EPISODE-21 इश्क वाला लव ... 23/10/26

 

EPISODE 21

इश्क वाला लव ... 23/10/26

INTRO MUSIC

नमस्कार दोस्तों! मैं मीता गुप्ता, एक आवाज़, एक दोस्त, किस्से  कहानियाँ सुनाने वाली आपकी मीत, जी हाँ, आप सुन रहे हैं मेरे पॉडकास्ट, ‘यूँ ही कोई मिल गया’ के दूसरे सीज़न का अगला एपिसोड ..जिसमें हैं, नए जज़्बात, नए किस्से, और कुछ यादें..उसी मखमली आवाज़ के साथ..। जी हाँ दोस्तों, आज हम बात करेंगे इश्क की, लव की और इश्क वाले लव की.. सही सुना आपने, इश्क वाला लव.. चलिए, थोड़ा रोमानी हो जाते हैं, और डूब जाते हैं, इश्क वाले लव में..

MUSIC   

दोस्तों! न जाने इश्क आज को क्या क्या कहा जाने लगा है? इश्क सुना था, लव सुना था पर, ये इश्क वाला लव क्या है? फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर का एक गाना, एक गीत भर.. जी नहीं। दरअसल फेसबुक, ट्विटर और वॉट्सअप जैसे एप्स ने युवाओं में प्यार की परिभाषाएँ ही बदल दी हैं। क्या यह मानें कि नई जनरेशन, नई पीढ़ी, प्यार में उठने वाले भावनाओं के ज्वार को लेकर ज़्यादा प्रैक्टिकल है? पुरानी पीढ़ी के मुकाबले ज़्यादा सजग, दूरंदेशी और हर तरह की व्यावहारिकताओं को समझने वाली। इसके बावजूद वो पुराना वाला इश्क तो हो ही रहा है, जिसे यंगस्टर्स की भाषा में, इश्क वाला लव कहा जा रहा है। अलग अलग समय के साहित्य में रोमांस को तरह तरह से पेश किया गया। कहते हैं साहित्य समाज का आईना होता है। चलिए, साहित्यकारों, शायरों, सूफी संतों, वैज्ञानिकों और दार्शनिकों के नज़रिए से इश्क को समझने की कोशिश करते हैं..शायरों और साहित्यकारों ने यूँ बयाँ किया मोहब्बत को, इश्क को, इश्क वाले लव को जैसे कैफ़ी आज़मी साहब कहते हैं

बस एक झिझक है यही हाले दिल सुनाने में,

कि तेरा ज़िक्र भी आएगा इस फ़साने में।

बरस पड़ी थी जो रुख से नकाब उठाने में,

वो चांदनी है अभी तक गरीबखाने में ।।

इसी में इश्क की किस्मत बदल भी सकती थी,

जो वक्त बीत गया आज़माने में,

ये कहकर टूट पड़ा शाखे गुल से आखिरी फूल,

अब और देर है कितनी बहार आने में...

(साभार कैफ़ी आज़मी साहब)

इन पंक्तियों में शायर ने प्रेयसी को लेकर आशिक की फ़िक्र, मोहब्बत और तकलीफ़ को बेहद नज़ाकत के साथ पेश किया है। संवेदनशीलता तो देखिए कि आशिक अपना हाल ए दिल बयाँ करने से भी डरता है कि कहीं इस ज़िक्र से उसकी माशूका की बदनामी न हो जाए। कितनी कोमलता, कितनी मुरव्वत, कितनी मुहब्बत, तितली के पंखों सी रंग बिरंगी है यह चाह। अगर पश्चिम की खिड़की में झांकें, तो विलियम शेक्सपीयर कहते सुनाई देते हैं कि मेरी प्रेमिका की आँखें सूरज के जैसी नहीं हैं, मूंगा भी उसके होठों से ज़्यादा रंगीन है, बर्फ़ भी उससे ज़्यादा सफ़ेद है, काले बादलों का रंग भी उसके बालों से गहरा है, गुलाब भी उसके गालों से ज़्यादा कोमल हैं, लेकिन, लेकिन, फिर भी उसकी साँसों की महक मुझे इन सबसे अच्छी लगती है। मैं उसके चेहरे को पढ़ सकता हूँ, मुझे उसमें नज़र आता है समर्पण और प्यार, जिसके लिए मैं बरसों से प्यासा था। मुझे उसकी आवाज़ में संगीत की मिठास लगती है। मैंने कभी ईश्वर को नहीं देखा, लेकिन,लेकिन मैं अपनी प्रेमिका में उसके दर्शन पाता हूँ। वो ज़मीन पर पैर रखती है, तो ऐसा लगता है, मानो स्वर्ग से उतर रही हो। हो सकता है कि यह सब मेरी कल्पना हो, लेकिन मैं उससे प्रेम करता हूँ, यह सच्चाई है।

अब बताइए, ऐसा भी इश्क होता है कहीं?

