EPISODE-17 आखिर इस मर्ज़ की दवा क्या है? 28/08/26
EPISODE17
आखिर इस मर्ज़
की दवा क्या है? 28/08/26
INTRO MUSIC
नमस्कार
दोस्तों! मैं मीता गुप्ता, एक
आवाज़, एक
दोस्त, किस्से
कहानियाँ सुनाने वाली आपकी मीत। जी हाँ, आप सुन रहे हैं मेरे पॉडकास्ट, ‘यूँ ही कोई मिल
गया’ के दूसरे सीज़न का अगला एपिसोड ... जिसमें हैं, नए जज़्बात, नए किस्से, और वही पुरानी
यादें...उसी मखमली आवाज़ के साथ...। जी हाँ दोस्तों, जीवन की राह पर
चलतेचलते अनेक लोग हमें मिलते हैं, कुछ को हम भूल जाते हैं, कुछ याद रह
जाते हैं और कुछ हमें सोचने के लिए मजबूर कर जाते हैं। जैसे, मुझे याद आता
है, अमित।
एक दिन मेरे पास आया और बोला, मैम, मुझे लगता है कि मैं तनाव से पीड़ित हूँ, डिप्रेशन में
हूँ।। बस, मैंने
कह दिया, कह दिया
न आपसे..। मेरे लिए.. मेरे लिए यह एक रहस्योद्घाटन था, क्यों? क्योंकि आम तौर
पर लोग ऐसी बात दूसरों के सामने ज़ोर से नहीं कह पाते हैं, कहने की बात तो
दूर, वे तो
मानते ही नहीं कि उन्हें कोई परेशानी है भी। किसी को कह कर तो देखो, तुरंत जवाब
आएगा मैं पागल हूँ क्या? कितनी
आसानी से लोग ‘पागल’ शब्द का प्रयोग कर लेते हैं। है न दोस्तों! इसीलिए, आज हम बात
करेंगे, तनाव
की, डिप्रेशन
की, इसकी
वजहों की, इसे
प्रबंधित करने के तरीकों की.. आज के समय में इस विषय से भाग ही नहीं सकते। मुझे तो
लगता है कि तनाव न केवल आधुनिक जीवन का संकेत बन गया है, बल्कि यह आधुनिक जीवन का उपहार
है, है न दोस्तों? चलिए, आज
इसी के
बारे में बातचीत करते हैं, तो चलिए, मेरे साथ बातचीत के इस सफ़र पर..
MUSIC
दरअसल दोस्तों, आज के दौर की
सबसे बड़ी समस्या का नाम अगर कुछ है, तो वो है तनाव। सभी रोगों का जनक, हरेक को हैरान परेशान
करने वाला मर्ज़, ये हर
जगह मिलता है, लेकिन
इसकी कोई दवा कहीं नहीं मिलती। आज इस समस्या से संसार के लगभग अस्सी प्रतिशत
लोग, जी हाँ, 80 परसेंट लोग
जूझ रहे हैं। हम सभी जानते हैं कि हर रोग पहले मन में जन्म लेता है और बहुत बाद
में जाकर देह पर उसका असर देखने को मिलता हैं। ये तनाव भी ऐसा ही मर्ज़ है।
उपचार के बाद
अमित अपनी डायरी में लिखता हैमैं अब अपने बारे में खुलकर और ईमानदारी से बात करने
लगा हूँ। मैंने बड़ी कठिनाई से यह सीखा है कि लोगों से बात करना कितना ज़रूरी है, अपने हितैषियों
को यह बताना कितना महत्वपूर्ण है कि आप क्या महसूस कर रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण
बात जो मैंने सीखी वह यह है कि मैं अजेय नहीं हूँ, मैं टूट सकता हूँ औरों की तरह, मैं भी औरों की
तरह ही हूँ, उनसे अलग नहीं, कमज़ोरियाँ मुझमें भी हो सकती हैं, पर हाँ, मैं
कोशिश ज़रूर कर सकता हूँ, कोशिश
मेरे हाथ में है न..।
Music
दोस्तों! तनाव
एक अनुक्रिया है, जिसका
असर हमारे मन और देह दोनों पर पड़ता है। हमारे शरीर में मनोवैज्ञानिक यानी
साइकोलॉजिकल तथा दैहिक यानी फिजियोलॉजिकल, दोनों तरह की अनुक्रियाएँ होती हैं, यानी व्यक्ति
जब तनाव में होता है, तो
मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से क्षुब्धता यानी डिस्टर्बेंस का अनुभव करता है। जब
ये अनुक्रियाएँ मनोवैज्ञानिक हों, तो व्यक्ति बहुत परेशान हो जाता है। उसे व्यर्थ
की चिंताएँ, आशंकाएँ, डर, संदेह घेरे
रहते हैं। कभी उसे बहुत क्रोध आता है, तो कभी उसका व्यवहार आक्रामक हो जाता
है। आशंकाएँ, चिंताएँ
उसे इतना घेर लेती हैं कि वो उनसे निबटने में खुद को अक्षम पाता है। अगर ये
अनुक्रियाएँ दैहिक हों, तो
व्यक्ति का रक्तचाप बढ़ जाता है, पेट में गड़बड़ी, हृदयगति असामान्य, साँस की गति
में परिवर्तन आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं इन अनुक्रियाओं के परिणामस्वरूप
व्यक्ति के शरीर में शर्करा यानी शुगर की मात्रा बढ़ जाती है, हारमोन
असंतुलित हो जाते हैं और कैंसर, मधुमेह आदि कई रोग जकड़ लेते हैं। इन दैहिक अनुक्रियाओं
का एकमात्र उद्देश्य होता है कि किस तरह से तनाव के साथ समायोजन बिठाया जाए।
चिकित्सक इनका इलाज दवाओं द्वारा करते हैं। लेकिन मन को तनाव रहित करने के लिए
मनोचिकित्सकों या थेरेपिस्ट या काउंसलर की ज़रूरत होती है।
Music
दोस्तों, ऐसा देखा गया
है कि अक्सर तनाव को नकारात्मक घटनाओं से या दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं यानी नेगेटिव
इवेंट से जोड़ कर देखा जाता है जबकि सच्चाई यह है, कि तनाव सकारात्मक घटनाओं से भी होता
है| उदहारण के लिए, विवाह
के समय होने वाला तनाव, अच्छे
पद पर पदोन्नति के लिए तनाव, बहुत बड़ा पुरस्कार या इनाम पाने पर तनाव, किसी लेखक को
उसकी आने वाली नई पुस्तक को लेकर तनाव, तो किसी अभिनेता को आने वाली नई
फिल्म को लेकर तनाव हो सकता है।
कभी कभी
व्यक्ति को किसी व्यक्ति विशेष से तनाव होता है, और वो व्यक्ति सामने बना रहे, तो वह उसके
प्रति आक्रामक हो जाता है। लेकिन कभी कभी व्यक्ति को पता ही नहीं चलता कि उसकी
निराशा, कुंठा, हताशा का आखिर
कारण क्या है? वो
खोजता रहता है कि उसकी कुंठा या परेशानी का सबब क्या है? स्रोत यानी
सोर्स कहाँ है? कभी जो
स्रोत मिल भी जाए, तो
व्यक्ति किसी कारणवश या परिस्थितिवश उस शक्तिशाली स्रोत के प्रति आक्रामक नहीं हो
पाता, तो वो
खुद से कमज़ोर व्यक्ति या वस्तु पर क्रोध निकालता है और तनाव कम करता है। उदहारण के
लिए यदि पति पत्नी में झगड़ा होता है, तो क्रोध बच्चों पर निकाला
जाता
है। दफ्तर का गुस्सा, अपने
बॉस का गुस्सा, घरवालों पर निकालता है और आखिर में वे बेकसूर बच्चे अपना गुस्सा घर
की चीज़ों या बेज़ुबान खिलौनों को तोड़ कर, किताबों को फाड़ कर निकालते हैं।
आखिर नजला तो नीचे की ओर ही बहेगा न..।
Music
दोस्तों, जो
लोग क्रोध को व्यक्त नहीं कर पाते, वो मन में घुटते हैं और गहरे विषाद
तथा भावशून्यता में चले जाते है। जब आक्रमकता दिखाने पर भी उन्हें सफलता नहीं
मिलती, तो वो
उस वस्तु के प्रति उदासीन हो जाते है एवं खुद को निस्सहाय सा पाते हैं और अपने में
ही गुम हो जाते हैं।
कुछ लोग तनाव
में आकर अपनी सबसे प्रिय चीज़ को ही चोट पहुँचाते हैं, या अपनी कोई अति प्रिय वस्तु
को ही तोड़ देते हैं और बाद में फिर पछताते हैं। कुछ विशेष घटनाएँ कुछ व्यक्तियों
में अधिक तनाव उत्पन्न नहीं कर पातीं, तो कुछ के लिए गहरे तनाव का कारण बनती हैं। जैसे
किसी वैवाहिक संबंध की टूटन या प्रेम में असफल होना, किसी प्रिय की मृत्यु आदि ऐसी घटनाएँ
हैं, जो कुछ
व्यक्तियों पर गहरा असर डालती हैं, तो कुछ पर इनका कम असर होता है। कभी कभी
साधारण सी घटना भी कुछ व्यक्तियों को अधिक सांवेगिक एवं दैहिक क्षति पहुँचाती है।
इनके अलावा एक और महत्वपूर्ण कारक है, जो आजकल सारी दुनिया में तनाव का कारण बना हुआ है, और वो है
कान्फ्लिक्ट ऑफ़ मोटिव्स यानी यानी प्रेरकों का संघर्ष यानी प्रतियोगिताओं के इस
दौर में एक दूजे से आगे निकल जाने की होड़। “उसकी कमीज मेरी कमीज से ज़्यादा सफ़ेद
कैसे?” की
चिंता में तनाव होता है। साथ ही केंकड़े की वृत्ति को गई है हमारी, उसकी साफ़ सुथरी
कमीज़ पर दाग कैसे लगाया जाए, यह उधेड़बुन भी तनाव को बढ़ाती है।
इसके अलावा एक
और महत्वपूर्ण कारक तनाव का है, जिसमें व्यक्ति दूसरे व्यक्ति पर निर्भरता दिखाता
है, या
उसका सुख दुःख, उसकी
हँसी ख़ुशी सब दूसरे व्यक्ति पर निर्भर हो जाती है, और जब दूसरा व्यक्ति उसे सहयोग नहीं
कर पाता, तो
तनाव उत्पन्न होता है। ये तनाव बहुत खतरनाक भी हो सकता है, क्योंकि इसमें
एक व्यक्ति की पूरी दुनिया दूसरे की हाँ और ना पर चलती है, अक्सर इस
प्रकार का तनाव किसी अप्रिय घटना का कारण भी बनता है। इसके अलावा दिन प्रतिदिन की
उलझनें जैसे बिजली नहीं आई, पानी
नहीं आया, पार्किंग
नहीं मिली या नेटवर्क नहीं है, जैसे छोटे छोटे तनाव भी व्यक्ति को परेशान करते
हैं।
Music
दोस्तों, इन सब
तनावों में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण कारक कुंठा यानी फ्रस्ट्रेशन का होना है। जब
व्यक्ति कोशिश करके भी किसी लक्ष्य पर पहुँचने में नाकाम रहता है, तो व्यक्ति में
कुंठा उत्पन्न होती है। इनमें विभेद, पूर्वाग्रह, कार्य असंतुष्टि यानी जॉब डिससैटिसफ़क्शन, प्रिय से दूरी, प्रिय की
मृत्यु आदि कारण हो सकते हैं। उसी तरह दैहिक विकलांगता, अकेलापन, अपर्याप्त
आत्मनियंत्रण, ये सभी
कुंठा के कारण बन जाते हैं।
तो दोस्तों, आखिर
इस मर्ज़ की दवा क्या है? इस
मर्ज़ का कारण चाहे जो भी हो, लेकिन यह बात तय है कि यह व्यक्ति के सांवेगिक
एवं दैहिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर तो ज़रुर डालता है। चिकित्सक तनाव कम करने की
दवा देते हैं, लेकिन
मनोविज्ञान समायोजित व्यवहार की सलाह देता है। शोध बताते हैं कि जिन व्यक्तियों
में मनोवैज्ञानिक कठोरता यानी साइकोलॉजिकल हार्डनेस अधिक होती है, वे परिस्थिति
के तनावपूर्ण होने पर भी परेशान नहीं होते। वे संतुलित और समायोजित व्यवहार द्वारा
अपने आसपास के वातावरण, उसकी
आंतरिक माँगों और उसके बीच के संघर्षों, अंतर्द्वंद्वों को नियंत्रित करना
सीख लेते हैं। वे शारीरिक सीमाओं एवं अंतर्वैयक्तिक चुनौतियों, सभी को अपने
मूल्यों, प्रसाधनों
आदि के साथ इस तरह से व्यवस्थित कर लेते हैं कि उनका प्रभाव कम से कम हो, या न हो।
लेकिन यह इतना
आसन भी नहीं है। ये समायोजन हर व्यक्ति की गति, अनुभूतियों, बौद्धिक क्षमता
तथा आत्मनियंत्रण पर निर्भर करता है। जैसे ही व्यक्ति को तनाव घेरता है, वो अपने तरीके
से इसे कम करने के प्रयास करता है। कुछ व्यक्ति कुछ ख़ास तरह का व्यवहार करते हैं, वो नशे में डूब
जाते हैं, कुछ
लोग दोस्तों का समर्थन प्राप्त करना पसंद करते हैं और समर्थन मिल जाने पर उन्हें
लगता है कि अरे!
ये समस्या तो उतनी गंभीर भी नहीं थी, जितना मैंने इसे समझा था।
Music
कभी कभी
व्यक्ति तनाव के कारण अपनी इच्छाओं का दमन करता है। अपने मन की बात को किसी से न
कहने का दुःख और अपनी इच्छाओं को, यादों को साझा न करने का दुःख उसे मन ही मन सालता
है और तनाव देता है, फिर
व्यक्ति उन समस्त यादों और इच्छाओं का दमन शुरू कर देता है, वो जानबूझ कर
अपने चेतन से, मन से, उन सभी बातों
को हटा देना चाहता है, जो
उसके दुःख का कारण बन रही हैं, ताकि वो अपना ध्यान दूसरी तरफ लगा सके, वो विकल्प
खोजता है, खुद को
व्यस्त रखता है। व्यस्त रहने और अपने शौक यानी हॉबीज़ में संलग्न होने से भी तनाव कम
होता है। अपने प्रियजनों के साथ समय बिताना, परिवार से साथ घूमने जाना, दोस्तों से
मिलना, योग प्राणायाम
मेडिटेशन आदि तनाव को दूर करने के ट्राइड और टेस्टिड तरीके हैं। अगर कहीं और जाना
संभव नहीं, तो
सुबह सैर पर तो जा ही सकते हैं।
तनाव को दूर करने
के लिए कभी कभी व्यक्ति बौद्धिकीकरण की नीति अपनाते भी देखे
गए हैं| इसमें
व्यक्ति अपने चारों और एक रक्षा प्रक्रम अपनाता है, अपना रक्षा कवच बनाता है। वो अपनी एक
खोल में क़ैद रहता है और बाहरी जगत से अलगाव या निर्लिप्तता विकसित करता है। पर
मेरे हिसाब से यह तरीका ठीक नहीं।
बहुत से लोग
सोशल साइट्स पे जाकर अपना तनाव कम करते हैं, कुछ लोग संगीत सुनकर, कुछ लोग खुद से
ही बातें करने लगते हैं। ये सभी उपाय अपना कर भी व्यक्ति तनाव से पूर्णरूप से बच
तो नहीं पाता है, उसे
कोई न कोई तनाव हर समय जकड़े ही रहता है, "मर्ज़ बढ़ता ही गया, ज्यों ज्यों
दवा की" वाले अंदाज में, पर तनाव कम ज़रूर हो जाता है।
तनाव फिर भी कम
न हो, तो
किसी योग्य चिकित्सक से बात करना ही श्रेयस्कर होता है। किसी भरोसेमंद साथी या
मित्र से अपनी परेशानी साझा की जा सकती है। याद रखिए दोस्तों, सहजता और सरलता
आपको बहुत से तनाव से बचा सकती है। झूठ, छल, प्रपंच, ईर्ष्या और
स्वार्थ हमेशा तनाव के कारण ही बनते हैं। इनसे खुद को दूर रखना होगा, कोई भी
चिकित्सक आपको सिर्फ़ परामर्श और दवा ही दे सकता है, वो आपको खुश नहीं रख सकता।
ख़ुशी आपको खोजती हुई कभी नहीं आती है, आपको जाना होता है उसके पास, अपने आसपास
खुशियाँ तलाशनी होती हैं। इस मर्ज़ का इलाज बाहर नहीं भीतर ही मिलेगा, और दवा भी भीतर
ही मिलेगी।
Music
और अंत में यह
याद रखिएगा दोस्तों! कि आपका जीवन अनमोल है, आप खुशियाँ
बांटने के लिए इस धरती पर आए हैं, और यह तभी कर पाएँगे जब आप स्वयं को
तनाव रूपी कुहासे से मुक्त करेंगे और दीपक की भांति प्रकाशित होंगे।
जी हाँ
दोस्तों! तनावमुक्त जीवन जीने के लिए तत्पर रहें, मनुष्य योनि से बढ़कर कोई योनि नहीं, मानव जीवन से
ज़्यादा खूबसूरत कुछ भी नहीं, इसका आनंद उठाइए, स्वयं भी खुश रहिए और लोगों में
खुशियाँ बाँटिए। जीवन से जुड़ी बातें हैं, ये तो चलती ही रहेंगी, इसीलिए कहती
हूँ कि अब आप बताइए कि आप तनाव को दूर करने के लिए क्या करने जा रहे हैं? अपनी कहानी, अपने किस्से
शेयर कीजिए .. कीजिइएगा ज़रूर..। मैसेज बॉक्स में लिखकर भेजिए, भेजिएगा ज़रूर, मुझे इंतज़ार
रहेगा.....
और..आप भी तो
इंतजार करेंगे न ....अगले एपिसोड का...करेंगे न दोस्तों!
सुनते रहिए, सुनाते रहिए, हो सकता है, यूँ ही बातें
करते करते आपको भी तनाव दूर करने के कुछ उपाय सूझ जाएँ और आप भी जी खोल कर जीने लग
जाएँ!.. है न दोस्तों? इसीलिए
मेरे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए...मुझे सुनिए....औरों को सुनाइए....मिलती हूँ आपसे
अगले एपिसोड के साथ...
नमस्कार
दोस्तों!....वही प्रीत...वही किस्से कहानियाँ लिए.....आपकी मीत....मैं, मीता गुप्ता...
END MUSIC
*************************************************************
Comments
Post a Comment