जब चाँद हासिल हो जाता है


 

जब चाँद हासिल हो जाता है


जब चाँद हासिल हो जाता है,

अँधेरा पीछे छूट जाता है,

जो डर था रातों के सन्नाटे में,

वो अब कहानी बन जाता है।


जब चाँद हथेली पर झिलमिलाए,

दिल कुछ पल को ठहर-सा जाए,

जो चाहत थी बरसों की धड़कन,

वो पल में ही धुँधला जाए।


जब चाँद नज़रों से लग जाता है,

सूना आसमान तो लजाता है,

जो सपना इतना उजला था,

वो मिलके फीका पड़ जाता है।


जब चाँद सिरहाने चमक उठे,

तो तारे ग़म में छिप जाते हैं,

जो मन ने सपने देखे पाने के,

वो मिलने पर बिखर जाते हैं।


जब चाँद हासिल हो जाता है,

तो चाहत का रहस्य खुल जाता है,

पाना नहीं, खोना कठिन होता —

यही प्रेम का सच कहलाता है।

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