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Showing posts from August, 2025

हिंदी शिक्षक

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"हिन्दी शिक्षकों की कमी : शिक्षा की आत्मा पर संकट" भाषा की कमजोरी से पूरे शिक्षा तन्त्र पर असर हरियाणा के विद्यालयों में अध्यापकों के सोलह हज़ार आठ सौ चालीस पद रिक्त हैं, जिनमें सर्वाधिक कमी हिन्दी विषय की है। हिन्दी केवल एक विषय नहीं बल्कि सम्पूर्ण शिक्षा की आत्मा है। भाषा की कमजोरी से गणित, विज्ञान और अन्य विषयों की समझ भी प्रभावित होती है। सरकार ने अस्थायी नियुक्तियाँ तो की हैं, पर स्थायी भर्ती की गति धीमी है। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो शिक्षा का स्तर गिरने के साथ-साथ सांस्कृतिक जड़ों से भी दूरी बढ़ेगी। - डॉ सत्यवान सौरभ हरियाणा विधानसभा में हाल ही में प्रस्तुत आँकड़े यह चौंकाने वाले तथ्य सामने लाते हैं कि प्रदेश के चौदह हज़ार दो सौ पचानवे विद्यालयों में से सोलह हज़ार आठ सौ चालीस पद अध्यापकों के रिक्त पड़े हैं। यह केवल संख्या नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की गहरी चिन्ता का विषय है। और सबसे अधिक चिन्ताजनक तथ्य यह है कि इन रिक्तियों में सर्वाधिक पद हिन्दी विषय के अध्यापकों के हैं। हिन्दी केवल एक विषय नहीं, बल्कि सम्पूर्ण शिक्षा का आधार है। भाषा वह माध्यम है, जिसके ज़रिये ...

स्वेटर

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अक्सर मेरी माँ ऊन का कमाल करती             दो सलाइयों से एक तार बुना करती                         दो सीधा दो उल्टा कर आकार दिया करती  मेरे लिए ढेर सारा प्यार बुना करती   ऊन का गोला है, या शैतान खरगोश  पूरे घर में करता और पोषम पा खेला करता|  मां आकारों के खेलों  से पोशाक बना दिया करती     माँ मन चाहा ऊनों को आकार दिया करती              कभी ओज, कभी अतिशयोक्ति रस से शृंगार  किया करती  मेरे लिए ढेर सारा प्यार बुना करती    शृंगार का जादू  होता उसके थरथराते हाथों में              वह छोटे से पटल पर बड़े बड़े पैमाने रचा करती                              माँ के ऊनों  के खेलों  की यही  सीख अनूठी  है                ...

आखिर विद्यार्थी किस दिशा में जा रहे हैं?

  आखिर विद्यार्थी किस दिशा में जा रहे हैं ?   “ शिक्षा , संस्कार और समाज की जिम्मेदारी : बदलते विद्यार्थी -शिक्षक संबंध और सही दिशा की तलाश”   समाज का दर्पण कहलाने वाला विद्यालय आज एक गहरी चिंता का विषय बन गया है। जहाँ पहले शिक्षा का अर्थ केवल ज्ञान नहीं बल्कि संस्कार , अनुशासन और नैतिकता था , वहीं अब कुछ घटनाएँ यह सोचने पर मजबूर कर रही हैं कि हमारे विद्यार्थी   आखिर किस दिशा में जा रहे हैं। हाल ही में हरियाणा के भिवानी जिले के ढाणा लाडनपुर गाँव के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुई घटना , जहाँ एक विद्यार्थी   ने अपने ही शिक्षक पर हमला कर दिया , यह सवाल और गंभीर हो जाता है। यह घटना सिर्फ एक शिक्षक और एक विद्यार्थी   के बीच का विवाद नहीं बल्कि पूरे शिक्षा-तंत्र और समाज के लिए चेतावनी है।   भारतीय परंपरा में गुरु को ईश्वर से भी उच्च स्थान दिया गया है – गुरु ब्रह्मा , गुरु विष्णु , गुरु देवो महेश्वरः। लेकिन आज की वास्तविकता यह है कि कई जगहों पर शिक्षक-विद्यार्थी   संबंधों में खटास बढ़ती जा रही है। पहले शिक्षक की डांट को भी विद्यार्थी प्...

और न जाने क्या-क्या?

