स्वेटर




अक्सर मेरी माँ ऊन का कमाल करती            

दो सलाइयों से एक तार बुना करती                        

दो सीधा दो उल्टा कर आकार दिया करती 

मेरे लिए ढेर सारा प्यार बुना करती  


ऊन का गोला है, या शैतान खरगोश 

पूरे घर में करता और पोषम पा खेला करता| 

मां आकारों के खेलों  से पोशाक बना दिया करती    

माँ मन चाहा ऊनों को आकार दिया करती             

कभी ओज, कभी अतिशयोक्ति रस से शृंगार  किया करती 

मेरे लिए ढेर सारा प्यार बुना करती  


 शृंगार का जादू  होता उसके थरथराते हाथों में             

वह छोटे से पटल पर बड़े बड़े पैमाने रचा करती                             

माँ के ऊनों  के खेलों  की यही  सीख अनूठी  है                 

छूट जाए फंदा या आ जाए मुश्किल कोई 

चाहे पूरा स्वेटर खोल कर करना पड़े नाप तोल  

फ़िर से करना प्रयास, 

 करते रहना पुनः  प्रयास|


मां स्वेटर बुनती, मैं देखती,

मां स्वेटर उधेड़ती, मैं देखती,

मां फंदे उठाती , मैं देखती,

मां ऊन के रंग मिलाती, मैं देखती,

 यूँ ही देखते-देखते, बन गई आदत मेरी  

जोड़ गई हजारों नई मंजिलें वे शख्सियत में मेरी |

जोड़ गई हजारों नई मंजिलें वे शख्सियत में मेरी |


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