Music  

दोस्तों, अब देखें कि गुलज़ार साहब कैसे दिले गुलज़ार करते हैं?

नज़्म उलझी हुई है सीने में, मिसरे अटके हुए हैं होठों पर,

उड़ते फिरते हैं तितलियों की तरह, लफ्ज़ कागज़ों  पर बैठते ही नहीं।

कब से बैठा हुआ हूँ मैं सादे कागज पर लिखकर नाम तिरा,

बस तिरा नाम ही मुकम्मल है, इससे बेहतर भी नज़्म और क्या होगी?

(साभार गुलज़ार)

वाह,यह इश्क की एक और इंतहा है।

प्यार..प्रेम.. इश्क..कहने को ढाई अक्षर, है न दोस्तों! मगर इज़हार करना हो, तो स्याही भी पूरी न पड़े और पन्ने खत्म हो जाएँ। सब कुछ कहने के बाद भी जाने क्यों प्रेम का इज़हार अभी भी अनकहा, अनबोला और अनलिखा सा है। फिर भी प्यार को ध्यान में रखकर रची गई कृतियाँ दिल के गिटार पर दीवानगी के सुर ज़रूर छेड़ती हैं, कभी तकियों को भिगोती हैं, कभी किसी आपबीती से जुड़कर कभी कुछ सोचने पर मजबूर कर देती हैं।

क्या प्यार अंधा होता है? प्यार करने वाले को अपनी प्रेयसी की हर बात प्यारी लगती है, इस इश्क का जादू सिर्फ़ चार मिनट में ही चल जाता है। इस आकर्षण में बड़ा योगदान हाव भाव का होता है, फिर बातचीत की गति और लहज़ा अपना असर डालता है। प्‍यार में होता है अजब सा दीवानापन, असल में जब व्यक्ति को किसी से प्यार होता है न, तो उसके दिमाग में कुछ अलग ही किस्म की हलचलें होती हैं। वह सामान्य से कुछ अलग हो जाता है। इसी को  दीवानापन कहते हैं शायद।

Music

क्या यही दीवानापन इश्क वाला लव है? क्यों दोस्तों, मुझे तो ऐसा लगता है कि इश्क वाला लव वह है, जो हमें महकाता है, बहकाता है, फिर चाहे हमारा ‘वह’ हमारे पास हो, या दूर, इससे अंतर नहीं पड़ता, अंतर क्यों नहीं पड़ता? अरे भाई, वह हममें जो समाया है। उस खास का ज़िक्र होना यानी इत्र की शीशी का खुलना और फिर इत्र की शीशी के खुलने पर चारों ओर खुशबू का बिखरना, क्या यही खुशबू इश्क वाला लव है? क्या इश्क वाले लव का संबंध इत्र से है? ऐसे इत्र से है, इत्र की ऐसी खुशबू से है? क्या इस खुशबू के होने का कोई तर्क है? क्या कोई परमिट है इसके पास? क्यों आती है यह खुशबू? कहाँ से आती है? कहाँ चली जाती है? कब तक रुकेगी? क्या इसकी कोई समय सीमा है? क्या इसकी कोई सरहद है? क्या इसका कोई पैमाना है? क्या इसका कोई आशियाना है? कौन जाने..?

यह महसूस तो होती है, उठती हुई दिखती भी है, पर जब उठती है, तो आग लगा देती है, जब बहती है, तो समंदर बहा देती है, बड़ी ही भली, बड़ी ही मासूम, बड़ी ही मीठी सी...क्या इश्क वाला लव ऐसा ही है, जैसे सपेरे की बीन, जिस तरह सपेरे की बीन बजते ही घने जंगलों से साँप निकल आते हैं, बौराए से, बलखाए से, इतराए से, बेखबर से, क्या इश्क वाला लव उन्हें खींचता है? क्या इश्क वाले लव की खुशबू रात की रानी की खुशबू से भी ज़्यादा तेज़ होती है? क्या इश्क वाले लव की पुकार कृष्ण की बंसी की तरह है, जिसने कभी किसी को नहीं पुकारा, उसे छलिए ने कभी किसी को आवाज़ भी नहीं दी, पर शायद बंसी की हर लहरी में इश्क वाले लव की खुशबू बसी होगी, उसमें एक पुकार होगी, एक सच्ची पुकार जो गोपियों को खींचकर अपनी ओर ले जाती होगी। वैसे मैंने यह भी देखा है कि इश्क वाला लव पत्थरों में हँसता है, रेगिस्तान में चमकता है, समंदरों में तैरता है, चंद्रमा में छुपा रहता है, फूलों से झाँकता है, रूह को सताता है, नींदों को उड़ा ले जाता है, आँखों से छलकता है, होठों पर सिसकता है, भीड़ में भी हमें तनहा किया जाता है, पर रात के स्याह सन्नाटों में हमें आवाज़ देता है, बेचैन करता है, जब हम सो जाते हैं, तो सपनों में आकर हँसता है, जाग जाते हैं, तो रुलाता है, बाहर ढूँढेंगे, तो रो रो कर भीतर बुलाएगा, और भीतर खोजेंगे, तो बाहर हँसती हुई आवाज आएगी, उसकी,उस इश्क वाले लव की.. 

Music

क्या यही है इश्क वाला लव? क्यों दोस्तों? क्या यह लव किसी किताब में लिखा है, ना..ना यह किसी किताब में नहीं लिखा है कि इश्क वाला लव दरअसल है कहाँ? इसलिए इसे मोटी मोटी किताबों में मत खोजना, ना कोई मंत्र है इसका ना कोई तंत्र है इसका, असली ज्ञानी वही है कि जो इसे खोज ले अपने भीतर। कि उसके हिस्से का इश्क वाला लव है कहाँ? ऐसा लव, जो दीवाना बना दे। और दीवानेपन में सयानेपन की ज़रूरत नहीं। बस पहचान की ज़रूरत है, उस खुशबू को पहचानने की, और इसके लिए किसी ग्रंथ को पढ़ना नहीं पड़ता, क्यों दोस्तों, बस आँखें बंद करके अपने मन की बात सुननी होगी, मन समझते हैं न आप?

चंदन के पेड़ आग में जलाने के लिए नहीं होते, वे तो अनमोल खुशबू हैं, इश्क वाले लव जैसी खुशबू। जैसे हम इश्क वाले लव को मन में समा लेते हैं, वैसे ही हम चंदन की खुशबू को मन में समा लेते हैं। इश्क वाले लव का रिश्ता सच्चा रिश्ता होता है और सच्चे रिश्तों की खुशबू कभी नहीं जाती। वह आपका पीछा नहीं छोड़ती, पत्ती पत्ती झड़ जाती है पौधों की, पंखुड़ी पंखुड़ी झड़ जाती है फूलों की, लेकिन खुशबू, यह इश्क वाले लव की खुशबू चुप नहीं होती, शांत नहीं बैठती, बशर्ते आप उसे सुन सकें, महसूस कर सकें और कह सकें कि यही तो है मेरा इश्क वाला लव।

Music

सच कहूँ दोस्तों! इश्क वाला लव कभी आत्मा को झकझोरता है, कभी आत्मा को सहलाता है। एक ओर हम टूटते हैं, तो दूसरी ओर, हम बिखर कर भी मुस्कराते हैं। दोनों ही रूपों में इश्क वाला लव एक गहरा अनुभव है—जो दिल को छू जाता है।

और चलते चलते बस यही कहूँगी दोस्तों! कि जब आप इश्क वाले लव में होते हैं न, तब टूटी हुई चाय की प्याली, धूल भरी हवेली या भीगी सड़क भी प्रेम की मस्ती जगाते हैं, यादों की नाज़ुक परतों में खुशबू और आवाज़ें गूँजती हैं और अंतर्मन के संवाद, खामोशी के लहज़े या अधूरे लफ़्ज़ों में भी एक मुक्कमल इश्क उभर आता है,एक मुक्कमल इश्क वाला लव उभर आता है।

याद रखिएगा दोस्तों, इश्क वाला लव बार बार नहीं मिलता।  अपने आस पास ढूँढिए तो ज़रा! अपने इश्क वाले लव को, और फिर,अपने किस्से को शेयर कीजिए..कीजिइएगा ज़रूर..मैसेज बॉक्स में लिखकर भेजिए, भई भेजिएगा ज़रूर, मुझे इंतज़ार रहेगा.....

और..आप भी तो इंतजार करेंगे न ....अगले एपिसोड का...करेंगे न दोस्तों!

सुनते रहिए, सुनाते रहिए, हो सकता है, यूँ ही बातें करते करते आपको भी इश्क वाला लव हो जाए! संभव है न दोस्तों? मेरे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए...मुझे सुनिए....औरों को सुनाइए....मिलती हूँ आपसे अगले एपिसोड के साथ...

नमस्कार दोस्तों!. मैं, मीता गुप्ता..वही प्रीत..वही किस्से कहानियाँ  लिए.. आपकी मीत..!

END MUSIC

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