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  कभी गेरू से,भीत पर लिख देती हो, शुभ लाभ ,सुहाग पूड़ा ,बाँसबीट  हारिल सुग्गा,डोली कहार कनिया वर,पान सुपारी मछली पानी,साज सिंघोरा,अहोई माता  और न जाने क्या-क्या?   अँचरा में काढ़ लेती हो,फुलवारी राम सिया,सखी सलेहर,तोता मैना मछली-मोर ,सखियाँ ,राधा-कृष्ण  और न जाने क्या-क्या? तकिए  पर,जय सिया-राम ,नमस्ते चादर पर ,पिया मिलन,चातक का जोड़ा  और न जाने क्या-क्या? परदे पर ,खेत पथार,बाग बगइचा चिरई चुनमुन,कुटिया पिसीआ,झुम्मर सोहर बोनी कटनी,दऊनि ओसऊनि,हाथी घोड़ा ऊँट बहेड़ा,और न जाने क्या-क्या? गोबर से लीपती हो ,गौर गणेश,चान सुरुज नाग नागिन,ओखरी मूसर,जांता चूल्हा हर हरवाहा,पोखर-बावड़ी  और न जाने क्या-क्या? जब तुम लिखती हो ,गेरू या गोबर से  या काढ़ रही होती हो,,बेलबूटे या लीप रही होती हो, देहरी-अंगना  तो तुम  सँजोती हो  प्रेम सँजोती हो  सपना सँजोती हो गृहस्थी सँजोती हो वन सँजोती हो प्रकृति सँजोती हो पृथ्वी  सँजोती हो नवांकुर सँजोती हो जीवन सँजोती हो परिवार और सँजोती हो पीढ़ियाँ    और न जाने क्या-क्या? क्योंकि संवाहक हो तुम ...

संचार और शिक्षा: तकनीक ने बदली शिक्षण पद्धति

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संचार और शिक्षा: तकनीक ने बदली शिक्षण पद्धति विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभयंसह।   अविद्यया मृत्युं तीर्त्वा विद्ययामृतमश्नुते॥ अर्थात जो व्यक्ति विद्या और अविद्या दोनों को समझता है , वह अविद्या से मृत्यु को तो पार कर सकता है, परंतु वह अमरत्व विद्या से ही प्राप्त करता है। भावार्थ यह है कि सच्ची शिक्षा केवल बाह्य ज्ञान नहीं , आत्मज्ञान भी है, जो जीवन को गहराई और दिशा देता है। शिक्षा शब्द संस्कृत भाषा की ‘शिक्ष्’ धातु में ‘अ’ प्रत्यय लगाने से बना है। ‘शिक्ष्’ का अर्थ है सीखना और सिखाना। ‘शिक्षा’ शब्द का अर्थ हुआ सीखने-सिखाने की क्रिया। इस तरह से शिक्षा का आशय ज्ञान , सदाचार , तकनीकी दक्षता आदि हासिल करने की प्रक्रिया से है। समाज एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को अपने ज्ञान का हस्तांतरण शिक्षा के माध्यम से करने का प्रयास करता है। शिक्षा एक ऐसी संस्था है , जो व्यक्ति को समाज से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा समाज एवं संस्कृति की निरंतरता को बनाए रखती है। एक बच्चा शिक्षा से ही अपने समाज के आधारभूत नियमों , व्यवस्थाओं , प्रतिमानों एवं मूल्यों को सीखता है। बच्चा समाज से तभी...

तकनीक एकीकृत पाठ एवं तकनीक एकीकृत कक्षा के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का डिज़ाइन

 तकनीक एकीकृत पाठ एवं तकनीक एकीकृत कक्षा के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का डिज़ाइन तकनीक एकीकृत पाठ (Technology-Integrated Lesson) वह शिक्षण पद्धति है जिसमें पारंपरिक पाठ्यक्रम को डिजिटल उपकरणों, ऑनलाइन संसाधनों और इंटरएक्टिव तकनीकों के साथ जोड़ा जाता है ताकि सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावशाली, सहभागी और समकालीन बन सके। तकनीक एकीकृत पाठ का अर्थ " जब chalk और chip साथ मिलकर ज्ञान का नया संसार रचते हैं। " यह ऐसा पाठ है जिसमें शिक्षक तकनीकी संसाधनों का उपयोग करके विषयवस्तु को प्रस्तुत करते हैं, जैसे कि: स्मार्ट बोर्ड पर वीडियो दिखाना ऑनलाइन क्विज़ लेना AR/VR के माध्यम से ऐतिहासिक स्थलों की सैर कराना Google Docs पर समूह में कहानी लिखवाना मोबाइल ऐप से गणित के सूत्रों का अभ्यास कराना  उद्देश्य सीखने को अधिक आकर्षक और संवादात्मक बनाना विभिन्न प्रकार के शिक्षार्थियों की ज़रूरतों को पूरा करना वास्तविक जीवन से जोड़कर विषय को प्रासंगिक बनाना डिजिटल साक्षरता और 21वीं सदी के कौशलों को बढ़ावा देना तकनीक एकीकृत कक्षा (Technology-Integrated Classroom) वह शिक्षण वातावरण है जहाँ पारंपरिक शिक्षण...