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Showing posts from May, 2023

‘कसप’- मनोहर श्याम जोशी -एक समीक्षा

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  ‘कसप’ - मनोहर श्याम जोशी - एक समीक्षा कुमाऊँनी में ‘कसप’ का अर्थ है ‘क्या जाने’। मनोहर श्याम जोशी का ‘ कुरु-कुरु स्वाहा ’ ‘एनो मीनिंग सूँ ?’ का सवाल लेकर आया था , वहाँ ‘ कसप’ जवाब के तौर पर ‘क्या जाने’ की स्वीकृति लेकर प्रस्तुत हुआ।   किशोर प्रेम की नितांत सुपरिचित और सुमधुर कहानी को ‘कसप’ में एक वृद्ध प्राध्यापक किसी अन्य (कदाचित् नायिका के संस्कृतज्ञ पिता) की संस्कृत कादंबरी के आधार पर प्रस्तुत कर रहा है। मध्यवर्गीय जीवन की टीस को अपने पंडिताऊ परिहास में ढालकर यह प्राध्यापक मानवीय प्रेम को स्वप्न और स्मृत्याभास के बीचोंबीच ‘फ्रीज’ कर देता है। मनोहर श्याम जोशी जी ने इस उपन्यास के शीर्षक के बारे में लिखा था , ‘ इस कथा के जो भी सूझे , मुझे विचित्र शीर्षक सूझे। कदाचित इसलिए कि इस सीधी-सादी कहानी के पात्र सीधा-सपाट सोचने में असमर्थ रहे। ‘ वस्तुतः एक प्रेम-कथा है ‘कसप’। भाषा की दृष्टि से कुछ नवीनता लिए हुए। कुमाऊँनी के शब्दों से सजी ‘कसप’ की हिंदी चमत्कृत करती है। इसी कुमाऊँनी मिश्रित हिंदी में मनोहरश्याम जोशी ने कुमाऊँनी जीवन का चित्ताकर्षक चित्र उकेरा है ‘कसप’ में। सम...

सुंदरता है कहां?

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  सुंदरता है कहां ?   जो तुम आ जाते एक बार कितनी करूणा कितने संदेश पथ में बिछ जाते बन पराग गाता प्राणों का तार तार अनुराग भरा उन्माद राग आँसू लेते वे पथ पखार ! जो तुम आ जाते एक बार !! कमरे में आदमकद   शीशे के सामने बैठे हुए उसे काफी देर हो गई।   ना जाने यह दर्पण उसे क्या बता रहा है ? अथवा वह खुद ही इस कांच के टुकड़े में कुछ ढूंढ रही है , जरीदार लाल साड़ी , हाथों में भरी-भरी लाल चूड़ियां...अंग प्रत्यंग में अपनी आभा विकीर्ण करते स्वर्ण आभूषण.. सिर में लाल रंग की रेखा बनाता सिंदूर , उसके नववधू होने की पहचान दे रहे थे , किंतु साज़ोसामान से भरा पूरा कमरा , ऐश्वर्यावान होने की गवाही देने के लिए काफी था। उसकी निजी थाती के रूप में अलमारी में करीने से सजी पुस्तकें यहां यह भी बता रही थी कि यहां विद्या निवास है। धन-ऐश्वर्य-विद्या की अभिरुचि और उपस्थिति के बावजूद वह उदास थी। पलकें व्यथा के भार से बोझिल थीं।   मुख पर उभरने वाली आड़ी-तिरछी रेखाओं ने उदासी का स्पष्ट रेखांकन कर दिया था। मुख मनुष्य का भाव दर्पण होता है। इन्हीं गहन आयामों में होने वाली हलचलें इ...

हिंदी पत्रकारिता:जन सरोकार की पत्रकारिता

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                                                         हिंदी पत्रकारिता:जन सरोकार की पत्रकारिता                                                https://youtu.be/UUyNo3EmwuY हिंदी पत्रकारिता जन सरोकार की पत्रकारिता है , जिसमें माटी की खुशबू महसूस की जा सकती है। समाज का प्रत्येक वर्ग फिर चाहे वो किसान हो , मजदूर हो , शिक्षित वर्ग हो या फिर समाज के प्रति चिंतन-मनन करने वाला आम आदमी सभी हिंदी पत्रकारिता के साथ अपने को जुड़ा हुआ मानते हैं। 30 मई ' हिंदी पत्रकारिता दिवस ' देश के लिए एक गौरव का दिन है। आज विश्व में हिंदी के बढ़ते वर्चस्व व सम्मान में हिंदी पत्रकारिता का विशेष योगदान है। हिंदी पत्रकारिता की एक ऐतिहासिक व स्वर्णिम यात्रा रही है , जिसमें अनेक ...

बॉडी शेमिंग

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                                                                           बॉडी शेमिंग हम सभी की अपनी असुरक्षाएं हैं। चाहे हम अपने वज़न , अपनी सामाजिक आर्थिक स्थिति , अपनी शारीरिक बनावट या अपनी नौकरी के संबंध में असुरक्षा से निपटते हों , हम सभी असुरक्षित होने की भावनाओं का अनुभव करते हैं। हमारी व्यक्तिगत असुरक्षाएं केवल तभी बदतर हो सकती हैं , जब दूसरे लोग उनका फ़ायदा उठाते हैं। जब कोई व्यक्ति विशेष रूप से सार्वजनिक सेटिंग में हमारी कमज़ोरियों को उजागर करता है , तो यह व्यक्ति का सबसे बड़ा डर बन सकता है क्योंकि यह शर्मिंदगी , चिंता , उदासी , क्रोध , भय , कम आत्म-मूल्य , कम आत्म-छवि , कम आत्म-सम्मान आदि को बढ़ावा दे सकता ...