चेतना में कई स्तरों पर न्याय की लड़ाई को समेटे रहता है। भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आंदोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है। राष्ट्रवादी आंदोलन वाला स्त्री आंदोलन: बन गई स्त्री की राष्ट्रमाता छवि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का मूल ढांचा पितृसत्तात्मक राष्ट्रवाद का है , लेकिन भारत में स्त्री आंदोलन भी इसी ढांचे के साथ विकसित होता हुआ दिखाई देता है। उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध और बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध...