सहानुभूति या समानुभूति-क्या अंतर है इनमें?
सहानुभूति या समानुभूति-क्या अंतर है इनमें ? सहानुभूति में हम दूसरे के दुख को पहचानकर उसे दूर करने के बारे में सोचते हैं , लेकिन खुद दुखी नहीं होते। इसमें दया करने से अपनी श्रेष्ठता का अहंकार पनपता है। समानुभूति यानी दूसरा जैसा महसूस कर रहा है , वैसा महूसस करना। इसमें संवेदना का व्यवहार नहीं , व्यवहार में संवेदना झलकती है। दोनों में संवेदना की गहराई का फर्क है। अतिशय व्यक्तिवादिता से पीड़ित जिस हिंसक समाज में हम आज जी रहे हैं , वह आक्रामक स्पर्धा को बढ़ावा देकर व्यक्ति को व्यक्ति के खिलाफ़ टकराव की स्थिति में खड़ा कर देता है। आज हम ऐसे संवेदनहीन समूह में बदलते जा रहे हैं , जहां हर ‘दूसरा’ हमारा प्रतिद्वंद्वी है , उसका सुख-दुःख हमें नहीं व्यापता। मानवीय संबंधों में बिखराव के पीछे तो यह है ही , राष्ट्रों के बीच टकराव के पीछे भी कुछ हद तक यह ज़िम्मेदार है। समानुभूति का मतलब है -‘ दूसरा जैसा महसूस कर रहा है , वैसा ही महसूस करना’। इसके लिए स्वयं को दूसरे के स्थान पर रखकर सोचना होता है। सहानुभूति में हम दूसरे के दुख को पहचानकर उसकी मदद करने की सोचते हैं। हमार...