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Showing posts from October, 2022

विविधता में एकता-हिंद की विशेषता

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  विविधता में एकता-हिंद की विशेषता   भारतीय संस्कृति में विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक तत्वों का एक अनुपम समन्वय देखने को मिलता है। ये विविधताएं भारतीय समाज व संस्कृति में चार चाँद लगाती है। वास्तव में भारतीय संस्कृति में दूसरों के सांस्कृतिक तत्वों को आत्मसात करने और अपने अंदर उनको उपयुक्त स्थान प्रदान करने की अद्भुत शक्ति है। इसी सौंदर्य को देखकर ही अनेक विदेशियों ने भारत में प्रवेश किया। इनकी संस्कृति एक-दूसरे से काफी भिन्न होने के बावजूद भी भारत ने इनको ग्रहण किया और उसे अपने साथ मिला लिया। इसी प्रकार समय की मांग को देखते हुए भारत ने विभिन्न सांस्कृतियों के विभिन्न तत्वों को आत्मसात करके अपनी संपन्नता को बढ़ाया। भारत ने ग्रहण किए जा सकने वाले सभी तत्वों को ग्रहण किया। इन विविधताओं को निम्न प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता हैं - 1. भौगोलिक दशाओं की विविधताएँ - भारत का क्षेत्रफल काफी बड़ा है। अतः यहाँ भौगोलिक विविधताओं का पाया जाना स्वाभाविक है। भारत में यदि एक ओर बर्फ़ से ढकी हिमालय पर्वत की चोटियां हैं , तो दूसरी ओर लहराता समुद्र और खाड़ियां भी हैं। भारत में यदि एक और राज...

जीवन:एक उत्सव

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  जीवन:एक उत्सव जीवन क्या है, क्या नहीं है, यह तय करना सरल भी है, और चुनौतीपूर्ण भी| हम में से अधिकतर लोग जीवन के हर प्रसंग का उत्सव मनाना चाहते हैं| प्रतिदिन सोना-जागना-उठना-घूमना-खाना-पीना-कमाना आदि-आदि..शायद रोज़मर्रा की एकरसता को बदलने के लिए हम सब जीवन के हर प्रसंग में सदैव कुछ न कुछ उत्सव करने की सहज चाहना रखते हैं| कई लोगों को यह लगता है कि मनुष्य द्वारा सृजित उत्सव परंपरा पर मनुष्यों का ही एकाधिकार है, पर वास्तविकता में ऐसा नहीं है| मनुष्य की उत्सव परंपरा के समान एक निश्चित प्राकृतिक उत्सव क्रम भी है, जैसे वसंत ऋतु में आम पर बौर आना आम के उत्सव का प्रारंभ है, आम पर फल लगने की शुरुआत छोटी-छोटी कैरियों से लेकर आम के पेड़ का आम से लद जाना, आम की उद्यमिता का चरम है| ऐसे ही हरसिंगार के पेड़ पर जो फूलों की बहार आती है, वो हर सुबह अपनी आधार भूमि को अपनी खुशबू की चादर ओढ़ाकर जीवन-यात्रा का अभिनंदन करती है| हरीतिमा से सराबोर गेहूं और धान के खेतों में उत्सव की शुरुआत बालियों की बारात निकलने से होती है, तो मक्का, ज्वार व बाजरा में दाने पड़ने से अनाज-उत्सव की शुरुआत होती है,जो छोटी-बड़...

आइए, इस दिवाली मन-मंदिर में दीप जलाएं

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  आइए , इस दिवाली मन-मंदिर में दीप जलाएं   दीपावली सुख-समृद्धि के आहवान का पर्व है। लक्ष्मी की पूजा की जाती है। कहते हैं दीपावली के दिन लक्ष्मी साफ-सुथरे घरों में ही प्रवेश करती हैं गंदे घरों में नहीं। घर साफ-सुथरा और स्वच्छ है , तो उसमें रहने वाले भी स्वस्थ और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होंगे। इसीलिए हम सब दीपावली आने से कुछ पहले ही घरों की गहन सफाई में जुट जाते हैं , साल भर का जमा कूड़ा-करकट और रद्दी निकाल कर कबाड़ी को बेच देते हैं और उनकी जगह नई उपयोगी चीज़ें   लाते हैं…अपने घर को सजाते हैं , दीपों को रोशन कर अंधकार को ख़त्म करते हैं…कितना अच्छा लगता है न ये सब! बचपन की दिवाली मन की दिवाली होती थी। दीपावली आते ही मन में होने लगता था , कई सारी चीज़ों   का उत्साह। नए कपड़े , पटाखे , रंगोली का नया डिज़ाइन आदि कई चीज़ें कौतूहल का विषय होती थीं और इन सबके बीच बनती थीं , मठरी , कचौरी , नमकीन और मावे से भरी गुझिया और...और चकरी , फुलझड़ी , अनार-से दैदीप्यमान हमारे सपने। आज समय बदला है , जीवन बदला है और बदली है हमारी दिवाली | इन बदलावों के बीच एक अटल सत्य नहीं बदला , कि म...

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम-ज़िंदगी के हर मोड़ पर रहे बेमिसाल

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  डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम-ज़िंदगी के हर मोड़ पर रहे बेमिसाल “अगर किसी देश को भ्रष्टाचार मुक्त और सुन्दर विचार वाले लोगों का देश बनाना है , तो मेरा दृढ़तापूर्वक मानना है कि समाज के तीन प्रमुख सदस्य माता , पिता , और गुरु ये कर सकते हैं ” – डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम को “मिसाइल मैन ऑफ इंडिया” , के नाम से जाना जाता है। कलाम को भारत के प्रमुख वैज्ञानिक , लेखक , प्रोफेसर , एयरोस्पेस इंजीनियर जैसे नाम दिए गए   हैं , जो भारत के सबसे प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में सदैव याद किए जाते रहेंगे । डॉ. अब्दुल पाकिर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था। उन्होंने सेंट जोसेफ कॉलेज तिरुचिरापल्ली में भौतिकी और मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) चेन्नई में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग का अध्ययन किया। डॉ. कलाम भारत के रक्षा अनुसंधालय में काम करते थे और भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में मजबूत बनाना चाहते थे। 1998 में , भारत के परमाणु हथियार के सफल परीक्षण के बाद , वे   राष्ट्रीय नायक बन गए औ...